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सूखे बुंदेलखंड को हर साल मिलेगा 1700 एमसीएम पानी
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बांदा। केन नहर साल में करीब आठ महीने सूखी रहती है, इससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है। किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत केन नहर को प्रतिवर्ष 1700 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी देगा। इससे अधिक लाभ बांदा और महोबा जनपद को होगा।
खास बात यह है कि परियोजना से 750 एमसीएम पानी नवंबर से मई तक दिया जाएगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए भटकना न पड़े। नहर के सर्वे का काम दो माह में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद डिटेल्स पोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
किसानों की लाइफ लाइन कहे जाने वाला केन नहर भी गर्मी में सूख जाती है। यहां किसान बारिश के दौरान रबी की फसल तो केन नहर के सहारे तैयार कर लेते हैं, मगर गर्मी के समय नहर में पानी की कमी होने से खरीफ की फसल नहीं हो पाती है। किसानों की इस दिक्क्त को दूर करने के लिए परियोजना से पूरे साल मिलने वाले 1700 एमसीएम पानी में 750 एमसीएम केवल नवंबर से मई महीने तक नहर में छोड़ा जाएगा।
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महोबा में बनेंगे 13 बड़े साइज के टैंक
महोबा में पानी की अधिक समस्या को देखते हुए केन नहर से उर्मिल बांध को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही यहां स्थित मझिगवां बांध को उर्मिल बांध से मिलाया जाएगा। इन दोनों बांध के सहारे यहां पर 13 बड़े साइज के टैंक बनेंगे, जिससे सिंचाई के लिए इन टैंकों में अधिक से अधिक जल संचयन किया जा सके।
प्रति सेकेंड 2500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा
डीपीआर तैयार करने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से नहर का सर्वे तेजी से किया जा रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के दौधन बांध से केन नहर में प्रति सेकेंड 2500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इस परियोजना को पूरा होने में करीब आठ से दस साल का समय लग जाएगा।
नहर का एरिया बढ़ाया जाएगा
केन नहर प्रोजेक्ट तैयार होने पर बांदा जिले के 19249 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई आसानी से हो जाएगी। इसके लिए नहर से माइक्रो इरीगेशन सिस्टम को विकसित करके नहर के एरिया को बढ़ाया जाएगा। वहीं, महोबा जिले में 37564 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होना शुरू हो जाएगी।
दो-तिहाई सिंचित एरिया नहर के सहारे
जिले में सिंचाई के लिए कुल सिंचित क्षेत्र का दो-तिहाई क्षेत्रफल केन नहर के सहारे है। नहर में पानी नहीं होने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता श्याम जी चौबे का कहना है कि केन नहर के सर्वे का काम दो माह में पूरा कर लिया जाएगा।
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खास बात यह है कि परियोजना से 750 एमसीएम पानी नवंबर से मई तक दिया जाएगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए भटकना न पड़े। नहर के सर्वे का काम दो माह में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद डिटेल्स पोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
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किसानों की लाइफ लाइन कहे जाने वाला केन नहर भी गर्मी में सूख जाती है। यहां किसान बारिश के दौरान रबी की फसल तो केन नहर के सहारे तैयार कर लेते हैं, मगर गर्मी के समय नहर में पानी की कमी होने से खरीफ की फसल नहीं हो पाती है। किसानों की इस दिक्क्त को दूर करने के लिए परियोजना से पूरे साल मिलने वाले 1700 एमसीएम पानी में 750 एमसीएम केवल नवंबर से मई महीने तक नहर में छोड़ा जाएगा।
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महोबा में बनेंगे 13 बड़े साइज के टैंक
महोबा में पानी की अधिक समस्या को देखते हुए केन नहर से उर्मिल बांध को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही यहां स्थित मझिगवां बांध को उर्मिल बांध से मिलाया जाएगा। इन दोनों बांध के सहारे यहां पर 13 बड़े साइज के टैंक बनेंगे, जिससे सिंचाई के लिए इन टैंकों में अधिक से अधिक जल संचयन किया जा सके।
प्रति सेकेंड 2500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा
डीपीआर तैयार करने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से नहर का सर्वे तेजी से किया जा रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के दौधन बांध से केन नहर में प्रति सेकेंड 2500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इस परियोजना को पूरा होने में करीब आठ से दस साल का समय लग जाएगा।
नहर का एरिया बढ़ाया जाएगा
केन नहर प्रोजेक्ट तैयार होने पर बांदा जिले के 19249 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई आसानी से हो जाएगी। इसके लिए नहर से माइक्रो इरीगेशन सिस्टम को विकसित करके नहर के एरिया को बढ़ाया जाएगा। वहीं, महोबा जिले में 37564 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होना शुरू हो जाएगी।
दो-तिहाई सिंचित एरिया नहर के सहारे
जिले में सिंचाई के लिए कुल सिंचित क्षेत्र का दो-तिहाई क्षेत्रफल केन नहर के सहारे है। नहर में पानी नहीं होने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता श्याम जी चौबे का कहना है कि केन नहर के सर्वे का काम दो माह में पूरा कर लिया जाएगा।