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मक्का ने किसानों में जगाई उम्मीद

Mon, 01 Aug 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Mon, 01 Aug 2016 11:37 PM IST
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Farmers expect corn raised in
प्रतीकात्मक। - फोटो : अमर उजाला

सूखे की मार से टूट चुके किसानों में मक्का ने उम्मीद जगाई है। कम लागत और प्रति हेक्टेयर एक लाख तक की आमदनी होने के कारण इस बार किसानों ने सोयाबीन की खेती से तौबा कर मक्का की ओर रुख किया है। चित्रकूटधाम मंडल में मक्का की खेती को बढ़ावा देने की कवायदें तेज कर दी गई है।

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इस साल मंडल के चारों जिलों में 200 हेक्टेयर में मक्का बोने का लक्ष्य कृषि विभाग ने निर्धारित किया है। इसके विपरीत लगभग 195 हेक्टेयर में 1768 किसानों द्वारा मक्का बुआई कर लेने का कृषि विभाग ने दावा किया है। पिछले वर्ष मंडल में मात्र 43 हेक्टेयर में मक्के की फसल बोई गई थी। दूसरी तरफ, पिछले पांच साल में सोयाबीन की फसल का क्षेत्रफल 12 हजार हेक्टेयर से घटकर सिर्फ 884 रह गया है।
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मक्का की फसल मामूली लागत में 80 से 90 दिन में तैयार हो जाती है। साथ ही प्रति हेक्टेयर 35 से 40 कुंतल भुट्टा निकलते हैं। प्रति कुंतल भुट्टे की कीमत करीब चार हजार रुपये है। किसान एक हेक्टेयर में करीब एक लाख रुपये की आमदनी हो जाती है।
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पिछले साल कृषि विभाग की ओर से टूर में भटवारा (नागपुर), महाराष्ट्र, बकेवर आदि जगहों से मक्का की खेती का प्रशिक्षण लेकर लौटे किसानों ने महज 43 हेक्टेयर में मक्का की फसल बोई। उन्हें फायदा नजर आया, तो इस साल मंडल में इसका रकबा बढा़कर करीब 200 हेक्टेयर कर दिया गया है। सबसे ज्यादा चित्रकूट जनपद में 169 हेक्टेयर में बुआई हुई है। बांदा व महोबा में 14-14 और हमीरपुर में 9 हेक्टेयर में फसल तैयार हो रही है।

जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बताया कि मक्का की खेती बेहद आसान है। भुट्टों की बिक्री हाथों हाथ हो जाती है। इस फसल में ज्यादा या कम बारिश भी झेलने की क्षमता है। मक्का अगली फसल (गेहूं, मसूर, मटर) के लिए भी खेत की ताकत बढ़ाता है। मक्का की पहली बार खेती कर रहे सिंघौली (तिंदवारी) के किसान रामऔतार यादव ने बताया कि मक्का में पिछले साल अच्छा फायदा हुआ था। इसलिए इस वर्ष दो हेक्टेयर में मक्का बोया है। अन्य किसानों को भी इसकी प्रेरणा दे रहे हैं।

सोयाबीन से मुंह मोड़ रहे मंडल के किसान
बांदा। खरीफ के समय कभी ज्यादा बारिश तो कभी सूखा के हालात से परेशान किसान अब सोयाबीन की खेती से मुंह मोड़ रहे हैं। वर्ष 2010 में मंडल में करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सोयाबीन की फसल लहलहाती थी। इसमें सबसे ज्यादा बांदा में साढ़े सात हजार हेक्टेयर में किसान सोयाबीन की खेती करते थे।

लेकिन इस साल यह सिर्फ 884 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सीमित रह गया है। बांदा व चित्रकूट जिले से सोयाबीन तकरीबन गायब हो रही है। बांदा में इस साल सिर्फ 45 और चित्रकूट में 48 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही सोयाबीन बोई गई है। हमीरपुर जिले में 533 और महोबा में 258 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती हो रही है।


जिला कृषि अधिकारी डा. बाल गोविंद यादव ने बताया कि चार-पांच सालों से यहां सोयाबीन के अनुकूल मौसम नहीं रहता। किसान बुवाई तो करते हैं, पर कभी ज्यादा बारिश तो कभी सूखे के चलते उपज नहीं हो पाती। इससे किसान सोयाबीन से मुंह मोड़ रहे हैं।

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