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कालिंजर किले में अब टिकट से प्रवेश, अगले हफ्ते टीम किले में करेगी बोरिंग

ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Wed, 04 Feb 2015 11:39 PM IST
Kalinjar in Fort admission tickets,
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बुंदेलखंड का प्रसिद्ध ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग अब टिकट लेकर ही देखा जा सकेगा। इसमें मुफ्त सैर सपाटा नहीं होगा। किले की कायापलट के लिए पुरातत्व विभाग हार्टीकल्चर टीम अगले सप्ताह भेजकर किले में बोरिंग कराएगी। इससे तालाबों को भरा जाएगा और घास व फूलों के पौधे लगाए जाएंगे।
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दुर्ग विकास के लिए काफी अरसे से प्रयासरत इंटेक चेप्टर के बांदा संयोजक हारिस जमां और उप संयोजक/जेएन डिग्री कॉलेज प्राचार्य डॉ.नंदलाल शुक्ल ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने कालिंजर किले को ‘टिकटेड मोनोमेंट’ घोषित कर दिया है। अब पर्यटकों आदि को किले में प्रवेश के लिए निर्धारित शुल्क देकर टिकट लेना होगा।

यह व्यवस्था जल्द शुरू होगी। कटरा से पैदल सीढ़ी द्वारा नीलकंठ मंदिर पहुंचने के रास्ते पर और किले को जोड़ने वाले सड़क मार्ग पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग अपनी टिकट चौकियां स्थापित करेगा। उन्होंने बताया कि इससे किले में आवारा जानवरों और असामाजिक तत्वों के प्रवेश पर रोक लगेगी।

गौरतलब है कि बुंदेलखंड में झांसी किले के बाद कालिंजर किले में टिकट व्यवस्था की जा रही है। इंटेक चेप्टर संयोजकों ने बताया कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग कालिंजर दुर्ग में खजुराहो की तर्ज पर कारपेट ग्रास (हरी घास) और फूलदार पौधे भी लगाएगा। इसके लिए अगले हफ्ते आगरा से एक टीम आ रही है जो किले में वाटर रिचार्ज बोर करेगी। इस बोरिंग से किले के तालाबों को भी भरा जा सकेगा।

केंद्र ने वापस ले लिए साढ़े पांच करोड़
बांदा। जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा से कालिंजर दुर्ग का भला नहीं हो पा रहा। तभी लखनऊ स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास कालिंजर दुर्ग के विकास को बजट नहीं है। उधर, केंद्र ने विभाग को दिए साढ़े पांच करोड़ रुपये पिछले माह वापस ले लिए हैं। इसमें कुछ बजट कालिंजर दुर्ग के कामों का भी था।

इंटेक चेप्टर संयोजक हारिस जमां के मुताबिक बजट वापसी से किले में सीपेज की मरम्मत का काम प्रभावित होगा। जन प्रतिनिधि कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे। कालिंजर दुर्ग प्रेमियों का कहना है कि जन प्रतिनिधि चाहें तो केंद्र सरकार के माध्यम से सैल, इंडियन ऑयल, यूसीओ बैंक, गेल, एनटीपीसी, ओएनजीसी आदि से नेशनल कल्चर फंड लेकर कालिंजर दुर्ग का विकास करा सकते हैं। अन्य धरोहरों को इन संस्थाओं से धनराशि दी भी जा रही है। 

कलाकृतियों का संरक्षण और ट्रीटमेंट कार्य शुरू
बांदा। भारत सरकार में संस्कृति मंत्रालय के सचिव रवींद्र सिंह (आईएएस) ने कालिंजर दुर्ग का भ्रमण कर इसे सुरक्षित करने के लिए कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। दुर्ग भ्रमण में उनके साथ रहे कालिंजर विश्व धरोहर समिति संयोजक बीडी गुप्ता ने बताया कि सचिव ने किले की सुरक्षा और विकास के लिए पूरे प्रयास का आश्वासन दिया है।

उन्होंने यह भी बताया कि किले की सभी कलाकृतियां का संरक्षण तथा कैमिकल ट्रीटमेंट का काम शुरू का दिया गया है। दुर्ग के अमान सिंह महल में बड़ी संख्या में उच्च कोटि की मूर्तियों और शिला लेखों की दुर्दशा पर सचिव ने अफसोस जताया है। इनके लिए भव्य संग्रहालय की जरूरत बताई।

श्री गुप्त ने सचिव से अनुरोध किया कि नीलकंठ मंदिर परिसर की बढ़िया सफाई करके इसे आकर्षक बनाया जाए। कालिंजर के काफी नजदीक स्थित बागै नदी का पानी दुर्ग तक पहुंचाकर कोटि तीर्थ, राम कटोरा आदि तालाबों को भरा जाए। इससे पर्यटक और अधिक आकर्षित होंगे।

दुर्ग के सात ऐतिहासिक द्वारों से होकर नीलकंठ मंदिर तक गई अधूरी पड़ी सीढ़ियों को पुरातत्व विभाग अविलंब पूरा कराए। सचिव के साथ दुर्ग भ्रमण में अशोक त्रिपाठी जीतू, पप्पू जी, गोपाल गोयल, अरुण खरे, हारिस जमा खां आदि शामिल रहे।

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