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Banda News: नहीं थमा डीएपी का संकट, मंडी समिति के चारों केंद्र बंद
Sun, 23 Nov 2025 12:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 23 Nov 2025 12:07 AM IST
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फोटो- 12 मंडी समिति स्थित खाद बिक्री केंद्र पर चस्पा नोटिस व जानकारी लेते किसान। संवाद
बांदा। रबी फसल की बोआई में जरूरी डीएपी खाद का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुंदेलखंड के जिलों में लक्ष्य के करीब पहुंच डीएपी की मांग कम नहीं हो रही है। समितियों में सरकारी रेट में मिलने वाली डीएपी की चाहत में किसान प्रतिदिन लाइन में लग रहे हैं। बांदा में इस बार 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा खाद के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक आठ हजार से ज्यादा मीट्रिक टन खाद का वितरण हो चुका है। कमोवेश इसी तरह से जालौन के भी हाल हैं। यहां अब तक 32 हजार मीट्रिक टन खाद बांटी जा चुकी है। विभाग के पास करीब सात हजार मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। बांदा में मंडी समिति में खुले केंद्र 17 नवंबर के बाद से अग्रिम आदेशों तक बंद करा दिए गए हैं। इसके पीछे खाद की कमी बताई जा रही है।
रबी की फसल गेहूं, चना, मटर, सरसों, मसूर, अलसी की बोआई में डीएपी की जरूरत होती है। बांदा जिले में इस वर्ष यूरिया 20513 मीट्रिक टन, डीएपी 10797 मीट्रिक टन व एनके 805 मीट्रिक टन है। विभाग का दावा है कि इस लक्ष्य के सापेक्ष जिले की समितियों से यूरिया 2981, डीएपी 8121 व एनपीके 946 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जबकि, बोआई के समय डीएपी खाद के लिए किसानों में मारामारी मचती है।
लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी डीएपी की मांग अब भी जारी है। हालांकि विभाग का कहना है कि बिक्री केंद्रों में यूरिया 817 मीट्रिक टन, डीएपी 641 मीट्रिक टन व एनपीके 71 मीट्रिक टन उपलब्ध है। इसी तरह से गोदाम में यूरिया 1004 मीट्रिक टन, डीएपी 121 मीट्रिक टन व एनपीके का स्टॉक खत्म हो चुका है। बिक्री केंद्रों में खाद उपलब्धता का दावा करने के बावजूद शहर के तिंदवारी रोड स्थित मंडी समिति में खुले चार केंद्र पीसीएफ, केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार, डीसीडीएफ प्रथम व डीसीडीएफ द्वितीय के केंद्र 17 नवंबर के बाद अग्रिम आदेशों तक बंद करा दिए गए हैं।यहां से प्रतिदिन किसान लौट रहे हैं।
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बोले किसान
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मुरवल के किसान अजय पाल ने बताया कि रबी की बोआई का समय चल रहा है। उन्होंने अपनी कापी जमा की हुई है। खरीद केंद्र बंद होने से उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है।
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दौलतपुर गांव के किसान रामकिशोर ने बताया कि रबी की बोआई में डीएपी की जरूरत सबसे ज्यादा पड़ती है। केंद्रों में डीएपी नहीं मिल रही है। यूरिया दे रहे हैं, जबकि यूरिया का बोआई के बाद सिंचाई में इस्तेमाल किया जाता है।
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वर्जन
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जिले में खाद का संकट नहीं है। फतेहपुर से शनिवार को डीएपी आईपीएल की 380 मीट्रिक टन खाद आ रही है। इसी तरह से यूरिया की 1608 मीट्रिक टन की रैक बांदा में लगी है। किसानों को समितियों से खाद मुहैया कराई जा रही है। गत वर्ष डीएपी खाद का लक्ष्य 5154 मीट्रिक टन था, इस वर्ष वह गत वर्ष की तुलना में तीन हजार मीट्रिक टन से ज्यादा डीएपी खाद का वितरण करा चुके हैं।
अंसल कुमार, सहायक आयुक्त सहकारिता, बांदा।
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वर्जन
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मंडी समिति के खरीद केंद्रों के बंद होने की जानकारी उनके पास नहीं है, पता करके बता रहे हैं।
नमन मेहता, एसडीएम सदर, बांदा।
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जालौन में 32 हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण
जालौन। जिले में गत वर्ष 29 हजार मीट्रिक टन खाद वितरित की गई थी लेकिन इस वर्ष जल्दी बोआई की शुरूआत हुई तो अभी तक 32 हजार मीट्रिक टन खाद बांटी जा चुकी है। विभाग के पास करीब सात हजार मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।
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चित्रकूट में छह हजार एमटी से ज्यादा का डीएपी का वितरण, लक्ष्य नौ हजार
