{"_id":"6ab2be3d3fd312b1b80c62ed","slug":"license-revoked-medicines-worth-lakhs-at-risk-banda-news-c-12-1-knp1100-1659194-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: लाइसेंस निरस्त, लाखों की दवा पर संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: लाइसेंस निरस्त, लाखों की दवा पर संकट
विज्ञापन
बांदा। कोडीनयुक्त सिरप कांड में 30 हजार बोतल सिरप पकड़े जाने के बाद अब मेडिकल स्टोरों पर रखी लाखों रुपये की दवा भी संकट में है।
अतर्रा निवासी मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता और सह आरोपी प्रवीण उर्फ लकी के मेडिकल लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। दोनों दुकानों से दवा की बिक्री रोक दी गई है। लाइसेंस निरस्त होने के बाद स्टॉक में मौजूद दवाओं को या तो संबंधित स्टॉकिस्ट को वापस करना होगा या औषधि विभाग की निगरानी में नष्ट कराना होगा।
तीन सितंबर को बिसंडा क्षेत्र में एसटीएफ ने करीब 30 हजार बोतल कोडीनयुक्त सिरप पकड़ा था। इसकी कीमत करीब 60.45 लाख रुपये बताई गई थी। मामले की जांच में कई मेडिकल कारोबारियों और उनके संपर्कों के नाम सामने आए हैं।
औषधि विभाग ने ओम मेडिकल एजेंसी टेढ़ा, हमीरपुर और अतर्रा निवासी एक अन्य आरोपी के परिवार के नाम संचालित मेडिकल स्टोर की भी जांच तेज कर दी है।
जांच पूरी होने के बाद इन दोनों दुकानों के लाइसेंस भी निरस्त किए जा सकते हैं। सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मामले से जुड़े अन्य दो आरोपियों के परिजनों के लाइसेंस भी जल्द निरस्त किए जाएंगे।
विज्ञापन
-- -
रवींद्र समेत अन्य की तलाश
पुलिस ने भी आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। ओम मेडिकल एजेंसी टेढ़ा का संचालक रवींद्र गुप्ता अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। इसके अलावा कुछ अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है। पूछताछ में मुख्य आरोपी और अन्य सह आरोपियों ने जिन लोगों के नाम बताए हैं, पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
विज्ञापन
अतर्रा निवासी मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता और सह आरोपी प्रवीण उर्फ लकी के मेडिकल लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। दोनों दुकानों से दवा की बिक्री रोक दी गई है। लाइसेंस निरस्त होने के बाद स्टॉक में मौजूद दवाओं को या तो संबंधित स्टॉकिस्ट को वापस करना होगा या औषधि विभाग की निगरानी में नष्ट कराना होगा।
तीन सितंबर को बिसंडा क्षेत्र में एसटीएफ ने करीब 30 हजार बोतल कोडीनयुक्त सिरप पकड़ा था। इसकी कीमत करीब 60.45 लाख रुपये बताई गई थी। मामले की जांच में कई मेडिकल कारोबारियों और उनके संपर्कों के नाम सामने आए हैं।
विज्ञापन
औषधि विभाग ने ओम मेडिकल एजेंसी टेढ़ा, हमीरपुर और अतर्रा निवासी एक अन्य आरोपी के परिवार के नाम संचालित मेडिकल स्टोर की भी जांच तेज कर दी है।
जांच पूरी होने के बाद इन दोनों दुकानों के लाइसेंस भी निरस्त किए जा सकते हैं। सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मामले से जुड़े अन्य दो आरोपियों के परिजनों के लाइसेंस भी जल्द निरस्त किए जाएंगे।
विज्ञापन
रवींद्र समेत अन्य की तलाश
पुलिस ने भी आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। ओम मेडिकल एजेंसी टेढ़ा का संचालक रवींद्र गुप्ता अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। इसके अलावा कुछ अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है। पूछताछ में मुख्य आरोपी और अन्य सह आरोपियों ने जिन लोगों के नाम बताए हैं, पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।