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महिलाओं व किशोरियों का पोषाहार गोदाम में डंप
अमर उजाला ब्यूरो/बांदा
Updated Thu, 12 Oct 2017 11:04 PM IST
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बांदा। बाल विकास परियोजना का पोषाहार नगर कार्यालय में डंप है। सितंबर में नगरीय क्षेत्रों के 187 केंद्रों में से 40 से ज्यादा आंगनबाड़ी केेंद्रों में पोषाहार नहीं पहुंचा। चार बार वितरण की तिथि लगाने के बावजूद कार्यकत्रियों ने पोषाहार नहीं उठाया।
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धात्री व गर्भवती महिलाओं तथा किशोरियों का कुपोषण दूर करने के लिए शासन से हर माह पोषाहार भेजा जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के जरिये यह लाभार्थियों तक पहुंचता है। महंगाई के दौरान दलित बस्तियों की तमाम किशोरियां और महिलाएं पौष्टिक आहार न मिलने से कुपोषण का शिकार है। पिछले दिनों कराए गए सर्वे में 7 हजार से ज्यादा महिलाएं और किशोरियां एनेमिया से ग्रस्त मिली थीं। पोषण मिशन योजना खत्म हो गई है लेकिन पोषाहार अभी भी बांटा जाना बाकी है। नगरीय क्षेत्रों में 187 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। बांदा नगर में सबसे ज्यादा 101, अतर्रा में 25, मटौंध, नरैनी, बिसंडा, बबेरू में 8-8 सेंटर हैं। ओरन में 6 केंद्र हैं। इन केंद्रों के लिए सितंबर में 1304 बोरी पोषाहार, मार्निंग स्नैक व विनिंग फूड आया था। प्रति केंद्र 7-7 बोरी पंजीरी, 3-3 बोरी विनिंग फूड और एक-एक बोरी मार्निंग स्नैक की निर्धारित हैं लेकिन बांदा नगर समेत बबेरू, मटौंध, तिंदवारी, नरैनी आदि की 40 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अभी तक पोषाहार नहीं उठाया। इन्हें सितंबर माह में 26 से 29 तक वितरण की तिथि दी गई थी। इसके बाद 4 अक्तूबर को वितरण के लिए बुलाया गया लेकिन आज भी सैकड़ों बोरी पोषाहार नगर के परियोजना कार्यालय में डंप हैं।
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‘पिछले तीन माह का पोषाहार आया था। इसके वितरण के बाद अक्तूबर का पोषाहार आना था लेकिन पहले के पोषाहार में करीब 300 बोरियां अभी रखी हैं। हड़ताल से आंगनबाड़ियां पोषाहार नहीं लेने आ रही हैं। इस बार अक्तूबर का पोषाहार शासन स्तर से ही नहीं आया।’ अर्जुन सिंह, बाल विकास परियोजना अधिकारी, नगरीय क्षेत्र
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