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अवैध खनन में पकड़ी मशीनें गायब होने की जांच

Thu, 20 Oct 2016 11:31 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा Updated Thu, 20 Oct 2016 11:31 PM IST
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Caught in illegal mining probe disappearance Machines
कुरधना खदान में जलधारा के बीच मशीनों से निकाली जा रही बालू। - फोटो : अमर उजाला
बांदा। अफसरों की टीम द्वारा रंगेहाथ पकड़ी गई अवैध खनन कर रही मशीनों को पुलिस की सुपुर्दगी से रातोंरात गायब होने पर डीएम ने डीआईजी और एसपी को कड़ा पत्र भेजा है। इसमें थानाध्यक्ष व पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की है। डीएम ने टीम की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि मशीनों को गायब कराने में थानाध्यक्ष और पुलिस कर्मियों का हाथ है। डीआईजी ने पुलिस अधीक्षक को जांच के आदेश दिए हैं।
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सात सितंबर की रात करीब 11 बजे एसडीएम प्रहलाद सिंह, तहसीलदार सुनील पटेल, क्षेत्राधिकारी सदर आदि ने लुकतरा गांव में बालू खदान में छापा मारा था। अफसरों के साथ देहात कोतवाली प्रभारी मनोज पाठक भी थे। टीम ने अवैध खनन से लदे 13 ट्रकों को सीज कर दिया।
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वहां से टीम पथरी गांव पहुंची। यहां एक पोकलैंड मशीन, दो जेसीबी और एक डंपर पकड़ा। इन मशीनों में कोई ड्राइवर नहीं था। एसडीएम और क्षेत्राधिकारी ने वाहनों और मशीनों को मौके पर मौजूद देहात कोतवाली थानाध्यक्ष को सुपुर्द कर लगातार निगरानी को कहा। साथ ही अगले दिन आकर अगली कार्रवाई की बात कही। अगले दिन आठ सितंबर को जब तहसीलदार और एआरटीओ मौके पर पहुंचे तो डंपर और मशीनें गायब थीं।
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डीएम ने पत्र में पूरा ब्योरा दर्ज करते हुए एसडीएम की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि मशीनों और डंपर को गायब कराने में थानाध्यक्ष, कोतवाली देहात के पुलिस कर्मियों की संलिप्तता है। डीएम ने कहा है कि थानाध्यक्ष की इस हरकत से शासन और प्रशासन की प्रतिष्ठा और अर्थदंड के रूप में मिलने वाले राजस्व को क्षति पहुंची है।

इससे माफिया का मनोबल बढ़ा है। डीएम ने एसपी से कहा कि इस प्रकरण की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराकर दोषी थानाध्यक्ष और पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करें और उन्हें भी अवगत कराएं। डीएम ने यह पत्र डीआईजी को भी भेजा है। डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने बताया कि डीएम के पत्र पर पुलिस अधीक्षक को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।

केन और बागै नदियों में अवैध खनन पर सुनवाई कर रही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा तलब अवैध खनन करने वालों के अब तक ट्रिब्यूनल में हाजिर न होने पर यूपी और एमपी की सरकारों और संबंधित जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा है कि जिनको नोटिस जारी हुई है, उन्हें हर हाल में आठ नवंबर को पेश कराएं। स्वयंसेवी जगमोहन यादव ने एनजीटी में अवैध खनन के विरुद्ध याचिका दायर की है।

इस पर दो वर्षों से सुनवाई हो रही है। एनजीटी बांदा और फतेहपुर के डीएम को आदेश दे चुकी है कि अवैध खनन वाली खदानों और बालू लेकर गुजरने वाले ट्रकों के रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।


एनजीटी ने अवैध खनन करने वाले 23 लोगों को साल भर पूर्व नोटिस जारी कर तलब किया था, लेकिन मात्र साबिर खां ने ही एनजीटी में उपस्थित होकर जवाब दाखिल किया। इस पर एनजीटी चेयरपर्सन न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार और न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति रघुवींद्र सिंह राठौर तथा विशेषज्ञ सदस्य विक्रम सिंह सजवान ने यूपी-एमपी सरकारों को निर्देश दिया कि सभी को नोटिस तामील कराकर 8 नवंबर के पूर्व उनका जवाब कोर्ट में पेश करें।
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