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गोशालाओं में भीषण गर्मी से जूझ रहे मवेशी
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बांदा। गोशालाओं में बंद अन्ना मवेशी अब भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। इनके पीने के लिए पानी भी नहीं है। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जा रही है। कोरोना के खौफ से अधिकारी इस ओर से मुंह मोड़े हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना मवेशियों को भूख प्यास से बचाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा खर्च कर रही है, लेकिन अधिकारी अन्ना मवेशियों को लेकर बेपरवाह है। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा में 144 अस्थायी व चार कान्हा गोशालाओं में 20 हजार, चित्रकूट में 271 गोशालाओं में 28 हजार, महोबा में 159 गोशालाओं में 26 हजार और हमीरपुर की 318 गोशालाओं में करीब 24 हजार अन्ना मवेशी संरक्षित हैं।
इनमें बीस फीसदी गोशालाओं में छेायादार टिनशेड नहीं है। ठंड के दिनों में खुले में खड़े मवेशी कंपकंपाते रहे। पानी में भीगने से दर्जनों मवेशियों की ठंड से मौत हो गई। अब मवेशी आग उगलते आसमान के नीचे खड़े है। पीने के लिए पानी भी नहीं है। ग्राम पंचायत चरही में एक बार पानी भरने के बाद कई-कई दिनों तक मुड़कर भी नहीं देखती है।
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भूख और प्यास से मरने वाले मवेशियों को चोरी छुपे दफना दिया जाता है। हाल में जांच के दौरान कागजों में दर्ज गोशालाओं में संरक्षित पशुओं की संख्या कम निकली। प्रभारी उप निदेशक पशुपालन आईएन सिंह ने कहा कि अस्थाई गोशालाओं में टिनशेड लगवाने का काम ग्राम पंचायतों का है। जल्द अधिकारियों की टीम गठित कर गोशालाओं में उपलब्ध व्यवस्थाओं की रिपोर्ट मंगाकर कार्रवाई की जाएगी।
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चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना मवेशियों को भूख प्यास से बचाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा खर्च कर रही है, लेकिन अधिकारी अन्ना मवेशियों को लेकर बेपरवाह है। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा में 144 अस्थायी व चार कान्हा गोशालाओं में 20 हजार, चित्रकूट में 271 गोशालाओं में 28 हजार, महोबा में 159 गोशालाओं में 26 हजार और हमीरपुर की 318 गोशालाओं में करीब 24 हजार अन्ना मवेशी संरक्षित हैं।
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इनमें बीस फीसदी गोशालाओं में छेायादार टिनशेड नहीं है। ठंड के दिनों में खुले में खड़े मवेशी कंपकंपाते रहे। पानी में भीगने से दर्जनों मवेशियों की ठंड से मौत हो गई। अब मवेशी आग उगलते आसमान के नीचे खड़े है। पीने के लिए पानी भी नहीं है। ग्राम पंचायत चरही में एक बार पानी भरने के बाद कई-कई दिनों तक मुड़कर भी नहीं देखती है।
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भूख और प्यास से मरने वाले मवेशियों को चोरी छुपे दफना दिया जाता है। हाल में जांच के दौरान कागजों में दर्ज गोशालाओं में संरक्षित पशुओं की संख्या कम निकली। प्रभारी उप निदेशक पशुपालन आईएन सिंह ने कहा कि अस्थाई गोशालाओं में टिनशेड लगवाने का काम ग्राम पंचायतों का है। जल्द अधिकारियों की टीम गठित कर गोशालाओं में उपलब्ध व्यवस्थाओं की रिपोर्ट मंगाकर कार्रवाई की जाएगी।