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लॉकडाउन ने बुझा दिए घुमंतू परिवारों के चूल्हे
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Lockdown stoves of roaming families
- फोटो : BANDA
बांदा। लॉकडाउन से पैदा हुई बेरोजगारी की मार घुमंतू परिवारों पर भी पड़ रही हैं। मजदूरी ठप होने के साथ ही इनके अन्य कारोबार भी बंद हैं। घरों में चूल्हें नहीं जल रहे हैं। दशकों से झुग्गी झोपिड़यों में जीवन बिता रहे इन परिवारों के पास राशनकार्ड भी नहीं हैं।
इसकी बानगी नरैनी तहसील के खेरवा गांव में है। यहां कुचबंधिहा घुमंतू परिवार आबाद है। सामूहिक हस्ताक्षरों से एसडीएम को दी अर्जी में इन परिवारों ने बताया कि लॉकडाउन से कहीं मजदूरी करने नहीं जा पा रहे। घर में अनाज का दाना नहीं है। कई दिन से चूल्हे नहीं जले। बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं। कहा कि उनके पास राशनकार्ड भी नहीं है।
आपूर्ति निरीक्षक ने राशनकार्ड उपलब्ध कराने से हाथ खडे़ कर दिए हैं। घूमतूं परिवारों ने तत्काल राशन और भोजन की मांग की है। कहा है कि शीघ्र व्यवस्था न हुई तो उनके परिवारों में भूख से मौत हो सकती है। अर्जी देने वालों में केला, सुदेवी, पप्पू, रूबी, रानी, उर्मिला, महेश, अंजली, ममता आदि शामिल है।
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घुमंतू परिवारों में टीबी का प्रकोप
बांदा। नरैनी क्षेत्र के खम्हौरा गांव में बसे घुमंतू परिवारों में कई महिला-पुरुष टीबी के शिकार हो गए हैं। इनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। विद्याधाम समिति के राजा भइया ने बताया कि बीमारों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। आर्थिक तंगहाली के चलते ये अपने पास इलाज नहीं करा सकते। यहां के कई लोग टीबी से जूझ रहे हैं। लॉकडाउन में इनकी हालत और दयनीय हो गई है।
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इसकी बानगी नरैनी तहसील के खेरवा गांव में है। यहां कुचबंधिहा घुमंतू परिवार आबाद है। सामूहिक हस्ताक्षरों से एसडीएम को दी अर्जी में इन परिवारों ने बताया कि लॉकडाउन से कहीं मजदूरी करने नहीं जा पा रहे। घर में अनाज का दाना नहीं है। कई दिन से चूल्हे नहीं जले। बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं। कहा कि उनके पास राशनकार्ड भी नहीं है।
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आपूर्ति निरीक्षक ने राशनकार्ड उपलब्ध कराने से हाथ खडे़ कर दिए हैं। घूमतूं परिवारों ने तत्काल राशन और भोजन की मांग की है। कहा है कि शीघ्र व्यवस्था न हुई तो उनके परिवारों में भूख से मौत हो सकती है। अर्जी देने वालों में केला, सुदेवी, पप्पू, रूबी, रानी, उर्मिला, महेश, अंजली, ममता आदि शामिल है।
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घुमंतू परिवारों में टीबी का प्रकोप
बांदा। नरैनी क्षेत्र के खम्हौरा गांव में बसे घुमंतू परिवारों में कई महिला-पुरुष टीबी के शिकार हो गए हैं। इनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। विद्याधाम समिति के राजा भइया ने बताया कि बीमारों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। आर्थिक तंगहाली के चलते ये अपने पास इलाज नहीं करा सकते। यहां के कई लोग टीबी से जूझ रहे हैं। लॉकडाउन में इनकी हालत और दयनीय हो गई है।