{"_id":"629f863b82dcb05cfa758224","slug":"ken-betwa-link-project-threatens-wildlife-banda-news-knp7011394187","type":"story","status":"publish","title_hn":"केन बेतवा लिंक परियोजना से वन्य जीवों को खतरा, कॉरिडोर विकसित करने की योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केन बेतवा लिंक परियोजना से वन्य जीवों को खतरा, कॉरिडोर विकसित करने की योजना
विज्ञापन
Ken-Betwa link project threatens wildlife
- फोटो : BANDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। केन-बेतवा लिंक परियोजना से वन्य जीवों को होने वाले नुकसान पर भारतीय वन्य जीव संस्थान ने गहरी चिंता जताई है। इसे देखते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के रानीपुर वन्य जीव अभयारण्य और मध्यप्रदेश के दुर्गावती व नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के मध्य एक कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई है। इसकी मदद से तीनों अभ्यारण्य में जीवों के अनुकूलता के अनुरूप एक माहौल मिल सकेगा। इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय ने ट्वीट कर जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि केन-बेतवा नदियों को जोड़ने के साथ जीवों के संरक्षण के लिहाज से विस्तृत कार्य योजना तैयार है। इससे रानीपुर में बाघों के संरक्षण के साथ गिद्ध और घड़ियाल जैसे अन्य कई प्रजातियों के जीवों का भी संरक्षण आसानी से होगा। जीवों के संरक्षण के लिए दोनों नदियों और उनके आसपास के पूरे इलाके का व्यापक अध्ययन और विश्लेषण किया गया है।
देहरादून के वैज्ञानिकों ने तैयार की रिपोर्ट
मंत्रालय ने ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप के लिए एकीकृत लैंडस्केप प्रबंधन योजना फाइनल कर दी है। इसे भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। इस परियोजना की वजह से तीनों अभ्यारण्य के जीव सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में वन्य जीवों को सुरक्षित दूसरे स्थान पर बसाने के लिए कोर एरिया को विस्तार देने की योजना है।
विज्ञापन
50 फीसदी हिस्सा पानी में डूब जाएगा
परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व का करीब 50 फीसदी हिस्सा पानी में डूब जाएगा। ऐसे में टाइगर रिजर्व के दोनों नदियों केन और बेतवा पर बनने वाले ढोढन बांध में अब सबसे बड़ी अड़चन पन्ना टाइगर रिजर्व ही है। पहले यहां से वन्यजीवों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया तेज हो गई है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि केन-बेतवा नदियों को जोड़ने के साथ जीवों के संरक्षण के लिहाज से विस्तृत कार्य योजना तैयार है। इससे रानीपुर में बाघों के संरक्षण के साथ गिद्ध और घड़ियाल जैसे अन्य कई प्रजातियों के जीवों का भी संरक्षण आसानी से होगा। जीवों के संरक्षण के लिए दोनों नदियों और उनके आसपास के पूरे इलाके का व्यापक अध्ययन और विश्लेषण किया गया है।
विज्ञापन
देहरादून के वैज्ञानिकों ने तैयार की रिपोर्ट
मंत्रालय ने ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप के लिए एकीकृत लैंडस्केप प्रबंधन योजना फाइनल कर दी है। इसे भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। इस परियोजना की वजह से तीनों अभ्यारण्य के जीव सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में वन्य जीवों को सुरक्षित दूसरे स्थान पर बसाने के लिए कोर एरिया को विस्तार देने की योजना है।
विज्ञापन
50 फीसदी हिस्सा पानी में डूब जाएगा
परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व का करीब 50 फीसदी हिस्सा पानी में डूब जाएगा। ऐसे में टाइगर रिजर्व के दोनों नदियों केन और बेतवा पर बनने वाले ढोढन बांध में अब सबसे बड़ी अड़चन पन्ना टाइगर रिजर्व ही है। पहले यहां से वन्यजीवों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया तेज हो गई है।