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पटरी पर नहीं आई जलापूर्ति, लाखों लोग परेशान

Wed, 02 May 2018 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Wed, 02 May 2018 11:31 PM IST
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Do not get water supply back, millions of people get annoyed
कुएं में पानी के लिए मशक्कत करते लोग। - फोटो : अमर उजाला

मंडल मुख्यालय बांदा शहर बुधवार को तीसरे दिन भी भीषण पेयजल संकट की गिरफ्त में रहा। भीषण गर्मी में उपभोक्ता एक-एक बाल्टी पानी के लिए तरस गए। हैंडपंपों और कुओं पर दिन-रात मारामारी रही। जल संस्थान के ट्यूबवेल न चल पाने से टैंकर की व्यवस्था भी फ्लाप हो गई। टैंकरों को पानी नहीं मिल पाया। मुख्यालय में पानी का इतना जबरदस्त संकट दशकों बाद हुआ है। इसके बाद भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी सिर्फ समीक्षा और दिशा-निर्देश तक सीमित रहे। पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे उपभोक्ताओं की हालत देखने प्रभावित इलाकों में नहीं पहुंचे।

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सोमवार शाम आई तेज आंधी से पेयजल व्यवस्था से जुड़े फीडर ध्वस्त हो गए थे। अतर्रा और नरैनी रोड पर जल संस्थान के सभी ट्यूबवेल की लाइनें धराशायी हो गईं। उधर, केन नदी से संचालित बांबेश्वर जोन के इंटेकवेल की लाइन भी जमींदोज हो गई। इंटेकवेल और सारे ट्यूबवेल बंद हो जाने से पूरे शहर की जलापूर्ति ठप हो गई। जल संस्थान और नगर पालिका सहित स्थानीय विधायक के टैंकर शोपीस बनकर खड़े हो गए। एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोग दिन और रात इधर-उधर भागते रहे। हैंडपंपों और कुओं पर भीड़ रही।  
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अलीगंज, हाथीखाना, ईदगाह रोड, खुटला, मर्दननाका, कुंजरहटी, छिपटहरी, छोटी बाजार, निम्नीपार, कालवनगंज, नवाब टैंक रोड, चौक बाजार, बलखंडी नाका, छावनी, कटरा, अर्दली बाजार, इंदिरा नगर, सर्वोदय नगर, सिविल लाइंस, बंगाली टोला, कालूकुआं, चमरौटी सहित शहर के लगभग सभी मोहल्लों में पानी का जबरदस्त संकट रहा। मुस्लिम इलाकों में ज्यादा परेशानी हुई। मंगलवार की रात शबे बारात थी। ऐसे में अधिकांश मुस्लिम परिवार इस रात इबादत के बजाय पानी के जुगाड़ में जुटे रहे। उपभोक्ता जल संस्थान और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों को कोसते रहे।  
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बांबेेश्वर जोन चालू, आज होगी जलापूर्ति 
बांदा। जल संस्थान अभियंताओं का कहना है कि बृहस्पतिवार से पानी की आपूर्ति में सुधार आ जाएगा। बुधवार दोपहर तक ट्यूबवेलों और इंटेकवेल की क्षतिग्रस्त लाइनों को बिजली विभाग ने दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल कर दी है। जल संस्थान अधिशासी अभियंता रतनलाल ने बताया कि बांबेश्वर जोन में पानी का भंडार शुरू कर दिया गया है। नियमित आपूर्ति मिलती रही तो बृहस्पतिवार को आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। अधिशासी अभियंता ने बताया कि अतर्रा रोड स्थित ट्यूबवेल नंबर-दो की बिजली अभी भी दुरुस्त नहीं हुई है। इसी ट्यूबवेल से सबसे अधिक पानी मिलता है। इससे अवस्थी पार्क, मर्दननाका, अलीगंज आदि इलाकों को आपूर्ति की जाती है। जल संस्थान सहायक अभियंता उमेश कुमार ने बताया कि तिंदवारी रोड स्थित ट्यूबवेल से टैंकर भरवाकर प्रभावित कई इलाकों में भेजे गए हैं। 


