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Banda News: बच्चे का गला घोंटने वाले को आजीवन कारावास
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बांदा। नौ साल पहले चार वर्षीय बच्चे की गला दबाकर हत्या करने वाले को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश चन्द्रपाल द्वितीय की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अन्य धाराओं मे सजा सहित 12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना की अदायगी न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भोगनी होगी। इस मामले में एक अन्य आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। दोषी को जेल भेज दिया गया।
नगर कोतवाली क्षेत्र के तिंदवारा गांव के मजरा शिरोमन का पुरवा निवासी लवकुश ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 8 अक्टूबर 2015 को उसके घर मे उसके पिता का श्राद्ध था। पूरा परिवार उसी में व्यस्त था। शाम के समय उसका चार वर्षीय पुत्र भरत कहीं नजर नहीं आया। सुबह खोजबीन की गई तो पता चला कि धान के खेत में मिट्टी में दबा हुआ मृत पड़ा है।
इकलौते पुत्र की हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। इस मामले की तहरीर मिलने पर पुलिस ने हत्या कर शव गायब करने का मामला दर्ज किया। विवेचना के दौरान प्रकाश में आए स्वयंवर सिंह उर्फ छोटे निवासी शिरोमन पुरवा और दूसरे आरोपी शिवप्रसाद आरख निवासी सेमरिया मिरदहा के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
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अभियोजन की ओर से 11 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने स्वयंवर सिंह को हत्या करने व शव गायब करने का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि दूसरे आरोपी शिवप्रसाद आरख को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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नगर कोतवाली क्षेत्र के तिंदवारा गांव के मजरा शिरोमन का पुरवा निवासी लवकुश ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 8 अक्टूबर 2015 को उसके घर मे उसके पिता का श्राद्ध था। पूरा परिवार उसी में व्यस्त था। शाम के समय उसका चार वर्षीय पुत्र भरत कहीं नजर नहीं आया। सुबह खोजबीन की गई तो पता चला कि धान के खेत में मिट्टी में दबा हुआ मृत पड़ा है।
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इकलौते पुत्र की हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। इस मामले की तहरीर मिलने पर पुलिस ने हत्या कर शव गायब करने का मामला दर्ज किया। विवेचना के दौरान प्रकाश में आए स्वयंवर सिंह उर्फ छोटे निवासी शिरोमन पुरवा और दूसरे आरोपी शिवप्रसाद आरख निवासी सेमरिया मिरदहा के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
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अभियोजन की ओर से 11 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने स्वयंवर सिंह को हत्या करने व शव गायब करने का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि दूसरे आरोपी शिवप्रसाद आरख को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।