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दवा विक्रेताओं की हड़ताल, मरीज हलाकान
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 14 Oct 2015 11:27 PM IST
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बांदा। खुदरा दवा व्यापार में फार्मेसिस्ट की
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अनिवार्यता और ड्रग लाइसेंस नवीनीकरण इत्यादि आनलाइन किए जाने का विरोध कर
रहे दवा विक्रेताओं ने बुधवार को हड़ताल कर पूरा कारोबार बंद रखा।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की अगुवाई मेें बांदा जनपद की आठ सौ से ज्यादा दवा की दुकानें बंद रहीं। लगभग एक करोड़ से ज्यादा का दवा कारोबार नहीं हुआ। टैक्स के रूप में मिलने वाले लगभग छह लाख रुपये के राजस्व का सरकार को भी नुकसान हुआ।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि आनलाइन फार्मेसी से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ेगी। दवा की गुणवत्ता से खिलवाड़ होगा। गांवों में जीवन रक्षक दवाओं की कमी होगी। उत्तर प्रदेश के लगभग सवा लाख दवा व्यवसायी और चार लाख कर्मचारी तथा उनसे जुड़े 25 लाख परिजन प्रभावित होंगे।
बांदा जनपद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बांदा शहर समेत कस्बों में बाइक जुलूस निकाला और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में फार्मेसिस्टों का भारी अभाव है। खुदरा दवा की दुकानों के लगभग 70 हजार लाइसेंस हैं।
इतनी बड़ी तादाद में फार्मेसिस्ट कहां से आएंगे। नवीनीकरण आनलाइन होने से खुदरा दवा दुकानों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा। प्रदेश में लगभग 60 हजार खुदरा दवा दुकानें बंद होने की कगार पर हैं। हजारों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कानून में संशोधन करके फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता खत्म की जाए।
एसोसिएशन अध्यक्ष संतोष कुमार (शांतनु ओमर), उपाध्यक्ष अवधेश कपूर, संरक्षक लक्ष्मी नारायण गुप्त, महामंत्री उमाशंकर रुपौलिहा और मंत्री भरत कुमार आदि के नेतृत्व में दवा विक्रेताओं ने बाइक जुलूस निकालने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। मुमताज अहमद, संजय कुमार, राज कुमार गुप्ता, अमित सेठ भोलू, मनोज कुमार, राहुल गुप्ता, दिलीप इत्यादि शामिल रहे।
दुकानें बंद रहने से लोग दवा के लिए भटकते रहे। उधर, बबेरू में एसोसिएशन के स्थानीय अध्यक्ष नवल किशोर गुप्त और उपाध्यक्ष संतोष कुमार अग्रवाल ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। सालिगराम शिवहरे, दिनकर सिंह, शिव कुमार गुप्त, विनीत सिंह, विमल कुमार गुप्त, कुलदीप, अनिल गुप्ता, प्रशांत कुमार आदि शामिल रहे।
अतर्रा, नरैनी, कमासिन, चिल्ला, बदौसा, तिंदवारी, मटौंध, करतल, कालिंजर, बिसंडा, बेंदाघाट आदि में भी दवा की दुकानें बंद रहीं।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की अगुवाई मेें बांदा जनपद की आठ सौ से ज्यादा दवा की दुकानें बंद रहीं। लगभग एक करोड़ से ज्यादा का दवा कारोबार नहीं हुआ। टैक्स के रूप में मिलने वाले लगभग छह लाख रुपये के राजस्व का सरकार को भी नुकसान हुआ।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि आनलाइन फार्मेसी से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ेगी। दवा की गुणवत्ता से खिलवाड़ होगा। गांवों में जीवन रक्षक दवाओं की कमी होगी। उत्तर प्रदेश के लगभग सवा लाख दवा व्यवसायी और चार लाख कर्मचारी तथा उनसे जुड़े 25 लाख परिजन प्रभावित होंगे।
बांदा जनपद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बांदा शहर समेत कस्बों में बाइक जुलूस निकाला और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में फार्मेसिस्टों का भारी अभाव है। खुदरा दवा की दुकानों के लगभग 70 हजार लाइसेंस हैं।
इतनी बड़ी तादाद में फार्मेसिस्ट कहां से आएंगे। नवीनीकरण आनलाइन होने से खुदरा दवा दुकानों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा। प्रदेश में लगभग 60 हजार खुदरा दवा दुकानें बंद होने की कगार पर हैं। हजारों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कानून में संशोधन करके फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता खत्म की जाए।
एसोसिएशन अध्यक्ष संतोष कुमार (शांतनु ओमर), उपाध्यक्ष अवधेश कपूर, संरक्षक लक्ष्मी नारायण गुप्त, महामंत्री उमाशंकर रुपौलिहा और मंत्री भरत कुमार आदि के नेतृत्व में दवा विक्रेताओं ने बाइक जुलूस निकालने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। मुमताज अहमद, संजय कुमार, राज कुमार गुप्ता, अमित सेठ भोलू, मनोज कुमार, राहुल गुप्ता, दिलीप इत्यादि शामिल रहे।
दुकानें बंद रहने से लोग दवा के लिए भटकते रहे। उधर, बबेरू में एसोसिएशन के स्थानीय अध्यक्ष नवल किशोर गुप्त और उपाध्यक्ष संतोष कुमार अग्रवाल ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। सालिगराम शिवहरे, दिनकर सिंह, शिव कुमार गुप्त, विनीत सिंह, विमल कुमार गुप्त, कुलदीप, अनिल गुप्ता, प्रशांत कुमार आदि शामिल रहे।
अतर्रा, नरैनी, कमासिन, चिल्ला, बदौसा, तिंदवारी, मटौंध, करतल, कालिंजर, बिसंडा, बेंदाघाट आदि में भी दवा की दुकानें बंद रहीं।