चित्रकूट। जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने बताया कि इस साल रबी के सीजन में डीएपी का लक्ष्य 9,268 एमटी है। अभी तक 6,064 एमटी डीएपी बांटी गई। यूरिया का लक्ष्य 21,419 एमटी हैं। अभी तक 12,000 एमटी खाद बांटी गई। रबी की फसल की बोआई का रकबा एक लाख 15 हजार हेक्टेयर है। संभावना जताई जा रही है यह बढ़कर एक लाख 41 हजार हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। पिछले साल की अपेक्षा इस साल अभी तक डीएपी का वितरण 52 प्रतिशत अधिक किया गया है। इसी तरह से यूरिया खाद का वितरण 14 प्रतिशत अधिक किया गया है।
बताया कि पिछले साल 9,402 एमटी डीएपी बांटने का लक्ष्य था। जिसमें से आठ हजार एमटी से अधिक डीएपी का वितरण किया गया था। इस साल जनवरी माह तक खाद बांटी जाएगी। अभी तक पिछले साल की अपेक्षा डीएपी का वितरण 52 फीसद अधिक किया गया है। दो दिन के अंदर डीएपी खाद की एक नई रैक आनी वाली है। किसान चिंता नहीं करे। जरूर मंद सभी किसानों को खाद का वितरण किया जाएगा।
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रबी की फसल गेहूं, चना, मटर, सरसों, मसूर, अलसी की बोआई में डीएपी की जरूरत होती है। बांदा जिले में इस वर्ष यूरिया 20513 मीट्रिक टन, डीएपी 10797 मीट्रिक टन व एनके 805 मीट्रिक टन है। विभाग का दावा है कि इस लक्ष्य के सापेक्ष जिले की समितियों से यूरिया 2981, डीएपी 8121 व एनपीके 946 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जबकि, बोआई के समय डीएपी खाद के लिए किसानों में मारामारी मचती है।
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लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी डीएपी की मांग अब भी जारी है। हालांकि विभाग का कहना है कि बिक्री केंद्रों में यूरिया 817 मीट्रिक टन, डीएपी 641 मीट्रिक टन व एनपीके 71 मीट्रिक टन उपलब्ध है। इसी तरह से गोदाम में यूरिया 1004 मीट्रिक टन, डीएपी 121 मीट्रिक टन व एनपीके का स्टॉक खत्म हो चुका है। बिक्री केंद्रों में खाद उपलब्धता का दावा करने के बावजूद शहर के तिंदवारी रोड स्थित मंडी समिति में खुले चार केंद्र पीसीएफ, केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार, डीसीडीएफ प्रथम व डीसीडीएफ द्वितीय के केंद्र 17 नवंबर के बाद अग्रिम आदेशों तक बंद करा दिए गए हैं।यहां से प्रतिदिन किसान लौट रहे हैं।
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बोले किसान
मुरवल के किसान अजय पाल ने बताया कि रबी की बोआई का समय चल रहा है। उन्होंने अपनी कापी जमा की हुई है। खरीद केंद्र बंद होने से उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है।
दौलतपुर गांव के किसान रामकिशोर ने बताया कि रबी की बोआई में डीएपी की जरूरत सबसे ज्यादा पड़ती है। केंद्रों में डीएपी नहीं मिल रही है। यूरिया दे रहे हैं, जबकि यूरिया का बोआई के बाद सिंचाई में इस्तेमाल किया जाता है।
वर्जन
जिले में खाद का संकट नहीं है। फतेहपुर से शनिवार को डीएपी आईपीएल की 380 मीट्रिक टन खाद आ रही है। इसी तरह से यूरिया की 1608 मीट्रिक टन की रैक बांदा में लगी है। किसानों को समितियों से खाद मुहैया कराई जा रही है। गत वर्ष डीएपी खाद का लक्ष्य 5154 मीट्रिक टन था, इस वर्ष वह गत वर्ष की तुलना में तीन हजार मीट्रिक टन से ज्यादा डीएपी खाद का वितरण करा चुके हैं।
अंसल कुमार, सहायक आयुक्त सहकारिता, बांदा।
वर्जन
मंडी समिति के खरीद केंद्रों के बंद होने की जानकारी उनके पास नहीं है, पता करके बता रहे हैं।
नमन मेहता, एसडीएम सदर, बांदा।
जालौन में 32 हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण
जालौन। जिले में गत वर्ष 29 हजार मीट्रिक टन खाद वितरित की गई थी लेकिन इस वर्ष जल्दी बोआई की शुरूआत हुई तो अभी तक 32 हजार मीट्रिक टन खाद बांटी जा चुकी है। विभाग के पास करीब सात हजार मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।
चित्रकूट में छह हजार एमटी से ज्यादा का डीएपी का वितरण, लक्ष्य नौ हजार
चित्रकूट। जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने बताया कि इस साल रबी के सीजन में डीएपी का लक्ष्य 9,268 एमटी है। अभी तक 6,064 एमटी डीएपी बांटी गई। यूरिया का लक्ष्य 21,419 एमटी हैं। अभी तक 12,000 एमटी खाद बांटी गई। रबी की फसल की बोआई का रकबा एक लाख 15 हजार हेक्टेयर है। संभावना जताई जा रही है यह बढ़कर एक लाख 41 हजार हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। पिछले साल की अपेक्षा इस साल अभी तक डीएपी का वितरण 52 प्रतिशत अधिक किया गया है। इसी तरह से यूरिया खाद का वितरण 14 प्रतिशत अधिक किया गया है।
बताया कि पिछले साल 9,402 एमटी डीएपी बांटने का लक्ष्य था। जिसमें से आठ हजार एमटी से अधिक डीएपी का वितरण किया गया था। इस साल जनवरी माह तक खाद बांटी जाएगी। अभी तक पिछले साल की अपेक्षा डीएपी का वितरण 52 फीसद अधिक किया गया है। दो दिन के अंदर डीएपी खाद की एक नई रैक आनी वाली है। किसान चिंता नहीं करे। जरूर मंद सभी किसानों को खाद का वितरण किया जाएगा।

फोटो- 12 मंडी समिति स्थित खाद बिक्री केंद्र पर चस्पा नोटिस व जानकारी लेते किसान। संवाद

फोटो- 12 मंडी समिति स्थित खाद बिक्री केंद्र पर चस्पा नोटिस व जानकारी लेते किसान। संवाद