जेनरेटर के लिए पैसा कहां से लाएं? 
बांदा। ट्यूबवेलों और इंटेकवेल पर जेनरेटर न चालू होने के सवाल पर जल संस्थान अधिशासी अभियंता रतनलाल का कहना था कि पैसा कहां से लाएं? जेनरेटर की मरम्मत और संचालन के लिए पैसे की जरूरत है। रिपेयरिंग करने वाले मैकेनिक उधार काम नहीं कर रहे। अधिशासी अभियंता ने कहा कि वे जेनरेटर चलाने के लिए बजट देने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भेज रहे हैं। 


डीएम और जनप्रतिनिधि दे सकते हैं पैसा 
बांदा। आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे चित्रकूटधाम मंडल जल संस्थान को ऐसी विषम परिस्थितियों में डीएम अपने विवेक कोष से पैसा दे सकते हैं। साथ ही सांसद और विधायक अपनी निधियों से धनराशि उपलब्ध करा सकते हैं। पूर्व में जनप्रतिनिधियों ने ऐसा किया भी था। तत्कालीन विधायक विवेक सिंह इसकी बानगी हैं। मौजूदा विधायक प्रकाश द्विवेदी अपने निजी खर्च से शहर में छह टैंकर और दो ट्रैक्टर चलवा रहे हैं, लेकिन टैंकर भरने की व्यवस्था फ्लाप होने से इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा। नगर पालिका भी कई टैंकर लगाए है, लेकिन उसका भी यही हश्र है। 


बिजली विभाग को लगी लंबी चपत 
बांदा। आंधी से बिजली विभाग को खासा हुआ है, पेयजल संकट पैदा हुआ सो अलग। सोमवार की शाम आई आंधी से पेयजल आपूर्ति से जुड़े फीडरों को भारी नुकसान हुआ। पांच खंभे लाइनों समेत गिर गए। लगभग चार किलोमीटर लंबी लाइन ध्वस्त हो गई। लाइनों पर लगे 25 क्रास आम्र्स क्षतिग्रस्त हो गए। 40 इंसुलेटर और 6 डिस्क चकनाचूर हो गईं। इन्हें दुरुस्त करने में बिजली विभाग को पसीना आ गया। अधिशासी अभियंता अनिल पाठक, सहायक अभियंता रजनेश व कुमार सौरभ, सहायक अभियंता कांता प्रसाद की देखरेख में ठेकेदार सचिन मिश्रा की लगभग 40 सदस्यीय टीम ने पूरी रात काम कर बुधवार को दोपहर सारी लाइनें दुरुस्त कीं। 



याद आए पूर्व डीएम महेंद्र बहादुर 
बांदा। भीषण पेयजल संकट में उपभोक्ता खुद को अनाथ महसूस करते रहे। अफसरों ने उनकी सुध नहीं ली। ऐसे में तमाम उपभोक्ता पूर्व डीएम महेंद्र बहादुर सिंह को याद करते रहे। उनके कार्यकाल में बिजली और जल संस्थान विभाग 24 घंटे सोशल मीडिया पर ‘ऑनलाइन’ रहते थे। उपभोक्ता व्हाट्सएप पर बिजली-पानी संकट की सूचना देते थे। डीएम महेंद्र बहादुर तत्काल जवाब में सिर्फ इतना लिखते थे कि नोट किया। उनका इतना संज्ञान लेना ही बिजली और जल संस्थान अभियंताओं पर भारी पड़ता था। तत्काल अभियंता व्हाट्सएप पर जानकारी देते थे कि बिजली या पानी क्यों बंद है? और कब तक चालू हो जाएगा? उपभोक्ताओं को अर्जी लेकर कलक्ट्रेट नहीं आना पड़ता था।

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