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Banda News: साढ़े छह करोड़ के पशु पॉली क्लीनिक में ताला
Wed, 22 Feb 2023 11:29 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 22 Feb 2023 11:29 PM IST
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साढ़े छह करोड़ के पशु पॉली क्लीनिक में ताला
- पशु रोग निदान प्रयोगशाला स्टोर रूम में तब्दील
- आयुक्त की पहल, जल्द होगी स्टाफ की तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। मंडल मुख्यालय बांदा में करोड़ों की लागत से बने पशु चिकित्सा पॉली क्लीनिक व पशु रोग निदान प्रयोगशाला में ताला पड़ा है। इसके कुछ हिस्से में अपर निदेशक पशुपालन रावेंद्र सिंह राठौर का कार्यालय चल रहा है। कमिश्नर की पहल पर शासन ने दोनों के संचालन की कवायद शुरू की है। यहां सर्जरी, ग्यानोलॉजिस्ट, मेडिसिन, पैथालॉजी विभाग में नियुक्तियां होनी हैं।
वर्ष 2017 में 6.49 करोड़ रुपये की लागत से पशु चिकित्सा पॉली क्लीनिक और वर्ष 2016 में 35.73 लाख की लागत से पशु रोग निदान प्रयोगशाला को स्वीकृति मिली थी। यह दोनों भवन मई 2018 व जून 2019 में बनकर तैयार हो गए थे। इसके बाद से अब तक यहां कर्मियों की नियुक्तियां नहीं हुई।
ऐसे में पशु निरोग प्रयोगशाला स्टोर रूम व पॉली क्लीनिक संयुक्त पशु निदेशक का कार्यालय बनकर रह गया है। मंडलायुक्त आरपी सिंह की पहल पर शासन ने सर्जरी, गायनी, पैथोलॉजी सहित मेडिसिन विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सक व कर्मचारियों की नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी है। शासन ने अपर निदेशक पशुपालन से पॉली क्लीनिक की स्थिति और जनपद में उपलब्ध स्टाप की जानकारी मांगी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पॉली क्लीनिक व पशु रोग निदान प्रयोगशाला में स्टाफ की तैनाती होगी।
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जर्जर हो रहे हैं आवासीय भवन
पॉली क्लीनिक कर्मियों के लिए 1.22 करोड़ की लागत से परिसर में आवासीय भवन बनाए गए हैं। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने आवासीय भवन बनाकर वर्ष 2022 में पशुपालन विभाग को हस्तांतरित कर दिए थे। इसके बाद से रख-रखाव के अभाव में भवन जर्जर होते जा रहे हैं। यहां आने जाने का मार्ग उखड़ गया है। कॉलोनियों के आसपास झाड़ियां उग आई हैं।
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सर्जरी के लिए 100 पशु हो सकेंगे भर्ती
पशु निरोग प्रयोगशाला व पॉली क्लीनिक में पशुओं की सर्जरी सहित गंभीर बीमारियों का इलाज होगा। यहां सर्जरी के 100 पशुओं को भर्ती करने की व्यवस्था है। पशुओं का प्रसव, रक्त की जांच आदि यहीं पर होगी। प्रयोगशाला में पशुओं में होने वाले रोगों का शोध व इलाज होगा।
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स्टाफ की कमी से जूझ रहा विभाग
उप निदेशक पशुपालन मनोज अवस्थी का कहना है कि मंडल में 1277 अस्थायी और स्थायी कान्हा गोशाला, कांजी हाउस, वृहद गो संरक्षण केंद्र हैं। इनमें करीब दो लाख पशु संरक्षित हैं। स्टाफ की कमी के कारण दिक्कतें आ रही हैं। पॉली क्लीनिक के संचालन से दिक्कतें कम होंगी। पशुपालकों को भी पशुओं की सर्जरी व गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कानपुर, लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।
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- पशु रोग निदान प्रयोगशाला स्टोर रूम में तब्दील
- आयुक्त की पहल, जल्द होगी स्टाफ की तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। मंडल मुख्यालय बांदा में करोड़ों की लागत से बने पशु चिकित्सा पॉली क्लीनिक व पशु रोग निदान प्रयोगशाला में ताला पड़ा है। इसके कुछ हिस्से में अपर निदेशक पशुपालन रावेंद्र सिंह राठौर का कार्यालय चल रहा है। कमिश्नर की पहल पर शासन ने दोनों के संचालन की कवायद शुरू की है। यहां सर्जरी, ग्यानोलॉजिस्ट, मेडिसिन, पैथालॉजी विभाग में नियुक्तियां होनी हैं।
वर्ष 2017 में 6.49 करोड़ रुपये की लागत से पशु चिकित्सा पॉली क्लीनिक और वर्ष 2016 में 35.73 लाख की लागत से पशु रोग निदान प्रयोगशाला को स्वीकृति मिली थी। यह दोनों भवन मई 2018 व जून 2019 में बनकर तैयार हो गए थे। इसके बाद से अब तक यहां कर्मियों की नियुक्तियां नहीं हुई।
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ऐसे में पशु निरोग प्रयोगशाला स्टोर रूम व पॉली क्लीनिक संयुक्त पशु निदेशक का कार्यालय बनकर रह गया है। मंडलायुक्त आरपी सिंह की पहल पर शासन ने सर्जरी, गायनी, पैथोलॉजी सहित मेडिसिन विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सक व कर्मचारियों की नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी है। शासन ने अपर निदेशक पशुपालन से पॉली क्लीनिक की स्थिति और जनपद में उपलब्ध स्टाप की जानकारी मांगी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पॉली क्लीनिक व पशु रोग निदान प्रयोगशाला में स्टाफ की तैनाती होगी।
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जर्जर हो रहे हैं आवासीय भवन
पॉली क्लीनिक कर्मियों के लिए 1.22 करोड़ की लागत से परिसर में आवासीय भवन बनाए गए हैं। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने आवासीय भवन बनाकर वर्ष 2022 में पशुपालन विभाग को हस्तांतरित कर दिए थे। इसके बाद से रख-रखाव के अभाव में भवन जर्जर होते जा रहे हैं। यहां आने जाने का मार्ग उखड़ गया है। कॉलोनियों के आसपास झाड़ियां उग आई हैं।
सर्जरी के लिए 100 पशु हो सकेंगे भर्ती
पशु निरोग प्रयोगशाला व पॉली क्लीनिक में पशुओं की सर्जरी सहित गंभीर बीमारियों का इलाज होगा। यहां सर्जरी के 100 पशुओं को भर्ती करने की व्यवस्था है। पशुओं का प्रसव, रक्त की जांच आदि यहीं पर होगी। प्रयोगशाला में पशुओं में होने वाले रोगों का शोध व इलाज होगा।
स्टाफ की कमी से जूझ रहा विभाग
उप निदेशक पशुपालन मनोज अवस्थी का कहना है कि मंडल में 1277 अस्थायी और स्थायी कान्हा गोशाला, कांजी हाउस, वृहद गो संरक्षण केंद्र हैं। इनमें करीब दो लाख पशु संरक्षित हैं। स्टाफ की कमी के कारण दिक्कतें आ रही हैं। पॉली क्लीनिक के संचालन से दिक्कतें कम होंगी। पशुपालकों को भी पशुओं की सर्जरी व गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कानपुर, लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।