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Banda News: बांदा के इतिहास में पहली महिला दोषी को फांसी की सजा

Sat, 21 Feb 2026 01:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sat, 21 Feb 2026 01:16 AM IST
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First woman convict in Banda's history sentenced to death
बांदा। बांदा के इतिहास में पहली बार किसी महिला दोषी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। अब तक अदालतों ने हत्या अपहरण, गैंग रेप जैसी अपराधों में करीब 23 लोगों को फांसी की सजा सुना चुकी है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने छह माह के अंतराल में तीन सजाओं में चार दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसमें एक महिला अभियुक्त भी शामिल है।
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विशेष न्यायाधीश पाक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत अब से छह माह के अंतराल में तीन फांसी की सजाए में चार दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। आठ सितंबर 2025 को चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी दोषी सुनील निषाद को तीन साल की मासूम से दुष्कर्म के बाद मरणासन्न अवस्था में फेंकने में सुनील को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसी तरह से चार जनवरी 2026 को कालिंजर के दोषी अमित कुमार रैकवार को छह साल की मासूम के साथ दुष्कर्म कर हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अब 20 फरवरी 2026 को नाबालिगों के साथ यौन शोषण करने के दोषी निलंबित जेई रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है।
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वकीलों की टिप्पणी
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विशेष लोक अभियाेजक कमल सिंह गौतम ने बताया कि विशेष न्यायाधीश पाक्सो प्रदीप मिश्रा ने दुष्कर्म और कुकर्म के मामले में छह महीने के अंतराल में यह तीसरी सजा है। इसके पूर्व चार जनवरी वर्ष 2023 में मरका थाना क्षेत्र में अपनी पारिवारिक नातिन के साथ दुष्कर्म और हत्या के दोषी रामबहादुर प्रजापति को 28 दिन में विचारण कर मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
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फौजदारी के अधिवक्ता अशोक दीक्षित का कहना है कि उनकी 40 साल से अधिक की वकालत है। एक से बढ़कर एक अपराध उनके सामने आए हैं लेकिन जेई रामभवन जैसा अपराध शायद ही पहली बार आया है। जिसमें नाबालिगों के यौन शोषण के अपराध में उसकी पत्नी भी सहभागीदार थी। पति द्वारा किए गए अपराध में पत्नी का मददगार साबित होना खासकर महिला समाज को कलंकित करने जैसा है। लिहाजा कोर्ट ने शायद इसी बिंदु को ध्यान में रखते हुए महिला अपराधी को फांसी की सजा सुनाई है। महिला अपराधी का अपराध किसी भी मायने में क्षमा के योग्य नहीं है। कहा कि दो दशक पहले तक अपराध तो होते थे इतने जघन्य अपराध नहीं होते थे।
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