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Banda News: धोखाधड़ी में किसान व बैंक कर्मियों पर होगी प्राथमिकी

Wed, 14 Jan 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Wed, 14 Jan 2026 12:16 AM IST
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Farmers and bank employees will be booked for fraud
बांदा। तीन दशक से चले आ रहे एक भूमि विवाद और कथित बैंक ऋण फर्जीवाड़े के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने फैसला सुनाया है। अदालत ने संबंधित किसान, दो बैंकों के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना कराने के आदेश दिए हैं।
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थाना मटौंध क्षेत्र के कस्बा निवासी गिरजा शंकर और दुरेड़ी निवासी रामकृपाल सिंह के बीच एक कृषि भूमि को लेकर पंजीकृत इकरारनामा हुआ था। इकरारनामे की शर्त के अनुसार शेष विक्रय मूल्य प्राप्त होने पर भूमि का बैनामा किया जाना था। आरोप है कि बैनामा नहीं किया गया और न ही शेष धनराशि लौटाई गई। इकरारनामे की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कपटपूर्ण तरीके से भूमि के कुछ हिस्सों का बैनामा अन्य व्यक्तियों के नाम कर दिया गया।
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आरोप है कि इस भूमि को बंधक के रूप में दर्शाकर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की भवानीपुरवा शाखा और पल्हरी शाखा से जाली व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत कराया गया। ऋण स्वीकृत होने के बाद ऋण की सीमा भी बढ़ाई गई। प्रार्थी का कहना है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में संबंधित बैंकों के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों और कर्मचारियों की मिलीभगत थी। जिसके कारण प्रार्थी और बैंकिंग व्यवस्था को क्षति पहुंची।
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इस मामले में दीवानी न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तक लंबी कानूनी लड़ाई चली। कई वाद, पुनरीक्षण और रिट याचिकाओं के बाद वर्ष 2023 में अदालत के आदेश पर प्रार्थी गिरजा शंकर के पक्ष में पंजीकृत बैनामा कराया गया। इसके बावजूद आरोप है कि पूर्व भू-स्वामी द्वारा फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर भूमि पर कब्जा बनाए रखने और ऋण लेने की आपराधिक गतिविधियां जारी रहीं।




न्यायालय ने थाना मटौंध पुलिस को आदेश दिया है कि किसान रामकृपाल सिंह, दोनों बैंकों के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों और संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए। दर्ज की गई प्राथमिकी की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने और मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध विवेचना सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया है।
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