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किसान का उत्पीड़न हुआ तो बैंक की खैर नहीं
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 30 Mar 2015 11:25 PM IST
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डीएम सुरेश कुमार ने फिर दोहराया है कि बैंक शाखा
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प्रबंधक किसानों का उत्पीड़न हरगिज नहीं करेंगे। ऐसी शिकायत मिली तो उनके
खिलाफ ठंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के प्रति खुद को चिंतित और दुखी बताते हुए डीएम ने कहा कि किसानों की मदद के लिए उन्होंने प्रदेश सरकार से डेढ़ सौ करोड़ रुपये की मांग की है। अभी सिर्फ 39 करोड़ रुपये मिले हैं।
सोमवार को विकास भवन सभागार मेें आयोजित जायद गोष्ठी मेें यह बात कही। उन्होंने सभी विभागों के अफसरों और कर्मचारियों से कहा कि किसानों की भरपाई के लिए ईमानदारी से काम करें। उन्हें जायद फसल बोने को प्रेरित करें। बुंदेलखंड के किसानों को धैर्यवान बताते हुए कहा कि उन्होंने खुद खेतों पर जाकर बर्बादी देखी है।
डीएम ने साफ कहा कि किसानों के प्रति बैंक प्रबंधकों की कार्य प्रणाली ठीक नहीं है। उत्पीड़न की शिकायतें मिल रही हैं। कोई भी बैंक वसूली संबंधी नोटिस हरगिज नहीं भेजेगा। किसान स्वेच्छा से जमा करें तो जमा करा लें। अधिकारी सोंच में बदलाव लाकर किसानों के हित में काम करें।
गोष्ठी में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को कृषि से संबंधित जानकारियां दीं। उप कृषि निदेशक उमेशचंद्र कटियार ने अनुदान के लिए अनुदान के लिए किसानों का उनके कार्यालय में नामांकन जरूरी बताया। इसके लिए खतौनी, आईडी, बैंक पासबुक और तीन फोटो जमा करने को कहा।
एलडीएम एसके झा ने किसानों को राहत संबंधी जानकारियां दीं। उद्यान अधिकारी परवेज ने उद्यान संबंधी, रामविशाल पाल जायद की फसलों संबंधी, श्याम परिहार ने मृदा परीक्षण के बारे में बताया। कृषि विश्वविद्यालय के डॉ.वीके गुप्ता ने भी संबोधित किया। एसपी राकेश शंकर सीडीओ राममणि त्रिपाठी आदि भी शरीक रहे।
सदर तहसीलदार संत कुमार ने सोमवार को सभागार में राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की बैठक में निर्देश दिए कि गांवों में मुनादी कराकर किसानों के बचत खाता की पासबुक की फोटोकापी प्राप्त करें। रोजाना उनके खातों में मुआवजा राशि भेजें। तहसीलदार ने कहा कि 5 दिनों के अंदर सभी पीड़ित किसानों के खातों में राहत राशि पहुंच जाना चाहिए।
किसानों के प्रति खुद को चिंतित और दुखी बताते हुए डीएम ने कहा कि किसानों की मदद के लिए उन्होंने प्रदेश सरकार से डेढ़ सौ करोड़ रुपये की मांग की है। अभी सिर्फ 39 करोड़ रुपये मिले हैं।
सोमवार को विकास भवन सभागार मेें आयोजित जायद गोष्ठी मेें यह बात कही। उन्होंने सभी विभागों के अफसरों और कर्मचारियों से कहा कि किसानों की भरपाई के लिए ईमानदारी से काम करें। उन्हें जायद फसल बोने को प्रेरित करें। बुंदेलखंड के किसानों को धैर्यवान बताते हुए कहा कि उन्होंने खुद खेतों पर जाकर बर्बादी देखी है।
डीएम ने साफ कहा कि किसानों के प्रति बैंक प्रबंधकों की कार्य प्रणाली ठीक नहीं है। उत्पीड़न की शिकायतें मिल रही हैं। कोई भी बैंक वसूली संबंधी नोटिस हरगिज नहीं भेजेगा। किसान स्वेच्छा से जमा करें तो जमा करा लें। अधिकारी सोंच में बदलाव लाकर किसानों के हित में काम करें।
गोष्ठी में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को कृषि से संबंधित जानकारियां दीं। उप कृषि निदेशक उमेशचंद्र कटियार ने अनुदान के लिए अनुदान के लिए किसानों का उनके कार्यालय में नामांकन जरूरी बताया। इसके लिए खतौनी, आईडी, बैंक पासबुक और तीन फोटो जमा करने को कहा।
एलडीएम एसके झा ने किसानों को राहत संबंधी जानकारियां दीं। उद्यान अधिकारी परवेज ने उद्यान संबंधी, रामविशाल पाल जायद की फसलों संबंधी, श्याम परिहार ने मृदा परीक्षण के बारे में बताया। कृषि विश्वविद्यालय के डॉ.वीके गुप्ता ने भी संबोधित किया। एसपी राकेश शंकर सीडीओ राममणि त्रिपाठी आदि भी शरीक रहे।
सदर तहसीलदार संत कुमार ने सोमवार को सभागार में राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की बैठक में निर्देश दिए कि गांवों में मुनादी कराकर किसानों के बचत खाता की पासबुक की फोटोकापी प्राप्त करें। रोजाना उनके खातों में मुआवजा राशि भेजें। तहसीलदार ने कहा कि 5 दिनों के अंदर सभी पीड़ित किसानों के खातों में राहत राशि पहुंच जाना चाहिए।