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मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक बोले: प्रधानमंत्री ने देश को खुशियों का मौका दिया, देर से सही पर दुरुस्त फैसला
Sat, 07 Aug 2021 09:19 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 07 Aug 2021 09:19 PM IST
सार
अशोक ध्यानचंद ने शनिवार को फोन पर बातचीत में कहा कि बाबूजी (मेजर ध्यानचंद) का देश के खेल जगत में खास योगदान है। वह खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत हैं।
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अशोक ध्यानचंद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के पुत्र और विश्व कप के पूर्व विजेता, भारतीय हाकी टीम के सदस्य अशोक ध्यानचंद का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक बड़ी खुशी का मौका दिया है। देर से ही सही पर दुरुस्त फैसला हुआ है।
अशोक ध्यानचंद की ससुराल बांदा शहर में है। वह सपरिवार दिल्ली में रह रहे हैं। शनिवार को फोन पर बातचीत में कहा कि बाबूजी (मेजर ध्यानचंद) का देश के खेल जगत में खास योगदान है। वह खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत हैं। बाबूजी ने खिलाड़ियों में जोश भरा और खेलों के प्रति आकर्षण पैदा किया।
देश को मेडल दिला गौरवान्वित किया। अशोक ने कहा कि खेल रत्न पुरस्कार बाबू जी के नाम पर करने पर पूरे देश में एक स्वर पर स्वागत हो रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ओलंपिक खेलों के समय खुशी की सौगात दी है।
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अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं अशोक
करीब 71 वर्षीय अशोक ध्यानचंद 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने तीन विश्व कप खेले। 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय हाकी टीम में अशोक भी शामिल थे। उन्होंने दो बार 1972 में म्यूनिख में और 1976 में मॉट्रिंयल में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। कई पदक जीते।
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अशोक ध्यानचंद की ससुराल बांदा शहर में है। वह सपरिवार दिल्ली में रह रहे हैं। शनिवार को फोन पर बातचीत में कहा कि बाबूजी (मेजर ध्यानचंद) का देश के खेल जगत में खास योगदान है। वह खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत हैं। बाबूजी ने खिलाड़ियों में जोश भरा और खेलों के प्रति आकर्षण पैदा किया।
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देश को मेडल दिला गौरवान्वित किया। अशोक ने कहा कि खेल रत्न पुरस्कार बाबू जी के नाम पर करने पर पूरे देश में एक स्वर पर स्वागत हो रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ओलंपिक खेलों के समय खुशी की सौगात दी है।
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अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं अशोक
करीब 71 वर्षीय अशोक ध्यानचंद 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने तीन विश्व कप खेले। 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय हाकी टीम में अशोक भी शामिल थे। उन्होंने दो बार 1972 में म्यूनिख में और 1976 में मॉट्रिंयल में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। कई पदक जीते।