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इंदिरा नगर के पार्कों में हस्तांतरण का ‘खेल’

Mon, 24 Feb 2020 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2020 11:48 PM IST
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Game' of transfer in Indira Nagar parks
इंदिरा नगर का उपेक्षित पार्क। - फोटो : BANDA
बांदा। शहर के पॉश इलाके आवास विकास और इंदिरा नगर के पार्क दो विभागों के बीच पिस रहे हैं। आवास विकास परिषद का कहना है कि इन पार्कों को नगर पालिका परिषद के हवाले (हस्तांतरित) कर दिया गया है। दूसरी तरफ नगर पालिका का कहना है कि उसके पास हस्तांतरण के कोई अभिलेख नहीं हैं। फिर भी नगर पालिका ने इन पार्कों पर 22 लाख 60 हजार 913 रुपये सुंदरीकरण के नाम पर खर्च बताए हैं।
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पार्कों को लेकर चल रहे इस खेल का पर्दाफाश आरटीआई से हुआ। आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित ने बांदा नगर पालिका परिषद से सूचना मांगी थी कि आवास विकास परिषद की इंदिरा नगर ए व बी ब्लाक योजना नगर पालिका को कब हस्तांतरित हुई? यहां पार्क आदि के लिए क्या कार्य पालिका ने कराए और उन पर क्या खर्च आया? इस पर नगर पालिका अधिशासी अधिकारी ने दी सूचना में कहा है कि हस्तांतरण के अभिलेख पालिका में उपलब्ध नहीं हैं।
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साथ ही यह भी कहा है कि आवास विकास और इंदिरा नगर के चार पार्कों का सुुंदरीकरण नगर पालिका ने किया है। इसमें 22 लाख 60 हजार 913 रुपये खर्च किए गए हैं। अधिशासी अधिकारी ने यह भी बताया है कि आवास विकास व इंदिरा नगर में पार्क या ओपेन स्पेस के हस्तांतरण के अभिलेख भी पालिका में उपलब्ध नहीं हैं।
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उधर, आशीष सागर द्वारा पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद से आरटीआई में मांगी गई सूचना में परिषद के अधिसासी अभियंता आरपी गुप्ता ने लिखित सूचना में बताया था कि आवास विकास की भूमि एवं गृह स्थान योजना बांदा नगर पालिका को हस्तांतरित की जा चुकी है।
दो विभागों की इस अफरा-तफरी और अनदेखी के चलते यहां के पार्कों में अवैध कब्जे हो गए हैं। पार्क जैसा कुछ भी नहीं हैं। टूटे-फूटे कूड़ेदान और झूले व घासफूस है। 22.60 लाख खर्च के बाद भी बदहाली जस की तस बरकरार है।

80 पैसे वर्ग फीट लगता है टैक्स
बांदा। आरटीआई में नगर पालिका परिषद ईओ ने यह भी बताया है कि आवास विकास और इंदिरा नगर में आवासीय भवनों से 80 पैसे प्रति वर्ग फिट की दर से वार्षिक मूल्यांकन (असिसमेंट) का निर्धारण जिलाधिकारी द्वारा सर्किल रेट के आधार पर पूंजीगत मूल्यांकन के प्रतिशत से निर्धारित किया जाता है। वार्षिक मूल्य के 10 प्रतिशत की दर से गृह कर लिया जाता है। मूल्यांकन का निर्धारण और भवन कर की वसूली भवन के उपयोग के आधार पर की जाती है।
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