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फूला के समर्थन में कल से दलों के खिलाफ मोर्चा, अनशन पर बैठी कैंसर पीड़ित की हालत बिगड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 11 Mar 2015 11:27 PM IST
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पैतृक गांव बड़ोखर खुर्द में तीन दिनों से आमरण अनशन पर बैठी कैंसर पीड़ित समाजसेवी महिला फूला देवी यादव को तमाम संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
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उधर, सपा सहित अन्य राजनीतिक दलों के नुमाइंदों की अनदेखी पर फूला के साथ एकजुट हुए ग्रामीणों ने शुक्रवार को सभी राजनैतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोलने और ‘गांव जोड़ो-पार्टी छोड़ो’ आंदोलन का एलान किया है। उधर, नरैनी क्षेत्र के चौकिन पुरवा में ग्रामीणों ने समर्थन में अनशन किया।
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कैंसर पीड़ित 48 वर्षीय फूला घर के दरवाजे खुले स्थान पर आमरण अनशन पर बैठी है। हालत बिगड़ने लगी है। गांव की तमाम महिलाएं समर्थन में अनशन स्थल पर डटी हुई हैं। फूला देवी अपने कैंसर इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष या किसी अन्य मद से मदद मांग रही है। उसका बेटा सपा का सक्रिय कार्यकर्ता है।
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सिर्फ एसडीएम सदर को छोड़कर तीन दिनों में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी अनशन स्थल नहीं पहुंचा। नेताओं में सिर्फ सपा जिलाध्यक्ष और सपा विधायक आए तो लेकिन रुख संतोषजनक नहीं रहा। अन्य किसी दल के लोग यहां नहीं पहुंचे।
बुधवार को फूला देवी और उसके समर्थकों ने कहा कि शुक्रवार को सभी राजनैतिक दलों के खिलाफ गांव के लोग मोर्चा खोलते हुए जरूरत समझी गई तो उनके झंडों को फूंककर विरोध जताएंगे। उधर, बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना ने फूला की मांग को जायज बताते हुए उसके अनशन को समर्थन की घोषणा की है।
बुधवार को सेना के केंद्रीय अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, सचिव मोहम्मद साजिद सहित शैलेश कुमार, श्याम प्रजापति, अजीत सिंह आदि ने अनशन स्थल पर यह घोषणा की। उधर, समाजसेवी पुष्पेंद्र भाई, विद्याधाम समिति के राजाभइया और चिंगारी संगठन अध्यक्ष रीना पांडेय व संयोजक माया श्रीवास्तव भी बुधवार को अनशन स्थल पहुंचीं और फूला के आंदोलन को अन्य गांवों में भी फैलाने की घोषणा दोहराई।
उन्होंने बताया कि नरैनी क्षेत्र के चौकिन पुरवा में बुधवार को आधा सैकड़ा से ज्यादा ग्रामीण फूला देवी के समर्थन में अनशन पर बैठे। पूर्व मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता जमुना प्रसाद बोस भी पहुंचे।
बड़ोखर में अब तक कैंसर से 11 गवां चुके हैं जान
बांदा। मंडल मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर दूर स्थित बड़ोखर खुर्द गांव में कैंसर अभिशाप बन गया है। इस छोटे से गांव में अब तक कैंसर से 11 मौतें हो चुकी हैं। इनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। इस समय फूला देवी समेत तीन अन्य महिलाएं इसी बीमारी से जूझ रही हैं।
बुधवार को फूला देवी के अनशन स्थल पर ग्रामीणों ने एक पोस्टर लगाकर उसमें कैंसर से मरने वाले ग्रामीणों की सूची दर्ज की है। इनमें चुनूबादी पत्नी छोटा यादव, सुखदेव सिंह पुत्र रम्मू सिंह, गरीबा पुत्र टिर्रा, मदन द्विवेदी पुत्र बद्री, सीताराम पुत्र लल्लू पाल, शिव विजय सिंह पुत्र लाला भाई, सरोज पत्नी पूरन सिंह, देवीदीन पुत्र छंगुआ कोरी, जगपत सिंह पुत्र बारेलाल और कामता कोरी व ललिता निषाद शामिल हैं।
इनके अलावा वर्तमान में कैंसर से जूझ रहीं तीन महिलाओं फूला देवी पत्नी कल्लू यादव, सईदन पत्नी आशिक और सुमन देवी पत्नी ज्ञान सिंह के नाम भी दर्शाए गए हैं। साथ ही एक अन्य पोस्टर में सवाल किया है कि- क्या स्वास्थ्य बजट में हम गांव वालों का कोई हक है? क्या पूरा स्वास्थ्य बजट सिर्फ सरकारी लोगों और नेताओं के लिए है?