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फाइल में हस्ताक्षर नहीं, फिर भी बनाया आरोपी : नसीमुद्दीन
Fri, 01 Feb 2019 11:55 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Published by: ASIF ASIF
Updated Fri, 01 Feb 2019 11:55 PM IST
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी।
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ के स्मारक घोटाले में आरोपी बसपा सरकार के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत इस मामले में घसीटा जा रहा है। इस प्रकरण की किसी भी फाइल में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। कहा कि फाइल में कहीं भी मेरे हस्ताक्षर मिल जाएं तो बिना जांच के खुद को दोषी मान लूंगा।
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शुक्रवार को गृह जनपद आए एमएलसी व कांग्रेसी नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में कहा कि घोटाले की एफआईआर वर्ष 2013 में सपा सरकार में दर्ज कराई थी। तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा का कार्यकाल 8 वर्ष किए जाने के लिए विधान परिषद में बिल लाया गया था। तब मैं नेता विरोधी दल था। मेरे विरोध के चलते बिल पारित नहीं हो सका।
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कथित घोटाले की एफआईआर में उन्हें शामिल किया जाना इसी का नतीजा है। कहा कि स्मारक का निर्माण मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित बोर्ड ने कराया। ईडी की एफआईआर में उन पर सिर्फ इतना आरोप है कि वे पीडब्ल्यूडी मंत्री होते हुए अपने आवास में मीटिंग और मानीटरिंग करते थे। कहा कि मुख्यमंत्री के लिखित निर्देश थे कि सभी मंत्री प्रत्येक माह एक बार अपने कैंप कार्यालय में मीटिंग कर कार्यों की समीक्षा करें, लेकिन उनके कहीं भी फाइल में हस्ताक्षर नहीं हैं। खनन विभाग के भूतपूर्व संयुक्त निदेशक व सलाहकार सुहैल अहमद फारुकी को निर्देश दिए थे कि स्मारक में एक भी पत्थर बगैर साइंटिस्ट के टेस्ट के बिना नहीं लगना चाहिए। ईडी की जांच में मैंने हमेशा सहयोग किया है और आगे भी करता रहूंगा।
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टिकट नहीं मांगा, हाईकमान जो कहेगी वो करेंगे
कांग्रेस के टिकट पर बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने यह कहकर विराम लगाने की कोशिश की कि पार्टी हाईकमान से उन्होंने कहीं से भी टिकट नहीं मांगा है। मेरी प्राथमिकता कांग्रेस को मजबूत करना है। पार्टी नेतृत्व जो निर्देश और दायित्व सौंपेगा, उसी पर अमल करूंगा। यह भी कहा कि हाईकमान कहीं से भी चुनाव लड़ने का निर्देश देगा तो उस पर विचार करेंगे। फिलहाल बांदा से चुनाव लड़ने की कोई बात नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी के आने से पार्टी और मजबूत हुई है। जनता में कांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ा है।
विकास कार्य ठप होने पर जताया अफसोस
पूर्व मंत्री ने मेडिकल कालेज, कृषि विश्वविद्यालय, फोरलेन बाईपास सहित विभिन्न कार्यों की दुर्दशा पर अफसोस जताया। कहा कि मंत्री रहने पर उन्होंने यहां कई महत्वपूर्ण कार्य कराए, लेकिन अब बांदा या बुंदेलखंड में नए विकास कार्य तो दूर पौने सात साल में पुराने विकास कार्य भी ठप हो गए। कहा कि मुझे नाम की नहीं, जनहित के काम की जरूरत है। मेडिकल कालेज, सड़कें, पानी, बिजली और कृषि विश्वविद्यालय को सरकार और विकसित करे।
मेडिकल कालेज को उन्होंने वेंटीलेटर और एनआईसीयू दिया, लेकिन 8 साल से यह मशीनें धूल खा रही हैं। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई मशीनों का स्वीकृत पैसा वापस हो गया। हेड इंज्यूरी, हार्ट पेशेंट के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है। उधर, पूर्व सांसद भीष्म देव दुबे की धर्मपत्नी और कांग्रेस नेता प्रद्युम्न दुबे लालू की मां के निधन पर शोक व्यक्त करने उनके कटरा स्थित आवास भी पहुंचे।