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रुपये न लौटाओ, अच्छा सा कुर्ता-पायजामा बनवाओ
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शिरोमणि भाई
- फोटो : BANDA
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बांदा। ‘नेता जी! ये 5000 रुपये न लौटाओ। सीधे बांदा जाओ और बढ़िया कुर्ता-पायजामा बनवाओ।’ यह बात 1980 में कांग्रेस कोषाध्यक्ष रहे मोतीलाल बोरा (अब स्वर्गीय) ने उस वक्त कही जब विधायक चुनने के बाद शिरोमणि भाई रुपये लौटाने पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। बताते हैं कि उन्हें चुनाव खर्च के लिए 30 हजार रुपये मिले थे। सिर्फ 25 हजार रुपये ही खर्च हुए थे।
1980 में चित्रकूट बांदा जनपद का हिस्सा था। मऊ मानिकपुर (सुरक्षित) सीट से शिरोमणि भाई कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। शिरोमणि भाई मूलरूप से बांदा जनपद के बबेरू रोड स्थित पल्हरी गांव के हैं।
वह बताते हैं कि चुनाव खर्च के बाद बचे 5000 रुपये लौटाने वह लखनऊ गए तो बोरा जी ने पहले उन्हें घूरा और फिर बोले- लोग यहां लाख-डेढ़ लाख खर्च बता रहे और आप हो तो रुपये लौटाने आए हैं। जाओ जाकर, कुर्ता-पायजामा बनवा लेना।
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उनकी यह बात आज भी जेहन में जिंदा है। यह भी बताया कि 1984 विधान सभा के चुनाव में उनकी जीत के आगे अन्य प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची थी।
84 वर्षीय कांग्रेसी नेता/पूर्व विधायक शिरोमणि भाई ने बताया कि 1977 के चुनाव में भाजपा के रमेशचंद्र कुरील से वह हार गए थे। तब पूरे चुनाव में सिर्फ 5000 रुपये खर्च हुए थे। वह भी पूर्व सांसद रामनाथ दुबे ने चंदा करके दिया था।
वह और उनके कार्यकर्ता साइकिल से प्रचार करते रहे। बाद में चित्रकूट के राजधर मिश्र ने उन्हें प्रचार के लिए एक जीप दी थी। चंदा में जुटाया पैसा डीजल में ही खर्च हो गया था। उन्होंने अपनी हार की वजह नसबंदी सहित 20 सूत्री कार्यक्रम को बताया।
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1980 में चित्रकूट बांदा जनपद का हिस्सा था। मऊ मानिकपुर (सुरक्षित) सीट से शिरोमणि भाई कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। शिरोमणि भाई मूलरूप से बांदा जनपद के बबेरू रोड स्थित पल्हरी गांव के हैं।
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वह बताते हैं कि चुनाव खर्च के बाद बचे 5000 रुपये लौटाने वह लखनऊ गए तो बोरा जी ने पहले उन्हें घूरा और फिर बोले- लोग यहां लाख-डेढ़ लाख खर्च बता रहे और आप हो तो रुपये लौटाने आए हैं। जाओ जाकर, कुर्ता-पायजामा बनवा लेना।
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उनकी यह बात आज भी जेहन में जिंदा है। यह भी बताया कि 1984 विधान सभा के चुनाव में उनकी जीत के आगे अन्य प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची थी।
84 वर्षीय कांग्रेसी नेता/पूर्व विधायक शिरोमणि भाई ने बताया कि 1977 के चुनाव में भाजपा के रमेशचंद्र कुरील से वह हार गए थे। तब पूरे चुनाव में सिर्फ 5000 रुपये खर्च हुए थे। वह भी पूर्व सांसद रामनाथ दुबे ने चंदा करके दिया था।
वह और उनके कार्यकर्ता साइकिल से प्रचार करते रहे। बाद में चित्रकूट के राजधर मिश्र ने उन्हें प्रचार के लिए एक जीप दी थी। चंदा में जुटाया पैसा डीजल में ही खर्च हो गया था। उन्होंने अपनी हार की वजह नसबंदी सहित 20 सूत्री कार्यक्रम को बताया।