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राष्ट्रीय बैंक में खाते की अनिवार्यता
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तिंदवारी। क्षेत्र के दो हजार से ज्यादा किसानों को पीएम सम्मान निधि का पैसा एक बार भी नहीं मिला। राजस्व और कृषि विभाग में किसान कई बार आधार और पासबुक की छाया प्रति जमा कर चुके हैं। कई बार चक्कर काटने के बाद कर्मचारी गोल-गोल जवाब दे रहे हैं।
कृषि विभाग का कहना है कि जिन किसानों के खातों में पीएम किसान-सम्मान निधि नहीं पहुंच रही है, वे किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में अपना खाता खुलवाकर पासबुक और आधार की फोटो कापी कृषि इकाई या नियुक्त कर्मचारी को उपलब्ध करा दें।
पीएम किसान सम्मान निधि न मिलने से इलाके के किसान परेशान हैं। बताया जाता है कि यहां के दो हजार से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का एक बार भी पैसा नहीं मिला है। सम्मान निधि के लिए किसान राजस्व और कृषि विभाग का चक्कर काट रहे हैं।
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महुई गांव के किसान जयकरण सिंह ने बताया कि कस्बा स्थित कृषि इकाई और बांदा कार्यालय में चार बार अपने आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटो कापी जमा करा चुके हैं। पिपरगवां के किसान रामगोपाल का कहना है कि जरूरी कागजात जमा कराने के बाद कस्बा व बांदा स्थित कृषि इकाई कार्यालय में कई बार चक्कर लगा चुके हैं। हर बार अगले माह खाते में पैसा पहुंच जाने की बात कहकर टरका देते हैं।
किसान संगठन जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि सरकारी नुमाइंदे किसानों के साथ धोखा कर रहे हैं। सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। कृषि इकाई के प्रभारी गौतेंद्र मौर्या के मुताबिक किसानों को अब राष्ट्रीयकृत बैंक में नया खाता खुलवाना पड़ेगा। फोटो प्रति संबंधित कर्मचारियों व कार्यालय में जमा करना होगी। इलाके के ज्यादातर किसानों के खाते आर्यावर्त बैंक में हैं। अब उन्हें राष्ट्रीयकृत बैंकों स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि में खाता खुलवाने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ेगी।
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कृषि विभाग का कहना है कि जिन किसानों के खातों में पीएम किसान-सम्मान निधि नहीं पहुंच रही है, वे किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में अपना खाता खुलवाकर पासबुक और आधार की फोटो कापी कृषि इकाई या नियुक्त कर्मचारी को उपलब्ध करा दें।
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पीएम किसान सम्मान निधि न मिलने से इलाके के किसान परेशान हैं। बताया जाता है कि यहां के दो हजार से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का एक बार भी पैसा नहीं मिला है। सम्मान निधि के लिए किसान राजस्व और कृषि विभाग का चक्कर काट रहे हैं।
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महुई गांव के किसान जयकरण सिंह ने बताया कि कस्बा स्थित कृषि इकाई और बांदा कार्यालय में चार बार अपने आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटो कापी जमा करा चुके हैं। पिपरगवां के किसान रामगोपाल का कहना है कि जरूरी कागजात जमा कराने के बाद कस्बा व बांदा स्थित कृषि इकाई कार्यालय में कई बार चक्कर लगा चुके हैं। हर बार अगले माह खाते में पैसा पहुंच जाने की बात कहकर टरका देते हैं।
किसान संगठन जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि सरकारी नुमाइंदे किसानों के साथ धोखा कर रहे हैं। सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। कृषि इकाई के प्रभारी गौतेंद्र मौर्या के मुताबिक किसानों को अब राष्ट्रीयकृत बैंक में नया खाता खुलवाना पड़ेगा। फोटो प्रति संबंधित कर्मचारियों व कार्यालय में जमा करना होगी। इलाके के ज्यादातर किसानों के खाते आर्यावर्त बैंक में हैं। अब उन्हें राष्ट्रीयकृत बैंकों स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि में खाता खुलवाने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ेगी।