{"_id":"622ceb7b8b84284509663fb7","slug":"losers-break-into-the-home-of-the-winners-banda-news-knp6853275141","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीतने वालों के ‘घर’ में हारने वालों की सेंधमारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीतने वालों के ‘घर’ में हारने वालों की सेंधमारी
विज्ञापन
बांदा। चुनाव नतीजों को लेकर अब मंथन और बाल की खाल निकाली जा रही है। फिलहाल चौपालों से लेकर चाय-पान की दुकानों तक यही चर्चाएं हैं। ताजी चर्चा यह है कि जीतने वालों के ‘घर’ में हारने वालों ने सेंध लगा दी। चुनाव फतह करने वाले अपने ही गांव-मोहल्ले में ॅसबका साथ’ मंत्र पर खरे नहीं उतर सके। सपा के इकलौते जीते प्रत्याशी के आवासीय मोहल्ले में भाजपा भारी पड़ी। उधर, भाजपा के जीते उम्मीदवारों ने सपा और बसपा को शिकस्त तो दी, पर अपने घर में इनकी एंट्री नहीं रोक सके। चुनाव नतीजे हमेशा दिलचस्प हुआ करते हैं। अबकी भी यही हुआ। चुनाव क्षेत्र के सैकड़ों गांव-मोहल्लों में अपना परचम लहराने वाले भाजपा, सपा और बसपा के प्रत्याशी तथा अन्य पुरोधा अपने यहां सबको साथ नहीं ले सके।
बांदा विधानसभा क्षेत्र
भाजपा से दोबारा जीते और अपना विधायक पद बरकरार रखने वाले प्रकाश द्विवेदी अपने पैतृक गांव छिबांव और दूसरे आवासीय गांव खुरहंड में अव्वल रहे। छिबांव के तीन बूथों में उन्हें 1606 वोट मिले। विधायक के गांव में बसपा को 548 और सपा को सिर्फ 241 वोट प्राप्त हुए। इसी तरह खुरहंड में चार बूथों पर भाजपा प्रत्याशी को 1241 वोट हासिल हुए। लेकिन यहां सपा ने भी तगड़ी सेंध लगाकर 844 वोट हथिया लिए।
बसपा ने 543 वोट झटके। रनर (दूसरे नंबर) पर रहीं सपा की मंजुला सिंह के आवासीय मोहल्ले सिविल लाइन में भाजपा आगे रही। भाजपा को 1458 और सपा को सिर्फ 1148 वोट मिले। बसपा प्रत्याशी धीरज प्रकाश ने अपने पैतृक गांव तिंदवारा में अपनी पकड़ बनाए रखी। हालांकि यहां भाजपा और सपा ने भी सेंध लगाकर लगभग एक हजार वोट झटके। तीन बूथों वाले तिंदवारा गांव में बसपा प्रत्याशी को 1080, सपा को 569 और भाजपा को 469 वोट हासिल हुए।
विज्ञापन
बबेरू विधानसभा क्षेत्र
कांटे की टक्कर देकर भाजपा से सीट छीनने वाले सपा के विशंभर सिंह यादव को क्षेत्र के मतदाताओं ने भले ही हाथों हाथ लिया पर वह अपने आवासीय मोहल्ले में भाजपा को मात नहीं दे सके। विशंभर सिंह यादव भाजपा को 7393 वोटों से पराजित किया। लेकिन उनके आवासीय मोहल्ले मनोरथ थोक (बबेरू) के दोनों बूथों में भाजपा भारी पड़ी। यहां भाजपा को 827 और सपा को 335 वोट मिले। बीएसपी ने भी 104 वोट झटके।
नरैनी (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र
नगर पंचायत अध्यक्ष से भाजपा के टिकट पर विधान सभा का सफर तय करने वाली विजयी प्रत्याशी ओममणि वर्मा अपने मोहल्ले कृष्णा नगर में भी अन्य दलों पर भारी पड़ीं। हालांकि सपा और बसपा ने तीन सैकड़ा से ज्यादा वोट की सेंध लगाई। भाजपा को 345 और सपा को 191 व बसपा को 119 वोट हासिल हुए।
तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र
