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जमानत राशि जब्त कर ब्लैक लिस्ट की संस्तुति
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बांदा। आंधी में ध्वस्त हुई ग्रामीण क्षेत्र की आपूर्ति अब तक बहाल न हो पाने का ठीकरा बिजली विभाग ने नामित एजेंसी पर फोड़ा है। एक्सईएन (ग्रामीण) वीके मिश्रा ने मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता से जमानत राशि जब्त कर एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने की संस्तुति की है। कहा कि एजेंसी के कर्मी अप्रशिक्षित हैं। मरम्मत आदि कार्य के लिए उनके पास कोई सामान भी नहीं था।
चार दिन पूर्व आई आंधी ने अतर्रा, नरैनी, बिसंडा, ओरन समेत दर्जनभर गांवों की बिजली आपूर्ति ध्वस्त कर दी थी। नगरीय इलाकों की बमुश्किल आपूर्ति बहाल हो गई, लेकिन कई गांवों की आपूर्ति अभी भी शुरू नहीं हो सकी। आपूर्ति बहाली में हो रही लेटलतीफी को लेकर अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) ने इसके लिए नामित एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही एजेंसी की जमानत धनराशि जब्त करते हुए ब्लैक लिस्ट करने की संस्तुति की है। एक्सईएन ने मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता (विद्युत वितरण मंडल) को भेजे पत्र में कहा कि आंधी में चौपट बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एजेंसी ने कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाई।
आपातकालीन स्थिति में एजेंसी ठेकेदार ने तीन दिन बाद 21 मई को सिर्फ 3-4 कर्मियों को मरम्मत कार्य के लिए भेज दिया, जबकि उन्हें काम करने का तरीका भी नहीं पता था। न ही उनके पास टीएनपी (रस्सा, कुप्पी, सीढ़ी, चैन टिकिल आदि) सामान था। एजेंसी की घोर लापरवाही से अभी तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है। दूसरे लोगों से काम कराना पड़ रहा है। उन्होंने अतर्रा उपखंड में कार्य के लिए किसी अन्य उपयुक्त एजेंसी को नियुक्त करने का अनुरोध किया है। मुख्य अभियंता ने जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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चार दिन पूर्व आई आंधी ने अतर्रा, नरैनी, बिसंडा, ओरन समेत दर्जनभर गांवों की बिजली आपूर्ति ध्वस्त कर दी थी। नगरीय इलाकों की बमुश्किल आपूर्ति बहाल हो गई, लेकिन कई गांवों की आपूर्ति अभी भी शुरू नहीं हो सकी। आपूर्ति बहाली में हो रही लेटलतीफी को लेकर अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) ने इसके लिए नामित एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही एजेंसी की जमानत धनराशि जब्त करते हुए ब्लैक लिस्ट करने की संस्तुति की है। एक्सईएन ने मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता (विद्युत वितरण मंडल) को भेजे पत्र में कहा कि आंधी में चौपट बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एजेंसी ने कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाई।
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आपातकालीन स्थिति में एजेंसी ठेकेदार ने तीन दिन बाद 21 मई को सिर्फ 3-4 कर्मियों को मरम्मत कार्य के लिए भेज दिया, जबकि उन्हें काम करने का तरीका भी नहीं पता था। न ही उनके पास टीएनपी (रस्सा, कुप्पी, सीढ़ी, चैन टिकिल आदि) सामान था। एजेंसी की घोर लापरवाही से अभी तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है। दूसरे लोगों से काम कराना पड़ रहा है। उन्होंने अतर्रा उपखंड में कार्य के लिए किसी अन्य उपयुक्त एजेंसी को नियुक्त करने का अनुरोध किया है। मुख्य अभियंता ने जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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