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खाद्य सुरक्षा का साढ़े तीन करोड़ दाबे है कृषि विभाग

Fri, 02 Sep 2016 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Fri, 02 Sep 2016 11:01 PM IST
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Food security is the impression of the Department of Agriculture and a half million
पंजाब में खेती और उत्पादन पर मॉनसून का असर - फोटो : फाइल फोटो

बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में तीन सालों से दैवी आपदा से टूटे किसान आत्महत्या को मजबूर हैं तो दूसरी तरफ कृषि विभाग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के साढ़े तीन करोड़ रुपये दबाए बैठा है। किसान खाद, बीज, कृषि यंत्र, कीटनाशक आदि के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अब सुध आने पर संयुक्त कृषि निदेशक ने सभी जिला कृषि अधिकारियों को एक पखवारे के अंदर योजना का पैसा खर्च करने की चेतावनी दी है। शासन ने चित्रकूटधाम मंडल में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत चालू वित्तीय वर्ष में पहली किश्त में 4 करोड़ 78 लाख 70 हजार रुपये जारी किए थे। इस धनराशि को बीज, कृषि यंत्र, कृषि रक्षा रसायन, मृदा परीक्षण से लेकर फसलों के प्रदर्शन आदि में खर्च किया जाना है। हमीरपुर जिले को 1 करोड़ 32 लाख मिले। इसमें से कृषि विभाग ने 57 लाख 57 हजार रुपये खर्च किए। महोबा जिले को एक करोड़ 23 लाख 28 हजार मिले। इसमें से महज 24 लाख 98 हजार रुपये खर्च हुए। बांदा जिले को सबसे ज्यादा एक करोड़ 48 लाख 57 हजार रुपये मिले। यहां कृषि विभाग ने सिर्फ 33 लाख 64 हजार रुपये खर्च किया। दलहनी कलस्टर प्रदर्शन में 10 लाख 84 हजार और गेहूं के कलस्टर प्रदर्शन में 2 लाख 45 हजार रुपये खर्च किया। वाटर केरिंग पाइप के मद में 2 लाख 25 हजार खर्च किए। बाकी का पैसा बीज व मृदा परीक्षण में खर्च किया। रोटा वेटर व सीड्रिल आदि में प्रगति जीरो है। ऐसे ही चित्रकूट जिले के हिस्से में 74 लाख 84 हजार रुपये आए। इस धनराशि से कृषि विभाग ने केवल 27 लाख रुपये कलस्टर प्रदर्शन व बीज में खर्च किए।

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बीज के लिए ब्लाकों से बैरंग लौट रहे किसान
बांदा। शासन ने किसानों को राहत देने के लिए इस वित्तीय वर्ष में चित्रकूटधाम मंडल में जो बजट दिया वह अधिकारियों की लापरवाही से किसानों तक नहीं पहुंच सका। सैकड़ों किसान ब्लाकों से सरकारी बीज खरीदकर डीवीटी के लिए दौड़ रहे हैं। उन्हें अनुदान का पैसा वापस खातों में वापस नहीं भेजा गया। संयुक्त कृषि निदेशक गणेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि सभी उप कृषि निदेशक और जिला कृषि अधिकारियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का पैसा पखवारे भर के भीतर खर्च कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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