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बाढ़ पीड़ितों को सिर्फ एक बार मिली तहरी
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 25 Aug 2016 11:34 PM IST
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बचीखुची गृहस्थी सुखाते व समेटते छाबी तालाब मोहल्ले के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। केन नदी का पानी घटने के बाद शहर के बाढ़ग्रस्त इलाकों के पीड़ित परिवार अपनी बची-खुची गृहस्थी समेट रहे हैं। पांच दिन तक बाढ़ का कहर झेलने वाले इन शहरी बाशिंदों को प्रशासन से कई शिकवे हैं। इनका कहना है कि पांच दिन में सिर्फ एक दिन प्रशासन की ओर से राशन के नाम पर तहरी दी गई। अधिकारी सिर्फ नाव में बैठकर घूमकर मीडिया को अपनी फोटो देते रहे।
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पहाड़ तले स्थित मानिक कुइंया और छाबी तालाब आदि मोहल्लों में केन नदी का पानी पांच दिन तक भरा रहा। यहां पक्के मकानों की एक मंजिल डूबी रही। कच्चे मकान सारे के सारे धराशायी हो गए। इनमें रखी गृहस्थी भी नष्ट हो गई। पक्के मकान तो बच गए, मगर बाढ़ ने गृहस्थी चौपट कर दी।
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लगभग दो सौ मकान या तो गिर गए या फिर क्षतिग्रस्त हो गए। पानी सिमट जाने के बाद बाढ़ पीड़ित मकानों को लौट आए हैं। कच्चे मकानों के स्थान पर सिर्फ मिट्टी के ढेर, खपरैल और लठा-बांस नजर आ रहे हैं। पक्के मकान वाले लोग पानी में डूबा रहा गृहस्थी का सामान धूप में रखकर सुखा रहे हैं।
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हर तरफ गंदगी है। कीचड़ से सड़ांध आ रही है। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि मात्र बुधवार को नगर पालिका कर्मियों ने चूना, डीडीटी आदि का छिड़काव किया। ज्यादातर सफाई बाढ़ पीड़ित खुद कर रहे हैं। अब तक कोई अधिकारी या लेखपाल सर्वे या मदद देने यहां नहीं आया। उधर, नदी किनारे दूर तक बाढ़ का पानी कई दिनों तक भरा रहने से इस क्षेत्र में बोई गई फसल भी सड़ गई।