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Banda News: दानी को नहीं होना चाहिए अभिमानी
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खप्टिहा कलां। दानी को कभी अभिमानी नहीं होना चाहिए। उसे अपने इस गुण का बखान नहीं करना चाहिए। इससे उसकी महानता पर असर पड़ता है। श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य विमलांशु ने यह संदेश कथा के माध्यम से दिया। कथा के दौरान बच्चों ने कृष्ण लीला भी की। नन्हें मुन्ने बच्चे कान्हा, राधा के रूप में मंच पर पहुंचे और श्रद्धालुओं ने उन पर पुष्प वर्षा कर उनकी आरती उतारी।
पाथामाई दरबार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य ने कहा की अभिमान करने से दान का फल समाप्त हो जाता है। उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि राजा नृग ने गाय ब्राह्मणों को दान में दिया और वह गाय छूटकर राजा के यहां गोशाला में आ गई। भूल से राजा ने उसी गाय को दूसरे ब्राह्मण को दान कर दिया। दोनों ब्राह्मण गाय को ढूंढते हुए लड़ते झगड़ते राजा के पास आए और राजा से कहा कि आप हमारा फैसला कर दो।
राजा ने ब्राह्मणों को बहुत समझाया और अंत में एक गाय के बदले में 10,000 गाय देने का वचन दिया, किंतु ब्राह्मण संतुष्ट नहीं हुआ। मरने के बाद राजा को उस अपराध के बदले में गिरगिट योनि में जन्म लेना पड़ा। द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण के चरणों का स्पर्श पाकर नृग को मुक्ति मिली। कहा कि दान के बाद पश्चाताप नहीं करना चाहिए और अपात्र को कभी दान न करें। इस विधान से जो दान करता है संसार में उसका कल्याण होता है। कथा सुन श्रद्धालुओं ने जय श्रीकृष्ण और जय राधा कृष्ण के जयकारे लगाए और पुष्प वर्षा के बाद प्रसाद ग्रहण किया।
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पाथामाई दरबार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य ने कहा की अभिमान करने से दान का फल समाप्त हो जाता है। उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि राजा नृग ने गाय ब्राह्मणों को दान में दिया और वह गाय छूटकर राजा के यहां गोशाला में आ गई। भूल से राजा ने उसी गाय को दूसरे ब्राह्मण को दान कर दिया। दोनों ब्राह्मण गाय को ढूंढते हुए लड़ते झगड़ते राजा के पास आए और राजा से कहा कि आप हमारा फैसला कर दो।
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राजा ने ब्राह्मणों को बहुत समझाया और अंत में एक गाय के बदले में 10,000 गाय देने का वचन दिया, किंतु ब्राह्मण संतुष्ट नहीं हुआ। मरने के बाद राजा को उस अपराध के बदले में गिरगिट योनि में जन्म लेना पड़ा। द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण के चरणों का स्पर्श पाकर नृग को मुक्ति मिली। कहा कि दान के बाद पश्चाताप नहीं करना चाहिए और अपात्र को कभी दान न करें। इस विधान से जो दान करता है संसार में उसका कल्याण होता है। कथा सुन श्रद्धालुओं ने जय श्रीकृष्ण और जय राधा कृष्ण के जयकारे लगाए और पुष्प वर्षा के बाद प्रसाद ग्रहण किया।
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