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हैंडपंप खराब, पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण
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बांदा। ग्राम पंचायतों में खराब हैंडपंपों ने ग्रामीणों के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्राम पंचायतें 24 घंटे में एक टैंकर पानी की आपूर्ति कर रही हैं।
जनपद की 469 ग्राम पंचायतों में 37,376 हैंडपंप हैं। इनमें से 1338 हैंडपंप स्थायी व 3157 अस्थायी रूप से खराब हैं। उधर, जलस्तर नीचे खिसकने से सैकड़ों हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। ऐसे में गांवों में पीने के पानी का संकट हो गया है।
जिलाधिकारी ने 15 मई के पूर्व ग्राम पंचायतों को हैंडपंपों को ठीक कराने के आदेश दिए थे लेकिन हैंडपंपों की मरम्मत का काम धीमा चल रहा है। बबेरू में 72, बड़ोखर में 61, महुआ में 249, तिंदवारी में 218, बिसंडा में 139, कमासिन में 221, नरैनी में 326 और जसपुरा में 52 हैंडपंप रिबोर होने को हैं। इसके अलावा आठ विकास खंडों में तीन हजार से अधिक हैंडपंप अस्थायी रूप से खराब हैं।
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सीडीओ वेद प्रकाश मौर्य का कहना है कि हैंडपंपों रिबोर हो रहे हैं। जिन गांवों में पानी की ज्यादा किल्लत है वहां टैंकरों से आपूर्ति की जा रही है। जिले की ग्राम पंचायतों के पास 394 टैंकर उपलब्ध हैं।
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जनपद की 469 ग्राम पंचायतों में 37,376 हैंडपंप हैं। इनमें से 1338 हैंडपंप स्थायी व 3157 अस्थायी रूप से खराब हैं। उधर, जलस्तर नीचे खिसकने से सैकड़ों हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। ऐसे में गांवों में पीने के पानी का संकट हो गया है।
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जिलाधिकारी ने 15 मई के पूर्व ग्राम पंचायतों को हैंडपंपों को ठीक कराने के आदेश दिए थे लेकिन हैंडपंपों की मरम्मत का काम धीमा चल रहा है। बबेरू में 72, बड़ोखर में 61, महुआ में 249, तिंदवारी में 218, बिसंडा में 139, कमासिन में 221, नरैनी में 326 और जसपुरा में 52 हैंडपंप रिबोर होने को हैं। इसके अलावा आठ विकास खंडों में तीन हजार से अधिक हैंडपंप अस्थायी रूप से खराब हैं।
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सीडीओ वेद प्रकाश मौर्य का कहना है कि हैंडपंपों रिबोर हो रहे हैं। जिन गांवों में पानी की ज्यादा किल्लत है वहां टैंकरों से आपूर्ति की जा रही है। जिले की ग्राम पंचायतों के पास 394 टैंकर उपलब्ध हैं।