{"_id":"624f2f38acc6cb2ec110b908","slug":"farmers-will-lose-22-crores-for-fertilizer-banda-news-knp689936470","type":"story","status":"publish","title_hn":"खाद के लिए किसानों को पड़ेगी 22 करोड़ की चपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खाद के लिए किसानों को पड़ेगी 22 करोड़ की चपत
विज्ञापन
डीएपी खाद की बोरियां
- फोटो : BANDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। डीजल के बाद अब किसानों पर खाद महंगी होने की मार पड़ी है। पहली अप्रैल से डीएपी खाद के दामों में 150 रुपये प्रति बोरी (50 किलो) की वृद्धि कर दी गई है। जायद व खरीफ की फसल के लिए किसानों को बढ़े दामों में ही खाद मिलेगी। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में किसानों पर अपनी फसल खाद से सरसब्ज करने के लिए 22 करोड़ रुपये और खर्च करने होंगे। मंडल करीब 3 लाख पंजीकृत किसान हैं जो डीएपी का इस्तेमाल करते हैं।
मंडल के पंजीकृत तीन लाख किसानों के पास 11 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि है। यहां किसान सिंचाई संसाधनों के अभाव में खरीफ व रबी यानी दो फसलें लेता है। खरीफ में 1 लाख 98 हजार व रबी में 5 लाख 37 हजार क्विंटल डीएपी की जरूरत पड़ती है। डीजल के दामों में लगातार बेतहाशा वृद्धि के बाद अब खाद की बोरी में एकमुश्त 150 रुपये बढ़ा दिए गए।
इससे मंडल के किसानों पर 22 करोड़ रुपये सालाना का सीधा खर्च बढ़ा है। उनका कहना है कि बीज, सिंचाई, डीजल, खाद आदि में जितना पैसा खर्च हो जाता है उतनी पैदावार नहीं होती। संयुक्त कृषि निदेशक चित्रकूटधाम मंडल उमेश कटियार ने कहा कि किसानों को बढ़े हुए दामों पर नई आने वाली खाद मिलेगी। जो खाद पहले से यहां डंप है वह पुराने दाम पर ही मिलेगी। नई खाद की बोरी में नए दाम प्रिंट होंगे।
विज्ञापन
किसानी से तौबा करने को मजबूर किसान
प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह का कहना है कि एक तरफ सरकार कृषि को बढ़ावा देने की बात करती है दूसरी तरफ खाद, बीज, डीजल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी करके किसानों को कृषि से तौबा करने को मजबूर कर रही है। किसान इस कमर तोड़ महंगाई में उपज से खर्च भी नहीं निकाल पाएगा। दाम बढ़ने से खेती की लागत बढ़ना तय है।
विज्ञापन
मंडल के पंजीकृत तीन लाख किसानों के पास 11 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि है। यहां किसान सिंचाई संसाधनों के अभाव में खरीफ व रबी यानी दो फसलें लेता है। खरीफ में 1 लाख 98 हजार व रबी में 5 लाख 37 हजार क्विंटल डीएपी की जरूरत पड़ती है। डीजल के दामों में लगातार बेतहाशा वृद्धि के बाद अब खाद की बोरी में एकमुश्त 150 रुपये बढ़ा दिए गए।
विज्ञापन
इससे मंडल के किसानों पर 22 करोड़ रुपये सालाना का सीधा खर्च बढ़ा है। उनका कहना है कि बीज, सिंचाई, डीजल, खाद आदि में जितना पैसा खर्च हो जाता है उतनी पैदावार नहीं होती। संयुक्त कृषि निदेशक चित्रकूटधाम मंडल उमेश कटियार ने कहा कि किसानों को बढ़े हुए दामों पर नई आने वाली खाद मिलेगी। जो खाद पहले से यहां डंप है वह पुराने दाम पर ही मिलेगी। नई खाद की बोरी में नए दाम प्रिंट होंगे।
विज्ञापन
किसानी से तौबा करने को मजबूर किसान
प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह का कहना है कि एक तरफ सरकार कृषि को बढ़ावा देने की बात करती है दूसरी तरफ खाद, बीज, डीजल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी करके किसानों को कृषि से तौबा करने को मजबूर कर रही है। किसान इस कमर तोड़ महंगाई में उपज से खर्च भी नहीं निकाल पाएगा। दाम बढ़ने से खेती की लागत बढ़ना तय है।