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गाय को मां मानना दुनिया की नायाब मिसाल

Tue, 06 Sep 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Tue, 06 Sep 2016 11:34 PM IST
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Cow mother believes the world's rarest examples in banda
Pham Tu, who is from Vietnam. - फोटो : अमर उजाला

बांदा। भारत के गांवों और कृषि के तौर-तरीके का जायजा लेने आईं वियतनाम की समाजसेवी महिला तू फाम ने कहा कि भारत वास्तव में कृषि प्रधान देश है। यहां कृषि और पशुओं के बीच गहरा रिश्ता है। यह भी बहुत महत्वपूर्ण बात है कि भारत के लोग गाय को मां के समान मानते हैं। ऐसी मिसाल दुनिया के अन्य देशों में नहीं है।मंगलवार को नरैनी क्षेत्र के गुढ़ा पंचायत गांव में विद्याधाम समिति और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान की संयुक्त गोष्ठी में विशेष रूप से शामिल हुईं विदेशी समाजसेवी तू फाम ने कहा कि जैविक खेती स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है लेकिन कुछ किसान अधिक उत्पादन के लालच में रसायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जमीन बीमार पड़ रही है। इससे बचने की जरूरत है। गोष्ठी में उपस्थित विधायक और उत्तर प्रदेश विधायिन समिति के सभापति विशंभर सिंह यादव ने कहा कि कई वर्षों से दैवी आपदाओं की मार झेल रहे बुंदेलखंड में स्थाई खेती और लघु उद्यमों से ही किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर कार्यों के नियोजन की जरूरत है।

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विधायक ने कहा कि गांवों में अगर कोई सामुदायिक सहभागिता से कृषि या बागवानी के प्लान बनाएगा तो उसमें वह खुद रहकर सीखेंगे। जैविक खेती जरूरी है। बुंदेलखंड विकास परिषद संयोजक पुष्पेंद्र भाई ने कहा कि जल संरक्षण कार्यक्रमों की बहुत जरूरत है। नियोजित ढंग से कृषि या बागवानी की जाए तो किसान गरीबी रेखा से सात वर्ष में ऊपर आ जाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता अमर सिंह राठौर ने कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन में इच्छा शक्ति हो तो बड़े से बड़े काम हो सकते हैं। उन्होंने समस्याओं का समाधान मिलकर करने को कहा। गोष्ठी में सामाजिक कार्यकर्ता रवि प्रकाश, बृजमोहन यादव, कृष्णा, वर्षा कौशल, मोहम्मद हनीफ, मोहम्मद कामिल, मोहित, रामजी, रमाशंकर यादव, संतोष कुमार सहित सुशील त्रिपाठी, सुरेश कुमार, लक्ष्मण कुमार आदि शामिल रहे। गोष्ठी का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता राजाभइया ने किया।

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