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चित्रकूटधाम मंडल में बिजली का भीषण संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 30 May 2015 11:07 PM IST
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भीषण गर्मी से जूझ रहे चित्रकूटधाम मंडल के बाशिंदों पर दोहरी मुसीबत आ पड़ी है। पूरे मंडल में पिछले 24 घंटों से बिजली का जबरदस्त संकट पैदा हो गया है। गुरुवार को आंधी के दौरान बिजली के तीन टावर गिर जाने से पारीछा बिजलीघर से चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों को मिल रही 100 मेगावाट बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।
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भरुआ से कुछ बिजली लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई तो शनिवार को 132 केवी की हाईटेंशन लाइन टूटकर यमुना नदी में गिर गई। नतीजतन भरुआ से भी बिजली बाधित हो गई। अब पावर कारपोरेशन के अधिकारियों ने फतेहपुर से 200 मेगावाट बिजली लेकर काम चलाऊ व्यवस्था की है।
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बारी-बारी से चारों जिलों को आपूर्ति करने से यहां बिजली का भीषण संकट है। पिछले 24 घंटे से बुंदेलखंड में तपिश और लू के साथ वातावरण बेहद गर्म हो गया है। पारा 48 डिग्री के इर्द-गिर्द पहुंच गया है। शुक्रवार की रात भी बेहद गर्म रही। इसी बीच बिजली ने ‘कोढ़ में खाज’ के हालात पैदा कर दिए।
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पारीछा (झांसी) बिजलीघर से चित्रकूटधाम मंडल के लिए बांदा को भेजी जा रही 100 मेगावाट बिजली पर ब्रेक लग गया। पारीछा से बांदा के लिए आई 132 केवी लाइन के तीन टावर झांसी के पास गिर गए। यहां 220 केवीए सब स्टेशन के अधिशासी अभियंता (ट्रांसमिशन) उमेश कुमार वर्मा ने बताया कि पारीछा लाइन बंद होने पर भरुआ सुमेरपुर से 80 मेगावाट बिजली ली जा रही थी।
लेकिन भरुआ से बांदा को बिजली आपूर्ति करने वाली 132 केवी की हाईटेंशन लाइन जहानाबाद और भरुआ के बीच टूटकर यमुना नदी में गिर गई। नतीजे में भरुआ से भी आपूर्ति बंद हो गई। अधिशासी अभियंता ने बताया कि अब बुंदेलखंड को फतेहपुर से ही मात्र 200 मेगावाट बिजली मिल पा रही है, जो चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलाें बांदा, हमीरपुर, महोबा व चित्रकूट के लिए नाकाफी है।
पारीछा की बिजली बंद होनेे से आपूर्ति में काफी व्यवधान पैदा हुआ है। मात्र फतेहपुर से पूरे बुंदेलखंड को पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं हो सकती। उधर, बिजली बाधित होने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। मंडल मुख्यालय बांदा में पिछले एक हफ्ते से शहर के अधिकांश इलाकों में पानी के लिए मारामारी मची है। मंडल के अन्य शहरों में भी कमोबेश यही स्थिति है।
नौतपा के आखिरी दिन शनिवार को चित्रकूटधाम मंडल बुरी तरह तपता रहा। बांदा में अधिकतम पारा 48 डिग्री पार कर गया। शुक्रवार की रात भी पिछले कुछ दिनों में सबसे ज्यादा गर्म और बेचैन करने वाली रही। शनिवार को धूप और तपन ने सड़कों पर चंद मिनट चलना भी दूभर कर दिया। छाता-छतरी, सिर से पैर तक जिस्म को ढकने के बावजूद शरीर बुरी तरह तपता रहा। लगातार पसीना बहने से कई राहगीरों को चक्कर आ गए।
शनिवार को दोपहर अपने विभागीय काम से सिविल लाइन स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय आई आंगनबाड़ी कार्यकत्री गायत्री गुप्ता गर्मी से चक्कर खाकर गिर पड़ीं और बेहोश हो गईं। वहां मौजूद अन्य आंगनबाड़ियों और विभागीय महिला कर्मचारियों ने उनको संभाला। चेहरे पर पानी के छींटे मारे। ग्लूकोज आदि दिया।
कांशीराम कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ.एसएस खान ने बताया कि इस वर्ष गर्मी का कहर 20 जून तक झेलना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि केरल में इस वर्ष पहली जून को मानसून पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन बुंदेलखंड तक आने में इसे 10 दिन का ज्यादा समय लग सकता है। अमूमन यहां 15 जून को मानसून आता है। लेकिन इस साल यह 20 से 25 जून के बीच यहां आने की संभावना है।