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सजे बाजार, धनतेरस आज
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 08 Nov 2015 11:18 PM IST
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बांदा। खुशियों का पर्व ‘दीपोत्सव’ सोमवार से शुरू हो
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जाएगा। अगले पांच दिन तक दीप जलाने का सिलसिला जारी रहेगा। नौ नवंबर को
धनतेरस, 10 को छोटी दीपावली, 11 को दीपावली और 12 को गोवर्धन पूजा और 13
नवंबर को भाई दूज मनाया जाएगा।
छोटी दीपावली (धनतेरस) का पर्व सोमवार को परंपरागत रूप से मनाया जाएगा। चौक बाजार में पूर्व संध्या पर दुकानों को सजाने संवारने का काम चलता रहा।
ग्राहकों को रिझाने की होड़ मेें दुकानेें बढ़ाकर फुटपाथ पर भी रख दी गई हैं। इससे सड़कें सकरी हो गईं और आवागमन बाधित हो रहा है। यह समस्या सबसे ज्यादा बलखंडीनाका पुलिस चौकी से महेश्वरी देवी चौराहा होते हुए शंकर गुरु चौराहा और अमर टाकीज चौराहा तक है।
वहीं छोटी दीपावली से ग्रामीण इलाकों में दीवारी नृत्य का दौर शुरू हो जाएगा। गांव-गांव बच्चे व बड़े सभी ढोल की धुन पर दीवारी खेल खुशियों का इजहार करते हैं। महिलाएं भगवान धनवंतरि की स्थापना तथा पूजा अर्चना कर दरिद्रता दूर कर संपन्नता आने की कामना करेंगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित उमाकांत त्रिवेदी बताते हैं कि धनतेरस पर स्थिर और अस्थिर लग्नों में खरीददारी का विशेष योग है। इसके अनुसार ही धनतेरस की खरीददारी करें। प्रापर्टी, आभूषण, सोना, चांदी व अन्य कीमती धातुएं : सुबह 6.49 से 9.06 बजे तक।
दोपहर 12.57 से 02.08 बजे तक। शाम 5.34 से 7.31 बजे तक। रात 12.02 से 02.16 बजे तक। वाहन, टीवी, फ्रिज, कपड़े व इलेक्ट्रानिक्स सामान : सुबह 9.10 से 11.15 बजे तक। दोपहर 3.57 से 5.34 बजे तक। शाम 7.57 से 9.45 बजे तक।
धनतेरस पर शाम 5.16 मिनट से शाम 7.48 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस काल में मिट्टी के एक दीए में तिली या सरसो का तेल भरकर घर में प्रवेश द्वार की दाईं तरफ जलाना चाहिए।
धनतेरस से यम द्वितीया तक यम को दीप दान करने से परिवार में अकाल मृत्यु नहीं होती। मान्यता है जब पांडव अपना सारा राजपाट जुएं में हार गए तब द्रोपदी ने छठ का व्रत रखा था। द्रोपदी की मनोकामना पूरी हुई थी।
छोटी दीपावली (धनतेरस) का पर्व सोमवार को परंपरागत रूप से मनाया जाएगा। चौक बाजार में पूर्व संध्या पर दुकानों को सजाने संवारने का काम चलता रहा।
ग्राहकों को रिझाने की होड़ मेें दुकानेें बढ़ाकर फुटपाथ पर भी रख दी गई हैं। इससे सड़कें सकरी हो गईं और आवागमन बाधित हो रहा है। यह समस्या सबसे ज्यादा बलखंडीनाका पुलिस चौकी से महेश्वरी देवी चौराहा होते हुए शंकर गुरु चौराहा और अमर टाकीज चौराहा तक है।
वहीं छोटी दीपावली से ग्रामीण इलाकों में दीवारी नृत्य का दौर शुरू हो जाएगा। गांव-गांव बच्चे व बड़े सभी ढोल की धुन पर दीवारी खेल खुशियों का इजहार करते हैं। महिलाएं भगवान धनवंतरि की स्थापना तथा पूजा अर्चना कर दरिद्रता दूर कर संपन्नता आने की कामना करेंगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित उमाकांत त्रिवेदी बताते हैं कि धनतेरस पर स्थिर और अस्थिर लग्नों में खरीददारी का विशेष योग है। इसके अनुसार ही धनतेरस की खरीददारी करें। प्रापर्टी, आभूषण, सोना, चांदी व अन्य कीमती धातुएं : सुबह 6.49 से 9.06 बजे तक।
दोपहर 12.57 से 02.08 बजे तक। शाम 5.34 से 7.31 बजे तक। रात 12.02 से 02.16 बजे तक। वाहन, टीवी, फ्रिज, कपड़े व इलेक्ट्रानिक्स सामान : सुबह 9.10 से 11.15 बजे तक। दोपहर 3.57 से 5.34 बजे तक। शाम 7.57 से 9.45 बजे तक।
धनतेरस पर शाम 5.16 मिनट से शाम 7.48 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस काल में मिट्टी के एक दीए में तिली या सरसो का तेल भरकर घर में प्रवेश द्वार की दाईं तरफ जलाना चाहिए।
धनतेरस से यम द्वितीया तक यम को दीप दान करने से परिवार में अकाल मृत्यु नहीं होती। मान्यता है जब पांडव अपना सारा राजपाट जुएं में हार गए तब द्रोपदी ने छठ का व्रत रखा था। द्रोपदी की मनोकामना पूरी हुई थी।