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Banda News: 400 मीटर की दूरी और 70 सीढ़ियां कैसे चढ़ गई प्रसूता
Fri, 05 Jan 2024 11:04 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 05 Jan 2024 11:04 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। मेडिकल कॉलेज में प्रसूता की मौत को शुरुआत में हादसा बताने वाली पुलिस ने अब एक बार फिर हत्या की ओर यू-टर्न लिया है। मामले में प्राचार्य समेत नौ लोगों के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस ने नए सिरे से तफ्तीश भी शुरू की है। मेडिकल सूत्रों की मानें तो जिस महिला का चार दिन पहले ही ऑपरेशन हुआ हो, वह इमरजेंसी वार्ड से करीब 400 मीटर की दूरी तय करने के बाद 70 सीढ़ियां चढ़कर छत तक कैसे पहुंच सकती है? पुलिस की पहले की तफ्तीश में ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं।
बता दें कि सात नवंबर को अतर्रा निवासी प्रसूता को बच्चा होने के बाद बीपी की शिकायत पर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। यहां से अगले ही दिन उसकी छुट्टी होनी थी, लेकिन आठ नवंबर की सुबह से ही वह अस्पताल से लापता हो गई थी। इसके बाद नौ नवंबर को उसका शव वार्ड से सटे चार मंजिला शल्य चिकित्सा भवन के पीछे झाड़ियों के पास मिला था। उसका एक हाथ गायब था और नजदीक ही उसके कुछ कपड़े पड़े थे। प्रसूता का शव नालियों के बीच फंसा मिला था। इससे पुलिस ने छत से कूदने या गिरने की आशंका जताई थी, जबकि परिजन लगातार हत्या की आशंका जता रहे थे।
उनका आरोप था कि मानव अंग तस्करी की नीयत से महिला की हत्या की गई है। मेडिकल कॉलेज कर्मचारियों का कहना है कि शल्य चिकित्सा भवन की चौथी मंजिल तक जाते-जाते वे लोग हांफ जाते हैं, इसलिए समझ से परे हैं कि प्रसूता इस हालत में कैसे छत तक गई होगी।
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महिला की हत्या पर उठ रहे सवाल
1- कैसे लगीं चोटें, खरोंच, पोस्टमार्टम में टूटी मिलीं हड्डियां
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रसूता के शरीर की कई हड्डियां टूटी मिली थीं, इसके अलावा शरीर पर कई चोटें और खरोंचे भी थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दुष्कर्म की आशंका से स्लाइड भी बनवाई थी। महिला के बाल और नाखून को फोरेंसिक टीम ने जांच के लिए भेजा हुआ है। पुलिस को उनकी रिपोर्ट का भी इंतजार है।
2- छत से कूदती तो नीचे गिरती, नाली में कैसे फंसा शव
शल्य चिकित्सा भवन की चार मंजिला भवन पर स्थित हर मंजिल की भवन की बालकनी छज्जे से करीब तीन फुट पर एक पाइप लगा हुआ है, इससे स्पष्ट है कि बालकनी से कूदने या फेंके जाने वाला व्यक्ति ठीक नीचे करीब दीवार से एक फुट की दूरी पर बनी नाली के बजाय उसके आगे फर्श पर गिरेगा। जबकि प्रसूता का शव नाली के बीच फंसा मिला था। यह बिंदु भी महिला की हत्या की ओर संकेत कर रहा है। यह बात और है कि महिला इमारत के पीछे तक कैसे पहुंची, उसे कौन लेकर वहां तक गया, उसके साथ वहां क्या हुआ है। यह सब अभी तक सवाल ही बने हुए हैं।
3-मगर नहीं की गई एफआईआर
मामले में प्रशासन की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट देने को कहा गया था। इस कमेटी में एसीएमओ, अपर पुलिस अधीक्षक व एडीएम शामिल थे। इस जांच टीम की रिपोर्ट पर 23 नवंबर को मेडिकल कॉलेज से जुड़े 11 लोगों पर कार्रवाई की गई थी। जिसके अंतर्गत पांच आउटसोर्स कर्मियों की न सिर्फ सेवा समाप्त की गई थी बल्कि तीन स्टाफ नर्स को भी हटाकर तीन डॉक्टरों को भी चेतावनी जारी की गई थी। हैरत की बात यह है कि तब तक पुलिस खामोश बैठकर मामले को हादसा ही मानती रही। कार्रवाई के करीब 15 दिन बाद जागी पुलिस ने अचानक परिजनों की तहरीर के आधार कॉलेज के प्रधानाचार्य, पैरा मेडिकल स्टाफ समेत नौ लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।
