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गुरु गोबिंद सिंह ने लड़ी जुल्म के खिलाफ जंग

Wed, 20 Jan 2021 11:35 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 11:35 PM IST
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Guru Gobind Singh fought against oppression
बांदा के सिंधी गुरुद्वारे में गुरु गोबिंद जयंती पर सत्संग संबोधित करते मुख्य ग्रंथी अमरलाल। - फोटो : BANDA
बांदा। गुरु गोबिंद सिंह ने कहा था कि उनका बैर न हिंदू से है न मुसलमान से। उनकी लड़ाई तो जुल्म के खिलाफ है। उन्होंने इसी की जंग लड़ी और खालसा पंथ की स्थापना की। यह बात गुरु गोबिंद सिंह की 354वीं जयंती महोत्सव पर बुधवार को यहां पीली कोठी स्थित गुरुद्वारे में मुख्य ग्रंथी अमरलाल ने कही।
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जयंती पर सिख और सिंधी महिला-पुरुषों ने गुरुद्वारे में माथा टेंका और आरती की। सत्संग में मुख्य ग्रंथी ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के पिता गुरु तेग बहादुर सिंह और मां गूजरी कौर थीं। उनका जन्म पूष मास की सप्तमी को पटना (बिहार) में ईस्वी 1666 में हुआ था।
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ग्रंथी ने बताया कि गुरु के जन्म के समय एक बड़ी नेक कमाई वाला मुस्लिम पीर भीखम शाह ने पूरब की ओर सजदा किया तो उसके मुरीदों ने पूछा तो आज पूरब की ओर सजदा क्यों कर रहे हो? भीखम शाह ने जवाब दिया कि खुदा के नूर ने इस जहां में जन्म लिया है। उसको सजदा कर रहा हूं। भीखम शाह दो कूजे लेकर पटना पहुंचे।
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गुरु गोबिंद सिंह ने बाल अवस्था में दोनों कूजों पर हाथ रखकर कहा कि हमारा बैर न हिंदू से है न मुसलमान से। हमारी लड़ाई तो जुल्म के खिलाफ होगी। गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना कर सबको वीर बहादुर पहलवान बनाया। उनके दो मासूम बच्चे सरहद की दीवार में चुन दिए गए। दो अन्य बच्चे जंग में शहीद हो गए।
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