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दलित की हत्या में दोषी को उम्रकैद

Thu, 06 Oct 2016 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Thu, 06 Oct 2016 12:05 AM IST
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Life convict in the murder of the Dalit
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

बांदा। कुल्हाड़ी से दलित को मौत के घाट उतारने वाले हत्यारे को अदालत ने आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना की रकम मृतक की पत्नी को मिलेगी। संदेह के आधार पर दो आरोपियों को बरी कर दिया गया। गिरवां थाना क्षेत्र के मलेहरा निवादा गांव निवासी मेड़िया ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि उसका पति देवीदीन कोटार्य गांव के महेश तिवारी की धान मिल में काम करता था।

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नौ फरवरी 2014 को सुबह वह काम पर चला गया। रोज की तरह वह दोपहर दो बजे खाना खाने घर नहीं आया तो वह अपने देवर के पुत्र विनोद के साथ महेश की धान मिल पता लगाने गई। वहां बताया गया कि गांव का राजेश तिवारी पुत्र राजकरन उसे अपने साथ ले गया है। वह राजेश तिवारी के घर गई तो अवधेश पुत्र जयपाल गर्ग, जसवंत रैदास पुत्र पुजारी व ओमकार दुबे उर्फ बग्गड़ देवीदीन के हाथ पकड़े थे और राजेश तिवारी कुल्हाड़ी से उसकी गर्दन व मुंह व सिर पर वार कर रहा था। शोर मचाने पर जान से मारने की धमकी दी।
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पुलिस ने विवेचना के बाद राजेश तिवारी, अवधेश, जसवंत और ओमकार दुबे उर्फ बग्गड़ के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। विशेष न्यायाधीश (एसटी/एसटी एक्ट) डीपीएन सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर व फेरन सिंह पाल ने आठ गवाह पेश किए। एक अभियुक्त अवधेश की दौरान मुकदमा मौत हो गई। मुख्य अभियुक्त राजेश तिवारी को दोषी पाते हुए न्यायाधीश ने बुधवार को हत्या व एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जसवंत व बग्गड़ को संदेह के आधार पर बरी कर दिया। अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह भदौरिया ने भी अभियोजन की ओर से पैरवी की।

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