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सरल स्वभाव कवि और अच्छे अधिवक्ता थे केदारबाबू
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मशहूर कवि केदार बाबू की कविता के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा का ट्वीट।
- फोटो : BANDA
बांदा। जनकवि के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाबू केदारनाथ अग्रवाल की पुण्यतिथि पर उनकी कविताओं के माध्यम से उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दी गई। उनकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाए। केदारबाबू का निधन 22 जून 2000 को हुआ था।
सोमवार को आयोजित सादे समारोह में अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा कि केदार बाबू का जन्म कमासिन गांव में हुआ था। वह कवि के साथ अच्छे अधिवक्ता भी थे। उनका बहुत सरल व्यक्तित्व था। उनकी कविताएं आज भी जीवंत हैं। संजय निगम अकेला ने कहा कि केदारबाबू प्रकृति और किसानों के लिए काव्य लिखते रहे। बृजेश गुप्ता ने कहा कि केदारबाबू को सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
दीनदयाल सोनी ने कहा कि केदारबाबू की अपूर्वा युग की गंगा, फूल नहीं रंग बोलते हैं, गुल मेंहदी, पंख पतवार आदि कृतियां/रचनाएं हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। मनोज कुमार मृदुल ने कहा कि केदारबाबू माध्यमिक हिंदी साहित्य में पढ़ाए जा रहे हैं। गोष्ठी में पंकज बागवान, प्रभाकर तिवारी, विद्या सागर त्रिपाठी, अधिवक्ता रामदेव, विनय, अंबिका व्यास, रजनीश मोहन तथा रमेशचंद्र अवस्थी, केपी गुप्ता, राजकुमार दीक्षित, दिनेश त्रिवेदी, ब्रह्मानंद पांडेय, सचिन अग्निहोत्री, राजीव कुमार भी शामिल रहे।
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प्रियंका गांधी ने भी केदार बाबू को किया याद
बुंदेलखंड की शान कहे जाने वाले जनकवि केदार बाबू की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करने वालों में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी शामिल हैं। सोमवार को पुण्यतिथि पर प्रियंका गांधी ने केदारबाबू की कविता- ‘आओ बगिया लगाएं, फूल-पंखुड़ी खिलाएं, पात-पात को बजाएं, राग-रागिनी जिलाएं, सूर्य-चंद्र मुस्कराएं, रंग-मंच बने दुनिया’ फेसबुक पर ट्वीट की है। ट्वीट में प्रियंका खुद अपने आवास की बगिया में पौधे लगाते नजर आ रही हैं।
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सोमवार को आयोजित सादे समारोह में अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा कि केदार बाबू का जन्म कमासिन गांव में हुआ था। वह कवि के साथ अच्छे अधिवक्ता भी थे। उनका बहुत सरल व्यक्तित्व था। उनकी कविताएं आज भी जीवंत हैं। संजय निगम अकेला ने कहा कि केदारबाबू प्रकृति और किसानों के लिए काव्य लिखते रहे। बृजेश गुप्ता ने कहा कि केदारबाबू को सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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दीनदयाल सोनी ने कहा कि केदारबाबू की अपूर्वा युग की गंगा, फूल नहीं रंग बोलते हैं, गुल मेंहदी, पंख पतवार आदि कृतियां/रचनाएं हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। मनोज कुमार मृदुल ने कहा कि केदारबाबू माध्यमिक हिंदी साहित्य में पढ़ाए जा रहे हैं। गोष्ठी में पंकज बागवान, प्रभाकर तिवारी, विद्या सागर त्रिपाठी, अधिवक्ता रामदेव, विनय, अंबिका व्यास, रजनीश मोहन तथा रमेशचंद्र अवस्थी, केपी गुप्ता, राजकुमार दीक्षित, दिनेश त्रिवेदी, ब्रह्मानंद पांडेय, सचिन अग्निहोत्री, राजीव कुमार भी शामिल रहे।
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प्रियंका गांधी ने भी केदार बाबू को किया याद
बुंदेलखंड की शान कहे जाने वाले जनकवि केदार बाबू की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करने वालों में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी शामिल हैं। सोमवार को पुण्यतिथि पर प्रियंका गांधी ने केदारबाबू की कविता- ‘आओ बगिया लगाएं, फूल-पंखुड़ी खिलाएं, पात-पात को बजाएं, राग-रागिनी जिलाएं, सूर्य-चंद्र मुस्कराएं, रंग-मंच बने दुनिया’ फेसबुक पर ट्वीट की है। ट्वीट में प्रियंका खुद अपने आवास की बगिया में पौधे लगाते नजर आ रही हैं।