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धान में भी ज्यादा जलभराव नुकसानदेह
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sun, 21 Aug 2016 11:22 PM IST
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बोट का इंजन खराब होने पर दुरुस्त करते पीएसी जवान।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। जिला कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि खेत में भरे पानी को निकालने की जल्द व्यवस्था करें। धान की फसल पानी ज्यादा चाहती है लेकिन ज्यादा जलभराव नुकसानदेह है। जहां धान की रोपाई हो गई है, वहां खेतों में इतना पानी रखें कि पौधे आधे से कम डूबे रहें। मूंग, उर्द और अरहर की फसलों में भी पानी जल्द से जल्द निकालने का प्रयास किया जाए। पानी निकलते ही उनमें यूरिया खाद की टॉप ड्रेसिंग करना जरूरी है। इससे पौधे कुछ दिन में अपने पुराने रंग में आ जाएंगे।
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नदी के तटवर्ती ऊंचाई व ढाल वाले खेतों में बोई फसल यूरिया की टॉप ड्रेसिंग से 90 फीसदी तक बच जाएगी और उत्पादन भी बेहतर होगा। समतली जमीन वाले इलाकों में इस समय जलनिकासी की समस्या है लेकिन अब बारिश थम गई है और किसान शीघ्र ही मेड़ व बंधे काटकर खेतों का पानी निकालें। ताकि खेतों में नमी रोकने के लिए एक या दो बार गहरी जुताई की जा सके। उन्होंने बताया कि किसान उनके मोबाइल नंबर 7839921977 और कृषि वैज्ञानिक डॉ.पृथ्वीपाल के फोन नंबर 9454557520 पर संपर्क कर फसलों संबंधी जानकारी ले सकते हैं। जलभराव होने से फसलों में रोग और कीटों का भी खतरा मंडरा रहा है। नीमोटोड और सफेद सूड़ी जैसे कीट लगने से धान की फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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