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बांदा की सब्जी मंडी राख, एक करोड़ का नुकसान
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 11 Oct 2015 11:39 PM IST
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बांदा। शहर के बीच घनी बाजार में स्थित पुरानी सब्जी
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मंडी में रविवार की रात भीषण आग लग गई। इससे दो सैकड़ा से ज्यादा थोक व
फुटकर दुकानें राख हो गईं। एक करोड़ रुपये से ज्यादा की क्षति का अनुमान
है। आग लगने के एक घंटे बाद भी प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं
पहुंचा।
फायर ब्रिगेड के दो बड़े वाहनों से भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इससे पड़ोसी जिलों की दमकलें बुलाने की तैयारी है। सब्जी मंडी में कई साल पहले भी भीषण अग्निकांड हुआ था। दुकानदारों का आरोप है कि आग लगाई गई है और वे इसकी एफआईआर कराएंगे।
रविवार रात करीब नौ बजे थोक व्यापारी मंजूर व ऐनुल आदि की दुकानों में ऊपर लगी फट्टियों से अचानक आग भड़क उठी। ज्यादातर दुकानदार उस समय दुकान समेटने में लगे थे। चंद मिनटों में ही आग ने विकराल रूप ले लिया। दुकानदारों ने भागकर जान बचाई। कोहराम के बाद भी देर तक बिजली आपूर्ति बंद नहीं हुई। फायर ब्रिगेड भी लगभग 45 मिनट बाद आई।
तब तक आग और फैल चुकी थी। दुकानों में रखा सैकड़ों बोरा टमाटर, आलू, प्याज, लहसुन, अदरक और फर्नीचर आदि जलकर राख हो गया। जिन दुकानदारों की दुकानें स्वाहा हुईं, उनमें फारूक, साबिर, हकीम, रईस, मानिकचंद्र, रमेश, हबीब, सलीम, यासीन, मकबूल, अन्नू अनवर, ज्ञानचंद्र दौलत, भोला आदि लगभग दो सैकड़ा दुकानदार हैं। देर रात तक आग बुझाई नहीं जा सकी थी।
फायर ब्रिगेड के दो बड़े वाहनों से भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इससे पड़ोसी जिलों की दमकलें बुलाने की तैयारी है। सब्जी मंडी में कई साल पहले भी भीषण अग्निकांड हुआ था। दुकानदारों का आरोप है कि आग लगाई गई है और वे इसकी एफआईआर कराएंगे।
रविवार रात करीब नौ बजे थोक व्यापारी मंजूर व ऐनुल आदि की दुकानों में ऊपर लगी फट्टियों से अचानक आग भड़क उठी। ज्यादातर दुकानदार उस समय दुकान समेटने में लगे थे। चंद मिनटों में ही आग ने विकराल रूप ले लिया। दुकानदारों ने भागकर जान बचाई। कोहराम के बाद भी देर तक बिजली आपूर्ति बंद नहीं हुई। फायर ब्रिगेड भी लगभग 45 मिनट बाद आई।
तब तक आग और फैल चुकी थी। दुकानों में रखा सैकड़ों बोरा टमाटर, आलू, प्याज, लहसुन, अदरक और फर्नीचर आदि जलकर राख हो गया। जिन दुकानदारों की दुकानें स्वाहा हुईं, उनमें फारूक, साबिर, हकीम, रईस, मानिकचंद्र, रमेश, हबीब, सलीम, यासीन, मकबूल, अन्नू अनवर, ज्ञानचंद्र दौलत, भोला आदि लगभग दो सैकड़ा दुकानदार हैं। देर रात तक आग बुझाई नहीं जा सकी थी।