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Banda News: बॉयो गैस व वर्मी कंपोस्ट खाद से बढ़ेगी गोशाला की आय
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बांदा। बॉयो गैस और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर गोशलाओं की आय बढ़ाने की तैयारी है। ये काम गोवर्धन योजना के तहत किया जाएगा। पहले चरण में तीन गोशालाओं को इसमें शामिल किया गया है। तीनों गोशालाओं में करीब 2000 मवेशी संरक्षित हैं।
जिले में स्थाई और अस्थाई गोशालाओं की संख्या लगभग तीन सैकड़ा है। इनमें करीब 90 हजार मवेशी संरक्षित हैं। इनके चारे-भूसे के इंतजाम में अक्सर बजट की कमी आड़े आती है। इस कमी को दूर करने के लिए ही बॉयो गैस और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। तीनों गोशालाओं में पंचायती राज विभाग ने काम भी शुरू कर दिया है।
रगौली भटपुरा गांव की वृहद गोशाला में बॉयो गैस प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इसमें लगभग 800 मवेशी संरक्षित हैं। गैस से जेनरेटर चलाकर बिजली की आपूर्ति होगी। घरेलू सिलिंडरों की रीफिलिंग भी हो सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक गोबर से उत्पन्न गैस सस्ती पड़ेगी। सीएनजी गैस में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा। खप्टिहा कलां और तिंदवारी गांव स्थित कान्हा गोशाला में वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी।
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400 रुपये में पडे़गा सिलिंडर
बॉयो गैस : गोशाला में बनाए गए गड्ढे में गोबर इकट्ठा करके गैस उत्पन्न की जाएगी। फिर फिलिंग मशीन के जरिए सिलिंडर में भरी जाएगी। इसकी कीमत सिर्फ 400 रुपये प्रति सिलिंडर होगी। सीएनजी गैस की अलग मशीन लगेगी। गोशाला में उत्पन्न सीएनजी गैस की कीमत 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। 100 रुपये की 20 किलो कंपोस्ट खाद
वर्मी कंपोस्ट खाद : गोशाला में ईंट/पॉलिथिन के गड्ढे बनाने के बाद गोबर इकट्ठा किया जाएगा। इसमें केंचुए पाले जाएंगे। गोबर के खाद बनने के बाद उसे बोरियों में भरकर बिक्री की जाएगी। 20 किलोग्राम की बोरी 100 रुपये की पड़ेगी। बाजार में 20 रुपये प्रति किलो खाद बिकती है। दोनों गोशालाओं से प्रतिदिन एक क्विंटल से ज्यादा खाद पैदा होगी।
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वर्जन
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पहले चरण में बॉयो गैस प्लांट के लिए एक और वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए दो गोशालाओं का चयन किया गया है। तीनों गोशालाओं में निर्माण शुरू है। जल्द इनसे गैस और खाद की बिक्री शुरू हो जाएगी। शासन का उद्देश्य गोशालाओं की आय बढ़ाने का है। इसके बाद अन्य गोशालाओं में काम शुरू होगा।
- डॉ. मनोज अवस्थी
उप निदेशक (पशु पालन)
चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।
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जिले में स्थाई और अस्थाई गोशालाओं की संख्या लगभग तीन सैकड़ा है। इनमें करीब 90 हजार मवेशी संरक्षित हैं। इनके चारे-भूसे के इंतजाम में अक्सर बजट की कमी आड़े आती है। इस कमी को दूर करने के लिए ही बॉयो गैस और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। तीनों गोशालाओं में पंचायती राज विभाग ने काम भी शुरू कर दिया है।
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रगौली भटपुरा गांव की वृहद गोशाला में बॉयो गैस प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इसमें लगभग 800 मवेशी संरक्षित हैं। गैस से जेनरेटर चलाकर बिजली की आपूर्ति होगी। घरेलू सिलिंडरों की रीफिलिंग भी हो सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक गोबर से उत्पन्न गैस सस्ती पड़ेगी। सीएनजी गैस में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा। खप्टिहा कलां और तिंदवारी गांव स्थित कान्हा गोशाला में वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी।
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400 रुपये में पडे़गा सिलिंडर
बॉयो गैस : गोशाला में बनाए गए गड्ढे में गोबर इकट्ठा करके गैस उत्पन्न की जाएगी। फिर फिलिंग मशीन के जरिए सिलिंडर में भरी जाएगी। इसकी कीमत सिर्फ 400 रुपये प्रति सिलिंडर होगी। सीएनजी गैस की अलग मशीन लगेगी। गोशाला में उत्पन्न सीएनजी गैस की कीमत 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। 100 रुपये की 20 किलो कंपोस्ट खाद
वर्मी कंपोस्ट खाद : गोशाला में ईंट/पॉलिथिन के गड्ढे बनाने के बाद गोबर इकट्ठा किया जाएगा। इसमें केंचुए पाले जाएंगे। गोबर के खाद बनने के बाद उसे बोरियों में भरकर बिक्री की जाएगी। 20 किलोग्राम की बोरी 100 रुपये की पड़ेगी। बाजार में 20 रुपये प्रति किलो खाद बिकती है। दोनों गोशालाओं से प्रतिदिन एक क्विंटल से ज्यादा खाद पैदा होगी।
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वर्जन
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पहले चरण में बॉयो गैस प्लांट के लिए एक और वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए दो गोशालाओं का चयन किया गया है। तीनों गोशालाओं में निर्माण शुरू है। जल्द इनसे गैस और खाद की बिक्री शुरू हो जाएगी। शासन का उद्देश्य गोशालाओं की आय बढ़ाने का है। इसके बाद अन्य गोशालाओं में काम शुरू होगा।
- डॉ. मनोज अवस्थी
उप निदेशक (पशु पालन)
चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।
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