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टावर पर चढ़कर बोला यहीं लगाऊंगा फांसी

Fri, 15 May 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Fri, 15 May 2015 12:12 AM IST
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farmer attempt to suicide

बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद फसल का मुआवजा न मिलने से नाराज किसान ने मंगलवार को हाईटेंशन लाइन के टावर पर चढ़कर जान देने का प्रयास किया। किसान के इस कदम से जिला प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। किसान टावर पर ही फांसी लगा लेने की जिद पर करीब चार घंटे तक अड़ा रहा।

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बामुश्किल प्रशासनिक अफसरों ने उसे दो दिन में मुआवजा का चेक देने का आश्वासन देकर नीचे उतारा। इस तरह से मेरठ के खरखौंदा में 25 अप्रैल को किसान योगेंद्र कुमार की टावर से कूदकर जान देने की जैसी घटना यहां होते होते बच गई।
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मामला बिसंडा थाना क्षेत्र के तेंदुरा गांव का है। गांव की दलित बस्ती का रहने वाला रामनारायण (37) पुत्र मइयादीन वर्मा गुरुवार की सुबह करीब 6:30 बजे घर से लगभग दो किलोमीटर दूर खेत में लगे हाईटेंशन लाइन के टावर पर रस्सी लेकर चढ़ गया।
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टावर पर चढ़कर वह चिल्लाया कि उसके परिवार को फसल बर्बादी पर अब तक कोई सरकारी राहत नहीं मिली है। फसल बर्बाद होने से परिवार भुखमरी की कगार पर है। वहीं कर्ज अदायगी के लिए साहूकार परेशान कर रहे हैं। उसका शोर सुनकर कुछ ही देर में टावर के नीचे ग्रामीणों का हुजूम लग गया। इस पर लोगों ने ओरन पुलिस चौकी को सूचना दे दी।

बिसंडा थानाध्यक्ष केशव वर्मा और ओरन चौकी प्रभारी राकेश पाल मौके पर पहुंचे। किसान को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नीचे नहीं उतरा। कुछ देर बाद  एसडीएम अतर्रा आरके श्रीवास्तव, क्षेत्राधिकारी बबेरू यशवीर सिंह व तहसीलदार राकेश कुमार मिश्र भी आ गए।

अफसरों ने देर तक रामनारायण को समझाया। एसडीएम ने भरोसा दिया कि उसे तुरंत राहत राशि दी जाएगी। इस पर करीब चार घंटा तक अफसरों को छकाने के बाद पीड़ित रामनारायण टावर से नीचे उतरा। एसडीएम अपने वाहन से उसे घर तक छोड़ने गए।

लेखपाल राजकुमार सोनकर को दो दिन में उसके पिता और मां के नाम राहत राशि का चेक जारी करने के निर्देश दिए। रामनारायण ने अफसरों को बताया कि माता-पिता के नाम साढ़े साथ बीघा जमीन है। बारिश और ओलावृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई।


इसी बीच 9 मई को उसकी पुत्री पिंकी की शादी हुई। साहूकारों का लगभग 70 हजार रुपये कर्ज है। इलाहाबाद बैंक चौसड़ शाखा से केसीसी में 1 लाख 30 हजार का कर्ज ले रखा है। फसल बर्बाद होने से तंगी है। साहूकार भी कर्ज अदायगी के लिए परेशान कर रहे हैं।

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