{"_id":"5fe770ed8ebc3e3c833a7e73","slug":"father-had-gone-10-days-before-promising-to-come-soon-banda-news-knp602313413","type":"story","status":"publish","title_hn":"जल्द आने का वादा करके 10 दिन पहले गया था पिता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जल्द आने का वादा करके 10 दिन पहले गया था पिता
विज्ञापन
बांदा के दुबेन पुरवा में शोकग्रस्त परिजनों से घटना की जानकारी लेते डीएम आनंद कुमार सिंह। यहां आग
- फोटो : BANDA
मरका। लॉकडाउन में लौट आया कल्लू यादव 10 दिन पहले ही वापस जयपुर गया था। वहां वह मजदूरी करता है। ग्रामीणों के मुताबिक पत्नी और बच्चों को भरोसा दिला गया था कि अगले माह मकर संक्रांति में कुछ कमाई लेकर आएगा। लेकिन कुदरत का कारनामा ऐसा रहा कि वह यह अपना वादा पूरा नहीं कर सका। उसके आने से पहले ही पत्नी और बच्चे हादसे का शिकार हो गए।
दुबेन पुरवा में एक साथ जलकर चार मौतों के बाद परिवार का मुखिया कल्लू यादव और उसकी मां भगवती ही बचे हैं। कल्लू के पिता फूलचंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। कुछ बीघा जमीन पर मामूली खेती हो जाती है।
उसकी पत्नी मृतका संगीता का मायका बबेरू क्षेत्र के ही पतवन गांव में है। कल्लू के दो भाई और हैं, लेकिन वह बंटवारे के बाद अलग रहते हैं। शनिवार को देर रात तक वह गांव नहीं लौट पाया था। बताया कि वह रास्ते में है। उधर, चारों शवों का शनिवार को देर रात तक पोस्टमार्टम नहीं हो पाया था।
विज्ञापन
अग्निकांड में चार सामूहिक मौतों पर मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सरकारी सहायता भी मिलेगी। जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह ने घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान यह भरोसा दिया। उधर, एसडीएम सौरभ शुक्ला ने बताया कि जांच कराकर प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। राजस्व और सरकारी नियमों के अनुसार आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। दुबेन पुरवा की कुल आबादी लगभग 300 बताई गई है।
गृह स्वामिनी और उसे तीन बच्चों के जिंदा जलने की घटना में पुलिस की फौरी तौर पर हुई जांच में ठंड से बचने के लिए जलाई गई आग की चिंगारी बताई जा रही है। थानाध्यक्ष रामाश्रय सिंह ने बताया कि पुलिस को सुबह 5 बजे सूचना मिली। वह तत्काल फोर्स के साथ पहुंचे, लेकिन तब तक चारों की जलकर मौत हो चुकी थी।
घर में कोई ऐसा नहीं बचा जिससे घटना के बारे में जानकारी ली जा सके। उन्होंने बताया कि फौरी तौर पर जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक ठंड में जलाए गए अलाव से आग लगी। घर के अंदर रखा भूसा और लकड़ी ईंधन से आग ने और विकराल रूप ले लिया।
विज्ञापन
दुबेन पुरवा में एक साथ जलकर चार मौतों के बाद परिवार का मुखिया कल्लू यादव और उसकी मां भगवती ही बचे हैं। कल्लू के पिता फूलचंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। कुछ बीघा जमीन पर मामूली खेती हो जाती है।
विज्ञापन
उसकी पत्नी मृतका संगीता का मायका बबेरू क्षेत्र के ही पतवन गांव में है। कल्लू के दो भाई और हैं, लेकिन वह बंटवारे के बाद अलग रहते हैं। शनिवार को देर रात तक वह गांव नहीं लौट पाया था। बताया कि वह रास्ते में है। उधर, चारों शवों का शनिवार को देर रात तक पोस्टमार्टम नहीं हो पाया था।
विज्ञापन
अग्निकांड में चार सामूहिक मौतों पर मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सरकारी सहायता भी मिलेगी। जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह ने घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान यह भरोसा दिया। उधर, एसडीएम सौरभ शुक्ला ने बताया कि जांच कराकर प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। राजस्व और सरकारी नियमों के अनुसार आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। दुबेन पुरवा की कुल आबादी लगभग 300 बताई गई है।
गृह स्वामिनी और उसे तीन बच्चों के जिंदा जलने की घटना में पुलिस की फौरी तौर पर हुई जांच में ठंड से बचने के लिए जलाई गई आग की चिंगारी बताई जा रही है। थानाध्यक्ष रामाश्रय सिंह ने बताया कि पुलिस को सुबह 5 बजे सूचना मिली। वह तत्काल फोर्स के साथ पहुंचे, लेकिन तब तक चारों की जलकर मौत हो चुकी थी।
घर में कोई ऐसा नहीं बचा जिससे घटना के बारे में जानकारी ली जा सके। उन्होंने बताया कि फौरी तौर पर जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक ठंड में जलाए गए अलाव से आग लगी। घर के अंदर रखा भूसा और लकड़ी ईंधन से आग ने और विकराल रूप ले लिया।