बुंदेलखंड में आठ महीने में बढ़े आठ हजार अन्ना जानवर
बांदा। बुंदेलखंड में अन्ना गायों का संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। आठ महीने में ही आठ हजार अन्ना मवेशी बढ़ गए हैं। सरकारी और किसानों की तमाम रोकथाम और कवायदें फ्लाप साबित हो रही हैं। वर्ष 2012 में हुई 19वीं पशु गणना में चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना गायों की संख्या 74,713 थी। अब यह बढ़कर 2,13,658 हो गई है। इसके पूर्व 2007 में 18वीं पशु गणना में मंडल में 28,343 अन्ना गायें दर्ज थीं। पिछले पांच वर्षों में इनकी संख्या में दोगुना से भी ज्यादा लगभग 53 फीसदी वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा अन्ना गायें बांदा जनपद में हैं। जालौन में भी लगभग एक लाख के आसपास अन्ना गायें हैं। सूखे के बीच जोड़तोड़ और मशक्कत से बोई गई रबी की फसल को इनसे बचाने के लिए पूरे बुंदेलखंड में हाय-तोबा मची हुई है।
पिछले कई वर्षों से चली आ रही अन्ना गायों की समस्या अब विकराल रूप में सामने आई है। किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट बन गई हैं। प्रदेश सरकार से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि तक इस समस्या का निदान कराने का ढिंढोरा विधानसभा चुनाव के बाद से ही पीट रहे हैं। पर यह सिर्फ कोरी घोषणाएं साबित हो रही हैं। इस वर्ष भी बुंदेलखंड में बारिश कम होने से सूखे के हालात हैं। सिंचाई के निजी साधनों से बोई गई गेहूं, चना, अरहर, सरसों, मटर आदि की फसलों को बचाने के लिए किसान अपने प्राण दांव पर लगाए हैं। रात की जानलेवा ठंड में भी खुले आसमान तले खेतों में पहरा दे रहे हैं। पशु पालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और उरई जनपदों में 3 लाख से ज्यादा अन्ना पशु हैं। चित्रकूटधाम मंडल की सभी 1418 ग्राम पंचायतें अन्ना गायों से प्रभावित हैं। औसतन हरेक जनपद में लगभग डेढ़ सैकड़ा अन्ना पशु हैं।
चंदे से बनाए गोआश्रय
बांदा। सूखे के हालात में जबर्दस्त आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे किसानों ने अपने खर्चों में कटौती करके गांवों में गोशाला बनाने के लिए चंदा दिया है। बुंदेलखंड में ऐसी नजीरें एक-दो नहीं दर्जनों की तादाद में हैं। बांदा जनपद में जसपुरा ब्लाक के रामपुर गांव में तीन दिनों पूर्व किसानों ने करीब 400 अन्ना गायों को गांव के जूनियर स्कूल में कैद कर दिया। स्कूल में पढ़ाई बंद हो गई। अब यहां श्रीराम पांडेय और जगदीश सिंह आदि की पहल पर बुधवार को लगभग 14 हजार रुपये चंदा इकट्ठा कर छह बीघा जमीन में गौलिया तालाब के पास अन्ना गायों के लिए तार से घेराबंदी करके बाड़ा तैयार किया। किसानों ने खुद श्रमदान किया। इसी तरह कालिंजर क्षेत्र में भारतपुर मसौनी गांव के किसानों ने अपने पास से घेराबंदी करके अन्ना गायों का आश्रय स्थल तैयार किया है। इसमें 10 हजार रुपये चंदा करके जुटाए हैं। चारा-पानी में रोजाना लगभग 2 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही।