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शोभायात्रा में भक्ति भाव की सरिता बही
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 28 May 2015 12:32 AM IST
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अतर्रा चुंगी स्थित शिव मंदिर में बुधवार को मंत्रोच्चार के बीच मां वैष्णों की मूर्ति की स्थापना की गई। इससे पूर्व भक्तों ने शोभायात्रा निकाली। शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए यात्रा वापस मंदिर पहुंची। इसी के साथ यहां चल रही भागवत कथा का समापन हो गया।
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भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचक पंडित अभिषेक कृष्ण अवस्थी ने भक्ति पर प्रकाश डाला। कहा कि भक्ति करने के तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन सबसे अच्छा तरीका भगवत भजन है। इसके जरिए गृहस्थ जीवन में रहकर मनुष्य भगवान को आसानी से प्राप्त कर सकता है।
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उन्होंने कृष्ण सुदामा प्रसंग सुनाकर भावविभोर किया। इससे पूर्व सुबह मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में महिला पुरुष और बच्चे भक्ति गीतों पर थिरकते रहे। यात्रा शास्त्री नगर अतर्रा चुंगी से जिला परिषद, बाबूलाल चौराहा होते हुए वापस शिव मंदिर पहुंची।
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संयोजक अशोक कुमार सेन व रज्जू सेन ने बताया कि बृहस्पतिवार को हवन-पूजन, कन्या भोज एवं भंडारा होगा। शोभायात्रा में अशोक, राजेश दीक्षित, विमला तिवारी, मंगल राजपूत आदि शामिल रहे।
संतोष सुखमय जीवन का आधार
बांदा। श्री समेद शिखर मधुबन (बिहार) से पदयात्रा पर निकले मुनि शुभम सागर महाराज ने कहा कि संतोष ही सुखमय जीवन का आधार है। संतोष रखने वाला व्यक्ति ही सुखी जीवन का उपभोग करता है। मनुष्य के रूप में जन्म लेने के बाद अपने ही जीवन को सफल बनाया तो हम 84 योनियो में भटकते रहेंगे।
जीवन को आवश्यकता से अधिक देने पर बाधाएं आती हैं। जैन धर्म में संयम को ही सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। वे छोटी बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन कर रहे थे। यहां जैन समाज के लोग मौजूद रहे।