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अरसे बाद दो खास त्योहारों का संयोग
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गुझिया और हलुवा के लिए सामग्री खरीदतीं हिंदू-मुस्लिम महिला ग्राहक।
- फोटो : BANDA
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बांदा। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा और इस्लामी कलेंडर के शाबान माह की 14वीं को शब-ए-बरात के एक साथ संयोग से शुक्रवार को एक तरफ जहां होली की गुझिया की मिठास लोगों की जुबां पर होगी तो दूसरी तरफ शब-ए-बरात के हलुवे का जायका भी मिलेगा। गुझिया और हलुवा तैयार करने के लिए पूर्व संध्या पर गुरुवार को हिंदू-मुस्लिम ग्राहकों से बाजार गुलजार रहा। देर रात तक खरीदारी हुई। करोड़ों रुपये का रंग-गुलाल और पिचकारी कारोबार हुआ। जिले में शुक्रवार और शनिवार को दो दिन होली मनेगी।
लंबे अरसे के बाद दो महत्वपूर्ण पर्वों के एक साथ पड़ने का संयोग आया है। इसे लेकर हिंदू-मुस्लिम दोनों ही उत्साहित हैं। गुरुवार को पूरे दिन मुस्लिम समुदाय के लोग हलुवा के लिए सूजी, मैदा, घी, चीनी और विभिन्न खाने वाले रंग आदि की खरीदारी में जुटे रहे। दूसरी तरफ गुझिया के लिए मैदा, खोया, चीनी, मेवा आदि के लिए हिंदू ग्राहकों की दुकानों में भीड़ रही।
रंग-गुलाल, पिचकारी आदि की दुकानों में भी देर रात तक खरीद-फरोख्त की धूम रही। लगभग सभी सामग्रियों में दाम बढ़े होने के बावजूद लोगों ने पूरे जोशखरोश से त्योहारी खरीदारी की। देर रात होलिका दहन के साथ ही होली की धूम शुरू हो गई। बांदा शहर में करीब एक सैकड़ा और पूरे जनपद में लगभग 1173 स्थानों पर होली जलाई गई। होलिका दहन स्थलों के आसपास सजावट के बीच लाउडस्पीकर पर होली गीत गूंजते रहे।
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नई फसलों के साथ होलिका का किया पूजन
बांदा। होलिका दहन की ऊंची लपटों के बीच श्रद्धालुओं ने गेहूं की बाली व चना का बिरवा इत्यादि को होली में समर्पित किया। होलिका की चारों ओर सात परिक्रमा लगाईं। उधर, घरों में पूजा के दौरान गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाकर फूलों की माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल और पांच या सात प्रकार के अनाज तथा एक लोटा जल से पूजा की। बड़ी फुलौरी, मीठे पकवान, मिठाइयां आदि अर्पित कीं।
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लंबे अरसे के बाद दो महत्वपूर्ण पर्वों के एक साथ पड़ने का संयोग आया है। इसे लेकर हिंदू-मुस्लिम दोनों ही उत्साहित हैं। गुरुवार को पूरे दिन मुस्लिम समुदाय के लोग हलुवा के लिए सूजी, मैदा, घी, चीनी और विभिन्न खाने वाले रंग आदि की खरीदारी में जुटे रहे। दूसरी तरफ गुझिया के लिए मैदा, खोया, चीनी, मेवा आदि के लिए हिंदू ग्राहकों की दुकानों में भीड़ रही।
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रंग-गुलाल, पिचकारी आदि की दुकानों में भी देर रात तक खरीद-फरोख्त की धूम रही। लगभग सभी सामग्रियों में दाम बढ़े होने के बावजूद लोगों ने पूरे जोशखरोश से त्योहारी खरीदारी की। देर रात होलिका दहन के साथ ही होली की धूम शुरू हो गई। बांदा शहर में करीब एक सैकड़ा और पूरे जनपद में लगभग 1173 स्थानों पर होली जलाई गई। होलिका दहन स्थलों के आसपास सजावट के बीच लाउडस्पीकर पर होली गीत गूंजते रहे।
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नई फसलों के साथ होलिका का किया पूजन
बांदा। होलिका दहन की ऊंची लपटों के बीच श्रद्धालुओं ने गेहूं की बाली व चना का बिरवा इत्यादि को होली में समर्पित किया। होलिका की चारों ओर सात परिक्रमा लगाईं। उधर, घरों में पूजा के दौरान गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाकर फूलों की माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल और पांच या सात प्रकार के अनाज तथा एक लोटा जल से पूजा की। बड़ी फुलौरी, मीठे पकवान, मिठाइयां आदि अर्पित कीं।

होली के लिए पिचकारियां खरीदते लोग। - फोटो : BANDA