फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   cultural

भक्तों की झोली भरती हैं मां काली

Wed, 13 Oct 2021 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 12:03 AM IST
विज्ञापन
cultural
बेंदाघाट। यमुना नदी के तट पर स्थित प्राचीन काली देवी का मंदिर लोगों का आस्था व विश्वास का केंद्र बना है। मान्यता है कि मां काली यहां आने वाले भक्तों की हर कामना पूरी झोली भरती है।
विज्ञापन

शारदीय नवरात्र में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां नवरात्र, कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्राति, वैशाखी पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है। जिले के अलावा दूसरे प्रांतों के भक्त भी काली देवी मंदिर दर्शन व आराधना करने आते हैं। जनश्रुति के अनुसार लगभग 400 वर्ष पहले जूनादास नाम के व्यापारी ने मनोकामना पूरी होने पर मंदिर का निर्माण कराया था।
विज्ञापन

बुजुर्ग बताते हैं कि पहले व्यापारियों के लिए आने-जाने का साधन नदी और नाव थी। 1750 के आसपास व्यापारी जूनादास व्यापार करके लौट रहे थे। अचानक उनकी चांदी के सिक्कों से भरी थैली गुम हो गई। उन्होंने घाट किनारे छोटी सी मां काली की प्रतिमा की पूजा की और मन्नत मांगी कि थैली मिल जाए तो मंदिर बनवाएंगे। रात में व्यापारी को मां ने दर्शन देकर कहा कि चांदी की थैली बरमदेव बाबा के स्थान के सामने रेत में दबी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

व्यापारी ने उस स्थान पर खुदाई की तो थैली मिल गई। इसके बाद व्यापारी ने मंदिर बनवाया। कानपुर के श्याम नगर से यहां आई मनोज कुमारी कहती हैं कि बेटी की शादी को आठ साल हो गए थे, लेकिन कोई संतान नहीं थी। मन्नत मांगी तो बेटी के बेटा हो गया। तीन सालों से निरंतर यहां नवरात्र में पूजन को आते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed