फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Death hovering roofs and pavement

छतों और फुटपाथों पर मंडरा रही मौत

Thu, 16 Jun 2016 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Thu, 16 Jun 2016 11:57 PM IST
विज्ञापन
Death hovering roofs and pavement
प्राइवेट बस अड्डे और बजरंग इंटर कालेज के रास्ते पर छत में असुरक्षित ढंग से लगी होर्डिंग। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। नगर पालिका और प्रशासन की सुस्ती से शहर की छतों और सड़कों पर हर पल मौत मंडरा रही है। विज्ञापन कंपनियों ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी व निजी भवनों में करीब पांच सौ से ज्यादा अवैध होर्डिंग्स लगा रखी है। तेज आंधी में ये किसी भी समय राहगीरों के लिए जानलेवा साबित होंगी। कानपुर में हाल ही में ऐसी घटनाएं सामने भी आई हैं। फिर भी प्रशासन कोई सबक नहीं ले रहा। 31 मार्च को होर्डिंग्स का ठेका खत्म हो गया था। दोबारा नहीं हुआ। विज्ञापन एजेंसियां जगह-जगह अवैध होर्डिंग्स लगाकर खुद कमाई और राजस्व को चूना लगा रही हैं।

विज्ञापन



शहर भर में तनी ‘मौत की छतरियों’ यानी होर्डिंग्स, यूनीपोल, बड़े बैनर गिरने से अगर किसी की जान जाती है तो इसका मुआवजा कौन देगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। कारण अवैध और नियम विरुद्ध होर्डिंग्स लगी हैं। सरकारी अस्पताल, स्कूल या अन्य सरकारी भवनों तथा संकरी गलियों में होर्डिंग्स पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। नगर पालिका अपने क्षेत्र के लिए हर साल इसका ठेका देती है। चार से पांच लाख रुपये में ठेका होता है। विज्ञापन कंपनियां नगर पालिका के कर्मचारियों व अधिकारियों से सांठगांठ कर मौत का खेल खेल रही हैं। आदर्श बजरंग इंटर कालेज के पास, कचहरी रेलवे क्रासिंग, कालूकुआं, इंदिरा नगर आदि इलाकों में छतों पर भारी भरकम होर्डिंग्स लगाई गई हैं। मकान मालिक किराए की लालच में आसपास के लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। अधिकारियों की निगाह इस पर नहीं रही है।
विज्ञापन


होर्डिंग्स संबंधी ये हैं नियम
विकास प्राधिकरण की स्ट्रक्चरल इंजीनियर रिपोर्ट बिना होर्डिंग नहीं लगाई जा सकती। शासन ने दो माह पहले ही यह आदेश जारी किया है। इसके तहत छतों व अन्य स्थानों पर लगे होर्डिंग्स का नवीनीकरण तभी होगा जब वे इनकी मजबूती के संबंध में रिपोर्ट देंगे। होर्डिंग्स पर बाकायदा विज्ञापन एजेंसी का नाम, पता, मोबाइल नंबर भी होना चाहिए। ताकि होर्डिंग्स गिरने व उससे होने वाले नुकसान की भरपाई कराई जा सके। लेकिन होर्डिंग्स में यह भी दर किनार कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ठेका कराना पालिका का काम, आप से क्या
बांदा। नगर पालिका अधिशाषी अभियंता वीरेंद्र श्रीवास्तव ने इसे गंभीरता से लेने के बजाय गैर जिम्मेदराना जवाब दिया। उन्होंने कहा कि होर्डिंग्स से आपका का क्या लेना-देना। ठेका कराना या न कराना यह नगर पालिका का काम है। कितनी होर्डिंग्स लगी हैं। इसके लिए तीन दिन बाद आइए तभी जानकारी मिल पाएगी। विज्ञापन के लिए ठेके की दो-तीन बार प्रक्रिया कराई गई है, लेकिन कोई ठेकेदार नहीं मिल रहे। तो क्या वह खुद ठेका ले लें या आप ले लीजिए।


मोबाइल टावर भी अवैध
बांदा। मंडल मुख्यालय समेत जिले के अन्य नगरीय क्षेत्रों में लगे मोबाइल टावर भी अधिकांश अवैध हैं। बांदा शहर में दर्जनों भीड़ भाड़ वाले व्यस्त इलाकों में धरती या बिल्डिंगों की छत पर भारी भरकम मोबाइल टावर लगाए गए हैं। इनमें भी कानून की  अनदेखी की गई है। आरटीआई में मांगी गई सूचना मेें बांदा विकास प्राधिकरण अधिशासी अभियंता ने समाजसेवी प्रमोद आजाद को दी सूचना में बताया है कि प्राधिकरण ने किसी भी घरेलू या व्यवसायिक बिल्डिंग पर मोबाइल टावर लगाने की अनुमति नहीं दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed