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बिना कनेक्शन बिल भेजने पर पांच हजार जुर्माना
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बांदा। विद्युत विभाग की ओर से भेजे गए बिलों को जिला उपभोक्ता आयोग ने निरस्त कर दिए। मानसिक क्षतिपूर्ति और अधिवक्ता की फीस के लिए पांच हजार रुपये जुर्माना किया।
रामनगर तिंदवारी के भोला गिरी पुत्र प्रभु गिरी ने अधिशासी अभियंता (विद्युत विभाग) के खिलाफ वाद दायर किया था। कहा था कि उसने बिजली के लिए आवेदन ही नहीं किया और विभाग बिल भेज रहा है। इसमें आयोग अध्यक्ष तूफानी प्रसाद व सदस्य अनिल कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के बाद सभी बिल निरस्त करते हुए जुर्माना का आदेश दिया।
उधर, जिला उपभोक्ता आयोग ने माहेश्वरी बिजनेस कंसल्टेंसी द्वारा सेवा में कमी करने पर 11 हजार रुपये का जुर्माना किया है। तिंदवारी के शिव दयाल प्रजापति पुत्र देवीदीन ने वर्ष 2000 में संजय सिंह उर्फ साहब सिंह पुत्र राम सिंह (प्रोपराइटर गौतम बंधु एंड संस व माहेश्वरी बिजनेस कंसल्टेंसी बिजली खेड़ा) के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी कि ट्यूब चोक भरने की मशीनरी और उसकी मुफ्त व्यवसायिक ट्रेनिंग देने और 2 वर्ष तक कच्चा माल तैयार करने के लिए रुपये दिए थे।
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सेवा में कमी करने पर धनराशि वापस देने के लिए वाद दायर किया। आयोग अध्यक्ष तूफानी प्रसाद व अनिल कुमार चतुर्वेदी ने एक माह के अंदर 23 हजार रुपये 10 प्रतिशत राशि ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया। 10 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और एक हजार रुपये अधिवक्ता फीस देने के भी आदेश दिए हैं।
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रामनगर तिंदवारी के भोला गिरी पुत्र प्रभु गिरी ने अधिशासी अभियंता (विद्युत विभाग) के खिलाफ वाद दायर किया था। कहा था कि उसने बिजली के लिए आवेदन ही नहीं किया और विभाग बिल भेज रहा है। इसमें आयोग अध्यक्ष तूफानी प्रसाद व सदस्य अनिल कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के बाद सभी बिल निरस्त करते हुए जुर्माना का आदेश दिया।
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उधर, जिला उपभोक्ता आयोग ने माहेश्वरी बिजनेस कंसल्टेंसी द्वारा सेवा में कमी करने पर 11 हजार रुपये का जुर्माना किया है। तिंदवारी के शिव दयाल प्रजापति पुत्र देवीदीन ने वर्ष 2000 में संजय सिंह उर्फ साहब सिंह पुत्र राम सिंह (प्रोपराइटर गौतम बंधु एंड संस व माहेश्वरी बिजनेस कंसल्टेंसी बिजली खेड़ा) के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी कि ट्यूब चोक भरने की मशीनरी और उसकी मुफ्त व्यवसायिक ट्रेनिंग देने और 2 वर्ष तक कच्चा माल तैयार करने के लिए रुपये दिए थे।
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सेवा में कमी करने पर धनराशि वापस देने के लिए वाद दायर किया। आयोग अध्यक्ष तूफानी प्रसाद व अनिल कुमार चतुर्वेदी ने एक माह के अंदर 23 हजार रुपये 10 प्रतिशत राशि ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया। 10 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और एक हजार रुपये अधिवक्ता फीस देने के भी आदेश दिए हैं।