चारों सीटों में सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीत का ताज पहनने वाले भाजपा के रामकेश निषाद चुनाव क्षेत्र स्थित अपने पैतृक गांव पैलानी डेरा में अन्य दलों पर काफी भारी पड़े। इसके बाद भी सपा-बसपा ने यहां दो सैकड़ा से ज्यादा वोट हासिल कर लिए। गांव के दोनों बूथों पर भाजपा को 711 वोट प्राप्त हुए। सपा ने 107 और बसपा ने 64 वोटों की सेंधमारी की।
स्थानीय निवर्तमान विधायक और सपा से प्रत्याशी रहे बृजेश कुमार प्रजापति अपने पैतृक गांव जारी (तिंदवारी विधान सभा क्षेत्र) में भाजपा से कुछ मतों से ही बढ़त ले पाए। यहां दोनों बूथों में सपा को 1146 और भाजपा को 955 वोट मिले। बसपा ने भी 626 वोट हथिया लिए। बसपा प्रत्याशी जयराम सिंह भी अपने पैतृक गांव में भाजपा और सपा का पूरी तरह सफाया नहीं कर पाए। दोनों दलों ने यहां भी सेंध लगाई। लेकिन बसपा प्रत्याशी 369 वोटों के साथ अव्वल रहे। भाजपा को 164 और सपा को 139 वोट हाथ आए।
हैं जिलाध्यक्ष, पर पड़ोसियों ने भी किया खारिज
बांदा। जिन प्रमुख दलों के प्रत्याशी हारे-जीते उनके जिलाध्यक्षों के पड़ोसियों से रिश्तों की भी चुनाव नतीजों ने पोल खोल दी। दो जिलाध्यक्ष अपनी लाज बचाने में कामयाब रहे वहीं दो घर में ही फ्लाप साबित हुए। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय सिंह अतर्रा में संजय नगर में रहते हैं। उनके बूथ में भाजपा भारी रही। भाजपा को 343 वोट मिले। सपा को 145 और बसपा को 67 वोट हासिल हुए। सपा जिलाध्यक्ष विजयकरन यादव कलक्टर पुरवा के मूल निवासी हैं। इनके बूथ 271 में सपा का ही पलड़ा भारी रहा।
सपा प्रत्याशी को 447 वोट मिले। लेकिन बसपा ने भी 159 और भाजपा ने 72 वोटों की सेंध सपा अध्यक्ष के घर में लगाई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न दुबे लालू बांदा शहर के कटरा निवासी हैं। कटरा व आसपास के इलाकों में भाजपा का जादू चला। यहां भाजपा प्रत्याशी को 11,580 वोट मिले। सपा ने यहां 7334 वोटों की भागीदारी की। बसपा भी 1902 वोट लेने में सफल रही। जिलाध्यक्ष के मोहल्ले में कांग्रेस को मात्र 300 वोट प्राप्त हुए। बसपा जिलाध्यक्ष गुलाब वर्मा के गांव कुरौली में भाजपा 214 वोटों के साथ अव्वल रही। सपा को 181 वोट मिले। अध्यक्ष के गांव में बसपा 146 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रही।
विज्ञापन
बांदा विधानसभा क्षेत्र
भाजपा से दोबारा जीते और अपना विधायक पद बरकरार रखने वाले प्रकाश द्विवेदी अपने पैतृक गांव छिबांव और दूसरे आवासीय गांव खुरहंड में अव्वल रहे। छिबांव के तीन बूथों में उन्हें 1606 वोट मिले। विधायक के गांव में बसपा को 548 और सपा को सिर्फ 241 वोट प्राप्त हुए। इसी तरह खुरहंड में चार बूथों पर भाजपा प्रत्याशी को 1241 वोट हासिल हुए। लेकिन यहां सपा ने भी तगड़ी सेंध लगाकर 844 वोट हथिया लिए।
विज्ञापन
बसपा ने 543 वोट झटके। रनर (दूसरे नंबर) पर रहीं सपा की मंजुला सिंह के आवासीय मोहल्ले सिविल लाइन में भाजपा आगे रही। भाजपा को 1458 और सपा को सिर्फ 1148 वोट मिले। बसपा प्रत्याशी धीरज प्रकाश ने अपने पैतृक गांव तिंदवारा में अपनी पकड़ बनाए रखी। हालांकि यहां भाजपा और सपा ने भी सेंध लगाकर लगभग एक हजार वोट झटके। तीन बूथों वाले तिंदवारा गांव में बसपा प्रत्याशी को 1080, सपा को 569 और भाजपा को 469 वोट हासिल हुए।
विज्ञापन
बबेरू विधानसभा क्षेत्र
