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आसमान से आफत बरसी, फसल बर्बाद, किसान बेदम
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बारिश से तालाब बन गए खेत को निहारता किसान। संवाद
- फोटो : BANDA
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बांदा। चित्रकूट और बांदा समेत समूचे बुंदेलखंड में रविवार को आसमान से आफत बरसी। बीते चार दिन से बारिश तो हो ही रही थी, शनिवार रात ओलावृष्टि ने किसानों पर कहर बरपा दिया। एक घंटे तक लगातार मूसलाधार बारिश और ओलों की वजह से रबी की फसलों को भारी नुकसान हुआ। खेतों में सरसों, चना, मटर व मसूर की पौध बिछ गई। नुकसान का सही आकलन बारिश बंद होने के बाद होगा। जगह जगह पक्षी भी मरे मिले।
बांदा में बीते 24 घंटे में औसत 30 और चार दिनों में 103 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। शीतकाल में पिछले एक दशक में यह सर्वाधिक है। यहां शनिवार रात और रविवार को पूरा दिन गरज और चमक के साथ बारिश होती रही। बीच बीच में कई बार ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने रविवार को महोबा समेत प्रदेश भर के 18 जिलों के अलर्ट जारी किया है।
बांदा में नरैनी, तिंदवारी, करतल, जसपुरा, अतर्रा, मटौंध, ओरन, पैलानी आदि क्षेत्रों में देर तक ओले गिरे। कई जगह खेतों में बर्फ की सफेद परत जम गई। सरसों, अरहर, मसूर, मटर के फूल गिर गए। किसानों में हाय तौबा मच गई। अतर्रा क्षेत्र के पचोखर, तेंदुही, रहूसत, गड़ांव, महोतरा, नगनेधी, खुरहंड में फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। किसान शंभू धतुरहा, रज्जन चौरिहा, अनिल मिश्रा आदि ने बताया कि मटर, मसूर, चना, गेहूं मिट्टी में मिल गया है। सरसों, अरहर टूट गई है।
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तिंदवारी के गुगौली, भिड़ौरा, पलरा, बंबिया सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की मटर, गेहूं, चना, मसूर फसल नष्ट हो गई। कतरल क्षेत्र के बिल्हरका गांव के किसान अशेाक व फूल सिंह, बाबूपाल, बिल्लू सिंह, भैयाराम ने बताया कि तीन दर्जन गांवों की रबी की फसल खराब हो गई है। ओरन के किसान रमाकांत त्रिपाठी, सुघर सिंह, तेज सिंह, शुभकरण ने बताया कि फसलों के अलावा सब्जी की बारी भी उजड़ गईं। खप्टिह कलां के किसान अशोक द्विवेदी, अर्जुन सिंह, लखन सिंह आदि का कहना है कि आपदा ने किसानों को किसी लायक नहीं छोड़ा। धान खलिहान में सड़ रहा है। मटौंध क्षेत्र के कहरा, बहिंगा, सिरसी, कुलकुआं, बरबई आदि गांवों में ओलावृष्टि से रबी की फसलें बर्बाद हो गई है।
जनजीवन अस्त व्यस्त
शहरी व ग्रामीण जनजीवन अस्त व्यस्त है। गलियों में जलभराव व कीचड़ होने से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। बारिश थमने के इंतजार में लोग घरों में बैठे रहे। बारिश रुकने पर लोगों ने जरूरी काम निपटाया।
पारा गिरने से गलन बढ़ी
पारा गिर जाने और मौसम में नमी 80 फीसदी से ज्यादा हो जाने से गलन और बढ़ गई। अधिकतम और न्यूनतम पारा गिरावट के साथ क्रमश: 18 व 12 डिग्री रिकार्ड किया गया। 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं ने लोगों को कंपकंपा दिया।
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बांदा में बीते 24 घंटे में औसत 30 और चार दिनों में 103 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। शीतकाल में पिछले एक दशक में यह सर्वाधिक है। यहां शनिवार रात और रविवार को पूरा दिन गरज और चमक के साथ बारिश होती रही। बीच बीच में कई बार ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने रविवार को महोबा समेत प्रदेश भर के 18 जिलों के अलर्ट जारी किया है।
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बांदा में नरैनी, तिंदवारी, करतल, जसपुरा, अतर्रा, मटौंध, ओरन, पैलानी आदि क्षेत्रों में देर तक ओले गिरे। कई जगह खेतों में बर्फ की सफेद परत जम गई। सरसों, अरहर, मसूर, मटर के फूल गिर गए। किसानों में हाय तौबा मच गई। अतर्रा क्षेत्र के पचोखर, तेंदुही, रहूसत, गड़ांव, महोतरा, नगनेधी, खुरहंड में फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। किसान शंभू धतुरहा, रज्जन चौरिहा, अनिल मिश्रा आदि ने बताया कि मटर, मसूर, चना, गेहूं मिट्टी में मिल गया है। सरसों, अरहर टूट गई है।
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तिंदवारी के गुगौली, भिड़ौरा, पलरा, बंबिया सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की मटर, गेहूं, चना, मसूर फसल नष्ट हो गई। कतरल क्षेत्र के बिल्हरका गांव के किसान अशेाक व फूल सिंह, बाबूपाल, बिल्लू सिंह, भैयाराम ने बताया कि तीन दर्जन गांवों की रबी की फसल खराब हो गई है। ओरन के किसान रमाकांत त्रिपाठी, सुघर सिंह, तेज सिंह, शुभकरण ने बताया कि फसलों के अलावा सब्जी की बारी भी उजड़ गईं। खप्टिह कलां के किसान अशोक द्विवेदी, अर्जुन सिंह, लखन सिंह आदि का कहना है कि आपदा ने किसानों को किसी लायक नहीं छोड़ा। धान खलिहान में सड़ रहा है। मटौंध क्षेत्र के कहरा, बहिंगा, सिरसी, कुलकुआं, बरबई आदि गांवों में ओलावृष्टि से रबी की फसलें बर्बाद हो गई है।
जनजीवन अस्त व्यस्त
शहरी व ग्रामीण जनजीवन अस्त व्यस्त है। गलियों में जलभराव व कीचड़ होने से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। बारिश थमने के इंतजार में लोग घरों में बैठे रहे। बारिश रुकने पर लोगों ने जरूरी काम निपटाया।
पारा गिरने से गलन बढ़ी
पारा गिर जाने और मौसम में नमी 80 फीसदी से ज्यादा हो जाने से गलन और बढ़ गई। अधिकतम और न्यूनतम पारा गिरावट के साथ क्रमश: 18 व 12 डिग्री रिकार्ड किया गया। 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं ने लोगों को कंपकंपा दिया।

बांदा के सिकलोढ़ी गांव में बारिश के पानी से डूबे गेहूं के पौधे। - फोटो : BANDA