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बांदा। मेडिकल कॉलेज में प्रसूता की मौत को शुरुआत में हादसा बताने वाली पुलिस ने अब एक बार फिर हत्या की ओर यू-टर्न लिया है। मामले में प्राचार्य समेत नौ लोगों के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस ने नए सिरे से तफ्तीश भी शुरू की है। मेडिकल सूत्रों की मानें तो जिस महिला का चार दिन पहले ही ऑपरेशन हुआ हो, वह इमरजेंसी वार्ड से करीब 400 मीटर की दूरी तय करने के बाद 70 सीढ़ियां चढ़कर छत तक कैसे पहुंच सकती है? पुलिस की पहले की तफ्तीश में ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं।
बता दें कि सात नवंबर को अतर्रा निवासी प्रसूता को बच्चा होने के बाद बीपी की शिकायत पर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। यहां से अगले ही दिन उसकी छुट्टी होनी थी, लेकिन आठ नवंबर की सुबह से ही वह अस्पताल से लापता हो गई थी। इसके बाद नौ नवंबर को उसका शव वार्ड से सटे चार मंजिला शल्य चिकित्सा भवन के पीछे झाड़ियों के पास मिला था। उसका एक हाथ गायब था और नजदीक ही उसके कुछ कपड़े पड़े थे। प्रसूता का शव नालियों के बीच फंसा मिला था। इससे पुलिस ने छत से कूदने या गिरने की आशंका जताई थी, जबकि परिजन लगातार हत्या की आशंका जता रहे थे।
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उनका आरोप था कि मानव अंग तस्करी की नीयत से महिला की हत्या की गई है। मेडिकल कॉलेज कर्मचारियों का कहना है कि शल्य चिकित्सा भवन की चौथी मंजिल तक जाते-जाते वे लोग हांफ जाते हैं, इसलिए समझ से परे हैं कि प्रसूता इस हालत में कैसे छत तक गई होगी।
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महिला की हत्या पर उठ रहे सवाल
1- कैसे लगीं चोटें, खरोंच, पोस्टमार्टम में टूटी मिलीं हड्डियां
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रसूता के शरीर की कई हड्डियां टूटी मिली थीं, इसके अलावा शरीर पर कई चोटें और खरोंचे भी थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दुष्कर्म की आशंका से स्लाइड भी बनवाई थी। महिला के बाल और नाखून को फोरेंसिक टीम ने जांच के लिए भेजा हुआ है। पुलिस को उनकी रिपोर्ट का भी इंतजार है।
2- छत से कूदती तो नीचे गिरती, नाली में कैसे फंसा शव
शल्य चिकित्सा भवन की चार मंजिला भवन पर स्थित हर मंजिल की भवन की बालकनी छज्जे से करीब तीन फुट पर एक पाइप लगा हुआ है, इससे स्पष्ट है कि बालकनी से कूदने या फेंके जाने वाला व्यक्ति ठीक नीचे करीब दीवार से एक फुट की दूरी पर बनी नाली के बजाय उसके आगे फर्श पर गिरेगा। जबकि प्रसूता का शव नाली के बीच फंसा मिला था। यह बिंदु भी महिला की हत्या की ओर संकेत कर रहा है। यह बात और है कि महिला इमारत के पीछे तक कैसे पहुंची, उसे कौन लेकर वहां तक गया, उसके साथ वहां क्या हुआ है। यह सब अभी तक सवाल ही बने हुए हैं।
3-मगर नहीं की गई एफआईआर
मामले में प्रशासन की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट देने को कहा गया था। इस कमेटी में एसीएमओ, अपर पुलिस अधीक्षक व एडीएम शामिल थे। इस जांच टीम की रिपोर्ट पर 23 नवंबर को मेडिकल कॉलेज से जुड़े 11 लोगों पर कार्रवाई की गई थी। जिसके अंतर्गत पांच आउटसोर्स कर्मियों की न सिर्फ सेवा समाप्त की गई थी बल्कि तीन स्टाफ नर्स को भी हटाकर तीन डॉक्टरों को भी चेतावनी जारी की गई थी। हैरत की बात यह है कि तब तक पुलिस खामोश बैठकर मामले को हादसा ही मानती रही। कार्रवाई के करीब 15 दिन बाद जागी पुलिस ने अचानक परिजनों की तहरीर के आधार कॉलेज के प्रधानाचार्य, पैरा मेडिकल स्टाफ समेत नौ लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।