कांटे की टक्कर देकर भाजपा से सीट छीनने वाले सपा के विशंभर सिंह यादव को क्षेत्र के मतदाताओं ने भले ही हाथों हाथ लिया पर वह अपने आवासीय मोहल्ले में भाजपा को मात नहीं दे सके। विशंभर सिंह यादव भाजपा को 7393 वोटों से पराजित किया। लेकिन उनके आवासीय मोहल्ले मनोरथ थोक (बबेरू) के दोनों बूथों में भाजपा भारी पड़ी। यहां भाजपा को 827 और सपा को 335 वोट मिले। बीएसपी ने भी 104 वोट झटके।
नरैनी (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र
नगर पंचायत अध्यक्ष से भाजपा के टिकट पर विधान सभा का सफर तय करने वाली विजयी प्रत्याशी ओममणि वर्मा अपने मोहल्ले कृष्णा नगर में भी अन्य दलों पर भारी पड़ीं। हालांकि सपा और बसपा ने तीन सैकड़ा से ज्यादा वोट की सेंध लगाई। भाजपा को 345 और सपा को 191 व बसपा को 119 वोट हासिल हुए।
तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र
चारों सीटों में सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीत का ताज पहनने वाले भाजपा के रामकेश निषाद चुनाव क्षेत्र स्थित अपने पैतृक गांव पैलानी डेरा में अन्य दलों पर काफी भारी पड़े। इसके बाद भी सपा-बसपा ने यहां दो सैकड़ा से ज्यादा वोट हासिल कर लिए। गांव के दोनों बूथों पर भाजपा को 711 वोट प्राप्त हुए। सपा ने 107 और बसपा ने 64 वोटों की सेंधमारी की।
स्थानीय निवर्तमान विधायक और सपा से प्रत्याशी रहे बृजेश कुमार प्रजापति अपने पैतृक गांव जारी (तिंदवारी विधान सभा क्षेत्र) में भाजपा से कुछ मतों से ही बढ़त ले पाए। यहां दोनों बूथों में सपा को 1146 और भाजपा को 955 वोट मिले। बसपा ने भी 626 वोट हथिया लिए। बसपा प्रत्याशी जयराम सिंह भी अपने पैतृक गांव में भाजपा और सपा का पूरी तरह सफाया नहीं कर पाए। दोनों दलों ने यहां भी सेंध लगाई। लेकिन बसपा प्रत्याशी 369 वोटों के साथ अव्वल रहे। भाजपा को 164 और सपा को 139 वोट हाथ आए।
हैं जिलाध्यक्ष, पर पड़ोसियों ने भी किया खारिज
बांदा। जिन प्रमुख दलों के प्रत्याशी हारे-जीते उनके जिलाध्यक्षों के पड़ोसियों से रिश्तों की भी चुनाव नतीजों ने पोल खोल दी। दो जिलाध्यक्ष अपनी लाज बचाने में कामयाब रहे वहीं दो घर में ही फ्लाप साबित हुए। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय सिंह अतर्रा में संजय नगर में रहते हैं। उनके बूथ में भाजपा भारी रही। भाजपा को 343 वोट मिले। सपा को 145 और बसपा को 67 वोट हासिल हुए। सपा जिलाध्यक्ष विजयकरन यादव कलक्टर पुरवा के मूल निवासी हैं। इनके बूथ 271 में सपा का ही पलड़ा भारी रहा।
सपा प्रत्याशी को 447 वोट मिले। लेकिन बसपा ने भी 159 और भाजपा ने 72 वोटों की सेंध सपा अध्यक्ष के घर में लगाई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न दुबे लालू बांदा शहर के कटरा निवासी हैं। कटरा व आसपास के इलाकों में भाजपा का जादू चला। यहां भाजपा प्रत्याशी को 11,580 वोट मिले। सपा ने यहां 7334 वोटों की भागीदारी की। बसपा भी 1902 वोट लेने में सफल रही। जिलाध्यक्ष के मोहल्ले में कांग्रेस को मात्र 300 वोट प्राप्त हुए। बसपा जिलाध्यक्ष गुलाब वर्मा के गांव कुरौली में भाजपा 214 वोटों के साथ अव्वल रही। सपा को 181 वोट मिले। अध्यक्ष के गांव में बसपा 146 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रही।