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Banda News: केन का पानी उतरा, रपटे अब भी डूबे
Tue, 29 Sep 2026 11:13 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 29 Sep 2026 11:13 PM IST
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फोटो-25-नांदादेव-पड़ोहरा रपटे के ऊपर से बहता पानी। संवाद
पैलानी (बांदा)। बीते सप्ताह मूसलाधार बारिश से चेतावनी बिंदु 103 मीटर तक पहुंची केन नदी का जलस्तर अब तेजी से घट रहा है, लेकिन पैलानी क्षेत्र की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं।
गौरी-अमारा, नांदादेव-पड़ोहरा और सिंधन कलां के तुरी नाला पर बने रपटों पर अब भी बाढ़ का पानी भरा है। इससे करीब 30 हजार की आबादी का आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों को नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है।
प्रशासन ने आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था की है। नाव घाटों पर पुलिस पिकेट भी लगाई गई है। एसडीएम पैलानी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। नाव से नदी पार करने वालों को लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश दिए गए हैं। नाविकों को सीमित संख्या में यात्रियों को ही पार कराने के लिए कहा गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश में रपटे डूबने से आवागमन बाधित होता है। इस बार भी नदी का जलस्तर घटने के बावजूद रास्ते नहीं खुले हैं। अमारा और नांदादेव-पड़ोहरा के ग्रामीणों ने चंद्रावल नदी पर अस्थायी पुल की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। उन्हें समय से विद्यालय पहुंचने में दिक्कत होती है।
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एक घंटे में नाव से पार होती है नदी
खप्टिहा कलां के नाविक शंकर निषाद और भूरा निषाद ने बताया कि नदी का लंबा पाट होने के कारण नाव से एक तरफ जाने में करीब एक घंटा लग जाता है। हवा तेज होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने अगली बारिश से पहले नदी घाटों पर पुल बनवाने की मांग की है।
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एसडीएम से गुहार लेकर पहुंचे ग्रामीण
पड़ोहरा गांव के ग्रामीणों ने जलभराव की समस्या को लेकर एसडीएम पैलानी को प्रार्थना पत्र दिया है। ग्रामीणों के अनुसार मुख्य रास्ते पर पानी भरा होने से आवागमन प्रभावित है। जलभराव से मकानों को नुकसान हो रहा है। गंदे पानी के कारण बीमारी फैलने की आशंका भी बनी हुई है। रामदास निषाद, रामदेव निषाद, लाल निषाद, बेनी निषाद और कृष्ण निषाद समेत ग्रामीणों ने जलभराव के स्थायी निस्तारण की मांग की है।
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गौरी-अमारा, नांदादेव-पड़ोहरा और सिंधन कलां के तुरी नाला पर बने रपटों पर अब भी बाढ़ का पानी भरा है। इससे करीब 30 हजार की आबादी का आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों को नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है।
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प्रशासन ने आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था की है। नाव घाटों पर पुलिस पिकेट भी लगाई गई है। एसडीएम पैलानी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। नाव से नदी पार करने वालों को लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश दिए गए हैं। नाविकों को सीमित संख्या में यात्रियों को ही पार कराने के लिए कहा गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश में रपटे डूबने से आवागमन बाधित होता है। इस बार भी नदी का जलस्तर घटने के बावजूद रास्ते नहीं खुले हैं। अमारा और नांदादेव-पड़ोहरा के ग्रामीणों ने चंद्रावल नदी पर अस्थायी पुल की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। उन्हें समय से विद्यालय पहुंचने में दिक्कत होती है।
एक घंटे में नाव से पार होती है नदी
खप्टिहा कलां के नाविक शंकर निषाद और भूरा निषाद ने बताया कि नदी का लंबा पाट होने के कारण नाव से एक तरफ जाने में करीब एक घंटा लग जाता है। हवा तेज होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने अगली बारिश से पहले नदी घाटों पर पुल बनवाने की मांग की है।
एसडीएम से गुहार लेकर पहुंचे ग्रामीण
पड़ोहरा गांव के ग्रामीणों ने जलभराव की समस्या को लेकर एसडीएम पैलानी को प्रार्थना पत्र दिया है। ग्रामीणों के अनुसार मुख्य रास्ते पर पानी भरा होने से आवागमन प्रभावित है। जलभराव से मकानों को नुकसान हो रहा है। गंदे पानी के कारण बीमारी फैलने की आशंका भी बनी हुई है। रामदास निषाद, रामदेव निषाद, लाल निषाद, बेनी निषाद और कृष्ण निषाद समेत ग्रामीणों ने जलभराव के स्थायी निस्तारण की मांग की है।

फोटो-25-नांदादेव-पड़ोहरा रपटे के ऊपर से बहता पानी। संवाद

फोटो-25-नांदादेव-पड़ोहरा रपटे के ऊपर से बहता पानी। संवाद